पैंथर का हमला:पिंडावल में बछड़े और भेड़ाें की माैत का आंकड़ा पहुंचा 71, अधिकतर के गर्दन व सिर पर दांत के निशान मिले

पिंडावल16 दिन पहले
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भेड़ो का पोस्टमार्टम करने के बाद दफनाते हुए। - Dainik Bhaskar
भेड़ो का पोस्टमार्टम करने के बाद दफनाते हुए।

पिंडावल में बुधवार शाम को पैंथर के हमले से बछड़े समेत भेडाें के मरने का आंकड़ा 71 तक पहुंचा। 2 बड़ी भेड़ समेत 9 बछड़ाें के घायल होने की पुष्टि हुई। बछड़े की कीमत 4 से 5 हजार और बड़ी भेड़ की कीमत 10 हजार होती हैं। इस घटना ने क्षेत्र के पशुपालकाें व लाेगाें में भय का माहाैल बना हुआ है। इस तरह का हमला दाेबारा नहीं हाे, इसके लिए वन विभाग व पुलिस की टीम रात भर यहां पर माैजूद रही।

गुरुवार सुबह रेंजर सेवुलाल निनामा, फाॅरेस्टर हितेंद्र सिंह शक्तावत ने भेड़ पालकों से जानकारी ली। नोडल अधिकारी डॉ टेकचंद, चिकित्सा अधिकारी डॉ भरत महला, पशुधन सहायक महेंद्र सिंह ने मृत भेड़ों का पोस्टमार्टम करा कर सोनगिरि पर्वत की तलहटी में जेसीबी की सहायता से दफनाया गया।

पशुपालन विभाग के चिकित्सा अधिकारी डॉ. भरत महिला ने बताया कि 71 भेडाें की माैत हाेने से इसकी फाइनल रिपाेर्ट तैयार हाेने में पांच-सात दिन लगेंगे। किसी बड़े जंगली जानवर के गर्दन व सिर पर दांत के निशान मिले है। प्रथम दृष्टया माैत का कारण किसी बड़े जंगली जानवर ने भेड़ों की गर्दन काे पकड़ा है। वन अधिकारियाें का कहना है कि इस घटना में एक से अधिक पैंथर शामिल है। अकेला पैंथर इस तरह की घटना नहीं कर सकता है। एएसआई हीरालाल, वन विभाग की टीम के साथ जनप्रतिनिधि, हल्का पटवारी हेमेश भावसार, सहायक सचिव डूंगर सिंह मौजूद रहे।

रेंजर सेवुलाल निनामा का कहना है कि बछ़डे व भेड़ पर चाेट के निशान वन्यजीव के है। यह एक या दाे या उससे अधिक वन्यजीव ने घटना काे अंजाम दिया। इस स्थान से कुछ दूरी पर जंगल है। साबला सोनगिरी पर्वत की तलहटी में किसानाें के खेत हैं। वही कई पशुपालक अपने मवेशियों को लेकर यहां जाते हैं। गांव के किसानों ने इससे पहले भी यहां पैंथर की हलचल देखी है लेकिन इससे पहले बकरिया आदि के ही शिकार होते रहे हैं।

गांव के चेतन मीणा ने बताया कि कुछ दिन पूर्व सोनगिरी पर्वत के पास भी पैंथर व उसके शावकाें को देखा गया था, हो सकता है इस घटना को उन्हाेंने अंजाम दिया हो। जिस स्थान पर हादसे हुआ है, उस स्थान से महज 500 मीटर की दूरी पर ही सोनगिरी पर्वत है। यहां पर अधिकारियों के मुताबिक बड़ी संख्या में पेंथर सहित वन्य जीव निवास करते हैं। यहां रहने वाले वन्यजीव रात को शिकार करने के लिए बाहर निकलते हैं। लोगों का मानना है एक बार मवेशियों का खून मुंह लगने के बाद वन्यजीवों की हलचल बढ़ने की संभावना अधिक रहती है।

यह था मामला
पिंडावल गांव के पूर्व सरपंच कमलजी मीणा के नए मकान परिसर में पेड़ों के पास बछड़े बंधे हुए थे। भेड़ के मालिक बुधवार दोपहर में बछड़ों को छोड़ कर दूसरे भेड़ों को लेकर चराने के लिए साबला सोनगिरी पर्वत के आसपास गए हुए थे। इसके बाद पीछे से आंगन में बंधे बछड़ो को अपना शिकार बनाते हुए करीब 71 बछड़े-भेड़ का शिकार कर लिया। इससे ग्रामीण भयभीत है।

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