काव्य गोष्ठी:सूरज बोले- तन चाहे बुढ़ा हो मन हमेशा जवान रखो, राष्ट्र के खातिर हर पल तैयार रहो

प्रतापगढ़6 दिन पहले
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अखिल भारतीय साहित्य परिषद, राष्ट्रीय कवि संगम और नव सृजन साहित्य संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में युवाओं के प्रेरणा स्रोत आध्यात्मिक गुरु विवेकानंद की जयंती पर मयूर इंटरनेशनल स्कूल में विचार एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ। शुरूआत में स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय एवं उनके जीवन के अनुकरणीय प्रसंगों की जानकारी देते हुए कवि सुरेन्द्र सुमन ने शारदे वंदना के साथ स्वार्थ साधना छोड़े हम विवेकानंद बन जाएं। उठे जागे प्रतिपल आगे बढ़ते जाएं।। व्यंग्यकार कुंवर प्रताप ने धरा झूम के नाचेगी।

आसमान यशगान गायेगा, शिक्षाविद् लोकेंद्र सिंह ने अपना तन युवा मन भटक रहा.. युवा मन और अनुभव कविता से प्रेरणास्रोत को नमन किया। मनीषा त्रिवेदी ने अश्कों की बूंदों से सबको इतिहास बताता हूं... हास्य पैरोडी कार धनपाल धमाका ने माथे चंदन लगाके देखना सब जान जाओंगे, एक बार विवेकानंद बन कर देख लो.., वरिष्ठ साहित्यकार चांदमल चंद्रेश ने चरित्र निर्माण जरूरी है, समता समानता अखंडता के लिए विवेकानंद बनना बहुत जरूरी है की प्रस्तुति दी। इसी क्रम में वरिष्ठ कवि सुरेश सूरज ने विवेकानंद जी के प्रेरणास्प्रद प्रसंगों का वर्णन कर तन चाहे बुढ़ा हो मन हमेशा जवान रखो, राष्ट्र के खातिर हर पल तैयार रहो कविता सुनाई। विचार गोष्ठी का संचालन कुंवर प्रताप ने किया।

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