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टीकाडरण:तीन सेंटर, 1006 में से 516 ही टीके लगवाने आए, बोले-बाद में लगवाएंगे

प्रतापगढ़एक महीने पहले
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  • ग्राउंड रिपोर्ट-कर्मचारियों में भ्रांतियां, सूची में दो-दो बार नाम से बढ़ गए लाभार्थी

चिकित्सा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के कर्मचारी विभिन्न भ्रांतियों के चलते वैक्सीनेशन करवाने में कम रूचि दिखा रहे हैं। शुरुआती चरण में जिले में अब तक 60 प्रतिशत वैक्सीनेशन ही हो पाया है। इसके कारण कई हैं। जानकारों का कहना है कि काेविन एप में पंजीकृत हेल्थ वर्कर्स के डाटा तैयार करने में गड़बड़ी हुई है।

पहले दिन काेविन एप से काफी कम हैल्थ वर्कराें काे मैसेज पहुंचे। इसके बाद चिकित्सा विभाग ने कॉल कर चिकित्सा कर्मियाें काे वैक्सीनेशन के लिए बुलाया था।

काेविन एप से जारी सूची में कई नाम दाे या इससे ज्यादा बार लिख देने से लाभार्थियों की संख्या बढ़ गई है। पहले दिन के शिविर के लिए बनी सूची में 25 से ज्यादा नाम दाे-दो बार आए थे। सूची में तबादला हाे चुके हैल्थ वर्कराें के नाम भी शामिल थे। दूसरे, तीसरे सेशन के दाैरान भी काेविन एप से जारी सूचियाें में गड़बड़ी मिली।

पहले चरण में जिला चिकित्सालय, सीएचसी अरनोद और सीएचसी छोटीसादड़ी में 1006 लोगों का रजिस्ट्रेशन हुआ। इनमें से केवल 516 हेल्थ वर्करों ने ही टीके लगवाए हैं। जबकि 484 लोग टीका लगवाने पहुंचे ही नहीं। ज्यादातर हेल्थ वर्कर अभी टीका लगवाने से झिझक रहे हैं। कुछ का कहना है कि पहले वे दूसरे लोगों का रिजल्ट देखना चाहते हैं। जबकि कुछ लोग शहर से बाहर होने अथवा स्वास्थ्य ठीक नहीं होने जैसे अन्य कारण बता रहे हैं।

पंजीकृत लाभार्थियों के नहीं पहुंचने से तीन दिन के शिविर में खराब हो गए 34 डोज
पंजीकृत लाभार्थियों के नहीं पहुंचने के कारण पहले चरण के शुरुआती तीन दिन के शिविर में वैक्सीन के 34 डोज खराब हो चुके हैं। जिले में पिछले 3 दिन के शिविरों में 34 डोज यानी 4 वॉयल फेंकनी पड़ी है। हालांकि केंद्र सरकार ने पहले ही सरकारों को यह स्पष्ट कहा था कि वैक्सीन का एक भी डाेज खराब नहीं होना चाहिए, लेकिन प्रदेश में भारी मात्रा में डोज खराब होने का मामला एक दिन पहले ही सामने आया था।

इस पर सरकार ने फिर इसके बारे में स्पष्ट गाइडलाइन जारी करते हुए डोज को खराब होने से बचाने के लिए अगले शिविर के लिए पंजीकृत लाभार्थियों को बुलाकर टीके लगाने की बात कही है। सरकार का रिमाइंडर जारी होने से पहले जिले में 34 डोज खराब हो चुके हैं। शुरुआती तीन दिन के वैक्सीनेशन में जिले में केवल 51 फीसदी हैल्थ वर्कर ही टीका लगवाने पहुंचे।

जिले में पहले दिन 52 फीसदी कर्मचारियों ने टीका लगवाया था। हालांकि तीसरे दिन यह बढ़कर 64 प्रतिशत तक पहुंच गया है, लेकिन विभाग को अब भी शत-प्रतिशत टीकाकरण में सफलता नहीं मिल पाई है। पिछले तीन दिन में जिले में 61.95 फीसदी टीकाकरण हुआ है।

अब नहीं फेंकनी पड़ेगी वैक्सीन: आरसीएचओ
काेविन एप के चलते समस्या हाे रही थी, लेकिन अब उसमें सुधार किया जा रहा है। अब जिले में टीकाकरण की रफ्तार तेज हाे जाएगी। नए सॉफ्टवेयर की वजह से पहले 3 सेशन में कुछ दिक्कतें आई थीं। एक वॉयल को खुलने के बाद 4 घंटे में ही उपयोग करना होता है। उसके बाद बची डोज को डिस्कार्ट करना होता है।

पहले नियम था कि हेल्थ वर्कर को निर्धारित दिन पर ही वैक्सीन लगाई जानी थी। भले ही डोज फेंकनी पड़ रही हो और हेल्थ वर्कर सामने खड़ा हो, लेकिन केंद्र सरकार ने अब इस नियम में छूट दे दी है। अब अगर डोज बच रही है तो बिना नंबर के भी रजिस्टर्ड हेल्थ वर्कर में से किसी को भी वैक्सीन लगाई जा सकती है।
-डॉ. दीपक मीना, आरसीएचओ, वैक्सीन जिला नोडल अधिकारी।

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