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निर्देशों की अनदेखी:सभापति ने 3 दिन में शहर से सुअर हटाने के निर्देश दिए थे, 6 दिन बीतने के बावजूद अभियान शुरू तक नहीं हुआ

प्रतापगढ़17 दिन पहले
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  • सभापति बोलीं-आयुक्त ने टेंडर पर साइन नहीं किए, सोमवार से अपने स्तर पर हटाएंगे सुअर
  • परेशान हैं शहरवासी : आयुक्त ने कहा-सुअर पकड़ने के लिए टेंडर के नाम पर खानापूर्ति नहीं करनी है, इससे पहले कभी टेंडर नहीं हुए, परिषद समय-समय पर अभियान चलाकर पकड़ती है सुअर

शहर में सुअरों के बढ़ते कुनबे की समस्या से आमजन पूरी तरह त्रस्त है। सुअरों का आतंक इस कदर है कि अब वे लोगों के हाथों से थैला या पॉलीथीन तक खींचकर ले जा रहे हैं। कई छोटे बच्चों को शौच के दौरान चोटिल कर चुके हैं। आमजन की इस समस्या को लेकर सभापति रामकन्या गुर्जर और उनके पति प्रहलाद गुर्जर ने कई बार धरना-प्रदर्शन भी किए लेकिन कोई नतीजा नही निकला।

इसके बाद हाल ही हुए नगर परिषद चुनाव में सभापति बनीं रामकन्या गुर्जर ने चुनावी घोषणा पत्र में शहर को सुअर मुक्त करने का वादा किया। इतना ही यह भी कहा कि जब तक शहर सुअर मुक्त नही हो जाएगा तब तक वे सभापति की सीट पर नहीं बैठेंगी। चुनाव का नतीजा आने पर सभापति ने वादे के मुताबिक 12 फरवरी को अपने पहले हस्ताक्षर उस दस्तावेज में किए जिसमें सुअर पालकों को 3 दिन में सुअर हटाने का नोटिस दिया गया।

साथ ही सुअरों को पकड़ने के लिए टेंडर भी किए जाने की पत्रावली पर हस्ताक्षर किए लेकिन उन्होंने कार्यवाहक आयुक्त एईएन जितेंद्र मीना द्वारा पत्रावली पर साइन नही किए जाने की बात कही। ऐसे में सभापति के आदेश को 6 दिन गुजर गए हैं लेकिन अब तक न तो सुअर पालकों ने अपने-अपने सुअर हटाए और न ही परिषद की ओर से सुअरों को हटाने के लिए कोई कार्रवाई की गई है।

इसका नतीजा यह है कि प्रत्येक वार्ड, गली, मोहल्ले, सड़क व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सुअरों का आतंक है। शहर की करीब 40 हजार की आबादी में से करीब 3 हजार सुअर हैं। सुअर पालकों द्वारा सुअरों को खुले में छोड़ने से इनकी संख्या में प्रतिदिन इजाफा हो रहा है। मादा सुअर एक बार में 12 बच्चे देती है। इनमें से करीब 8 बच्चे ही जीवित रह पाते हैं। ऐसे में सुअर व इनके पीछे चलते सुअर के बच्चों का रेला हर जगह आसानी से दिखना आम है।

नगर परिषद के मंथर प्रयास : शहर को सुअर मुक्त करने के लिए नगर परिषद की ओर से प्रतिवर्ष अभियान चलाया जाता है। लेकिन यह अभियान मात्र फौरी कार्रवाई या यों कहें कि दिखावे के लिए ही चलाया जाता रहा है। यही कारण है कि सुअर पकड़ने के लिए अब तक नगरपरिषद की ओर से किसी प्रकार का टेंडर नही किया गया।

वर्ष 2018 में नगरपरिषद के कार्मिकों द्वारा 10 दिन का अभियान चलाकर करीब 60 सुअर पकड़े गए। इसी प्रकार वर्ष 2019 में 7 दिन का अभियान चलाकर 50 सुअर पकड़े गए। इस प्रकार दो साल में मात्र 110 सुअर पकड़े गए जबकि सुअरों की संख्या में 8 गुना इजाफा हो रहा है। ऐसे में हालत यह है कि प्रत्येक वार्ड में 60 या इससे अधिक सुअर हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है।

अगर 2011 से बात की जाए तो प्रत्येक वर्ष सुअर पकड़ने के लिए बिना टेंडर के 10 से 15 दिन का अभियान चलाया जाता है। परिषद की ओर से पिछले सालों में चलाए गए अभियान के दौरान इन्हें पकड़कर बांसवाड़ा रोड पर जंगलों में छोड़ गया। लेकिन शहर में विचरण करने वाले सभी सुअरों को नही पकड़ने से इनकी वंश वृद्धि हो रही है। परिषद से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 में कोरोना के चलते सुअर पकड़ने का अभियान ही नही चलाया गया। इस वर्ष सभापति के नोटिस के बाद नगरपरिषद कार्मिकों ने करीब एक दर्जन सुअरों को पकड़कर अन्यत्र छोड़ा।

सुअर पालकों को मिला है संरक्षण, संरक्षण देने वालों को पहनाएंगे जूतों की माला
इस बारे में सभापति रामकन्या गुर्जर ने भास्कर से विशेष बातचीत में बताया कि सुअर पालकों को संरक्षण मिला हुआ है। (किसका संरक्षण मिल रहा है इस पर जवाब नही दिया) सभापति ने बताया कि सुअरों को शहर से बेदखल करने के लिए अब सोमवार से स्वयं के स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। इसमें टांग अड़ाने वालों को बख्शा नही जाएगा और जूतों की माला पहनाई जाएगी। जरूरत पड़ी तो शहरवासियों के सहयोग से प्रतापगढ़ भी बंद कराया जाएगा।

राहगीर और शहरवासी परेशान
सुअरों की बढ़ते कुनबे के कारण शहर में इनका आतंक है। आते-जाते राहगीरों और थैला हाथ में लटकाकर चलना लोगों के लिए दुश्वार बन गया है। सुअर झपटटा मारकर सामान फैला देते हैं। लोगों की परेशानी को देखते हुए सभापति बनने के बाद पहली बार यह मौका आया है कि किसी जनप्रतिनिधि ने सुअरों की समस्या से निजात दिलाने के लिए अपनी मंशा जताते हुए पहले हस्ताक्षर सुअर मालिकों को नोटिस जारी करने पर किए। वहीं प्रशासनिक सुस्तता इस कदर है कि सुअर पकड़ने के टेंडर पर कार्यवाहक आयुक्त ने साइन तक नही किए। ऐसे में सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों की ढिलाई शहरवासियों पर भारी पड़ रही है।

शहर में सुअर वर्षों से हैं। सुअर पकड़ने के टेंडर के नाम पर खानापूर्ति नही करनी है। इससे पहले कभी टेंडर नही हुए। नगर परिषद की नैतिक जिम्मेदारी के अनुसार समय-समय पर सुअरों को अभियान के दौरान कई बार पकड़कर बाहर छोड़ा लेकिन ये फिर से वापस आ जाते हैं। 15 फरवरी को ही करीब एक दर्जन सुअर पकड़कर छोड़े गए। टेंडर के नाम पर सुअर मुक्त शहर करने का श्रेय नही लेना चाहिए। सुअर मालिकों या इनकी कमेटी से बात कर समस्या का स्थाई हल करने का प्रयास किया जा रहा है।
जितेंद्र मीणा, एईएन व कार्यवाहक आयुक्त, नगरपरिषद।

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