जन संकल्प से हारेगा कोरोना:30% फेफड़े खराब हुए, 5 दिन ऑक्सीजन पर, 3 अस्पताल बदले, हार नहीं मानी और जीती जंग

राजसमंद6 महीने पहले
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  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति अाैर सकारात्मक साेच रखकर काेराेना काे हराने की कहानी...

कोरोना वॉरियर अधिवक्ता ललित साहू, मन के हारे हार है मन के जीते जीत...। कोरोना से लड़ाई में जीत के लिए इन दिनों यह अचूक मंत्र किसी दवा से कम नहीं है। मंत्र के बूते ही पूर्व लाेक अभियाेजक अधिवक्ता ललित साहू ने संक्रमण से फेंफड़े 30 प्रतिशत खराब हाेने, ऑक्सीजन बेड पर रहने तथा 3 अस्पताल बदलने के बावजूद 27 दिन बाद काेराेना से जंग जीत ली।

फेफड़ों में संक्रमण तथा 3 अस्पतालों में उपचार लेकर 5 दिन तक ऑक्सीजन बेड पर रहना पड़ा, लेकिन उन्हाेंने हिम्मत नहीं हारी। कांकराेली नया बाजार निवासी अधिवक्ता ललित साहू काे 6 सितंबर 2020 को थकान, कमजाेरी, गले में इंफेक्शन, बुखार महसूस हुआ। परिजनाें की सलाह पर वे आरके अस्पताल गए, जहां डाॅक्टराें ने प्राथमिक उपचार कर उदयपुर रेफर कर दिया। उदयपुर में परिजन दाे निजी अस्पताल ले गए, जहां हालात देखकर इलाज करने से मना किया।

बाद में उन्हें देलवाड़ा के पास प्राइवेट अस्पताल ले गए, जहां आइसोलेशन वार्ड में रखा। सांस लेने, चलने-फिरने में बहुत कठिनाई महसूस होने पर डाॅक्टराें ने काेविड की जांच लिखी ताे काेराेना पाॅजिटिव आया। डॉक्टर बाेले- फेफड़ों में 30 प्रतिशत संक्रमण है। ऑक्सीजन लेवल भी 80 पर आ गया है। फेफड़ों में काफी कफ जम गया है। डाॅक्टराें ने कोविड के इलाज की दवाइयां, इंजेक्शन दिए, लेकिन सांस लेने की दिक्कत बढ़ती ही जा रही थी। धीरे-धीरे बेड से एक इंच भी हिलना ताे दूर आंख तक नहीं खुल रही थी।

हिलते ही सांस भर आती थी। बाद में ऑक्सीजन पर लेना पड़ा। 4-5 दिन ऑक्सीजन पर रहने के बाद आंखें खुलने लगी और कुछ बाेल पा रहा था। अस्पताल में भर्ती रहने के दाैरान दिमाग में कभी भी नकारात्मक विचार आने नहीं दिए। हमेशा विल पावर स्ट्रांग रखा। नींबू और गर्म पानी लेता रहा। इससे काफी आराम मिला।

सकारात्मक सोच, दाेस्ताें-परिजनाें ने हाैसला बढ़ाया

दाेस्त, परिजन मुझे हौसला देते रहे। सकारात्मक साेच, मजबूत इच्छाशक्ति के कारण 17 दिन अस्पताल में भर्ती रहने के बाद आखिर जंग जीत ही ली। मेरी अपील है कि कोरोना को हल्के में नहीं लें। सभी लोग मास्क लगाएं। सामाजिक दूरी का पालन करें। वैक्सीन तो अवश्य लगवाएं। साहू काे बचपन से ही पहलवानी का शौक रहा है। राेज अखाड़े में जाते और संघ की शाखाओं में प्रतिदिन व्यायाम के साथ फुटबॉल खेलने के शौक रहा है। हाल ही में जिला स्तर पर हुई फुटबॉल प्रतियोगिता में टीम को विजय दिलाकर जिले के बेस्ट खिलाड़ी का अवार्ड भी प्राप्त किया है।
-जैसा भास्कर के रिपाेर्टर नरपतनाथ चाैहान काे बताया

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