श्रीनाथजी प्रभु की हवेली में अन्नकूट लूट महोत्सव:ब्रज परंपरा के अनुसार आदिवासियों ने लूटा अन्नकूट, दर्शनों के लिए उमड़े श्रद्धालु

राजसमंद/नाथद्वाराएक महीने पहले
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श्रीजी मंदिर में अन्नकूट लूटने की परंपरा निभाई। - Dainik Bhaskar
श्रीजी मंदिर में अन्नकूट लूटने की परंपरा निभाई।

पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रधान पीठ श्रीनाथजी हवेली में दीपावली के दूसरे दिन शुक्रवार को अन्नकूट महोत्सव मनाया गया। श्रीजी प्रभु के सम्मुख डोल तिबारी में अन्नकूट रखा गया। रात 9 बजे के करीब अन्नकूट के दर्शन हुए। रात करीब 11.30 बजे अन्नकूट लूट हुई। मेवाड़ क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से आए अदिवासियों ने अन्नकूट लूटने की परंपरा को निभाया। अन्नकूट दर्शन और लूट को देखने के लिए आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। तिलकायत राकेश महाराज की आज्ञा अनुसार गोस्वामी विशाल बावा के निर्देशन में अन्नकूट लूट की परंपरा हुई।

कपड़े की झोली में चावल और मटकी में सब्जी लूटकर मंदिर से बाहर आते हुए।
कपड़े की झोली में चावल और मटकी में सब्जी लूटकर मंदिर से बाहर आते हुए।

प्रधानपीठ में विराजित प्रभु श्रीनाथजी के यहां त्योहार में सबसे महत्वपूर्ण अन्नकूट का पर्व मनाया गया। श्रीजी प्रभु के सामने सजाए विशेष प्रसाद को लूटने की जैसे ही शुरुआत की गई तो पूरे मेवाड़ अंचल से आए सैकड़ों आदिवासी समाज के सदस्यों ने अपने गले में बना रखी कपड़े की विशेष झोली के साथ मंदिर में प्रवेश करना शुरू कर दिया। आदिवासियों ने चावल सहित रखे सभी प्रसाद में जो हाथ लगा उसे झोली और मटकियों आदि में भरकर ले जाने लगे। भील सदस्य प्रसाद लेकर अपने साथ आए परिजनों को थमाने लगे। कई आदिवासी श्रीजी के डोल तिबारी और रतन चौक में जमाकर रखे चावल आदि प्रसाद को अपने गले में बनाई विशेष झोली में भरकर ले गए। कई आदिवासी चावल के साथ मटकों को भी उठाकर साथ में ले गए। करीब पौन घंटे से भी अधिक समय तक चले इस क्रम में सभी के हाथ जितना प्रसाद लगा लेकर गए।

अन्नकूट लूटकर बाहर आते बुजुर्ग का सहयोग करता साथी युवा आदिवासी।
अन्नकूट लूटकर बाहर आते बुजुर्ग का सहयोग करता साथी युवा आदिवासी।

चावल के साथ अन्य प्रसाद
प्रभु श्रीनाथजी को भोग लगाए जाने वाले प्रसाद में मंदिर की परंपरानुसार चावल का भोग लगाया जाता है, लेकिन चावल की सेवा श्रद्धालु वैष्णवों द्वारा भी की जाती है, जिससे यह चावल की मात्रा कई गुणा ज्यादा हो जाती है। इसके साथ वड़ा, मंगोड़ा, सूखी काचरी, ग्वारफली आदि कई प्रकार के आइटम एवं सेव और थूली के व्यंजन की नांद (मटकियां) का भोग लगाया गया।

कपड़े की झोली में अन्नकूट के चावल भरकर ले जाते हुए।
कपड़े की झोली में अन्नकूट के चावल भरकर ले जाते हुए।

श्रीजी संग बिराजे श्रीलालन और युगल स्वरूप
अन्नकूट के दर्शन के समय श्रीनाथजी की गोद में निधि स्वरूप लाडले लालन और द्वितीय पीठ में बिराजित युगल स्वरूप विट्ठलनाथजी को श्रीजी के संग विराजित किया गया। श्रद्धालुओं ने डोल तिबारी में खड़े रहकर गिरिराज धरण और जुगल जोड़ी सरकार के खूब जयकारे लगाए। अन्नकूट लूट के बाद श्रीनवनितप्रियाजी और श्रीविठ्ठलनाथजी पुनः निज मंदिर में पधारे।

ब्रज परंपरा अनुसार मेवाड़ के आदिवासी अन्नकूट लूटकर मंदिर से बाहर आते हुए।
ब्रज परंपरा अनुसार मेवाड़ के आदिवासी अन्नकूट लूटकर मंदिर से बाहर आते हुए।

अन्नकूट महाप्रसाद को सालभर सुरक्षित रखते हैं आदिवासी
अन्नकूट महाप्रसाद को आदिवासी लूटने के बाद सालभर तक सुरक्षित रखते है। लूट हुए चावल को घर ले जाकर सुखा दिया जाता है। इसके बाद इसे सुरक्षित भंडार में रख दिया जाता है। मान्यता अनुसार इससे घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती है। इस प्रसाद के अलग-अलग भावनाओं अनुसार कई महत्व है। आदिवासी समुदाय के लोग इन चावल का उपयोग औषधि के रूप में करते है। घर में किसी की मृत्यु हो जाने पर मृतक के मुंह में गंगाजल के अलावा इन चावल को रखने की भी स्थानीय लोगों में परंपरा है।

अन्नकूट लूटकर बाहर लेकर आते हुए।
अन्नकूट लूटकर बाहर लेकर आते हुए।

अन्नकूट दर्शन के लिए रही विशेष व्यवस्था
अन्नकूट दर्शन और लूट दर्शन के लिए मंदिर मंडल की ओर से विशेष व्यवस्था की गई। दर्शनार्थियों को प्रवेश लक्ष्मी निवास धर्मशाला से प्रवेश दिया गया और निकासी मोतीमहल गेट से की गई। अन्नकूट दर्शन में महिलाओं को चौपाटी से मंदिर मार्ग होते हुए लक्ष्मी निवास धर्मशाला के महिला प्रवेश द्वार से दिया गया। पुरूषों को चौपाटी से सेठों का पायसा, नया बाजार होते हुए लक्ष्मी निवास धर्मशाला के पुरूष प्रवेश द्वार से दिया गया।

अन्नकूट की सब्जी से भरा मटका लूटकर ले जाते हुए।
अन्नकूट की सब्जी से भरा मटका लूटकर ले जाते हुए।

दर्शनार्थियों को वितरित किया प्रसाद
श्रीनाथजी प्रभु के अन्नकूट दर्शन करने आए दर्शनार्थियों को प्रसाद का वितरण किया गया। मोतीमहल में विशेष काउंटर लगाकर दर्शन कर लौटने वाले दर्शनार्थियों को प्रसाद का वितरण किया गया। प्रसाद वितरण व्यवस्था की दर्शनार्थियों ने खूब सराहना की।

अन्नकूट लूट कर बाहर लेकर आते हुए।
अन्नकूट लूट कर बाहर लेकर आते हुए।

मंदिर के चौक में रेत और सीढ़ियों पर बिछाई घास
अन्नकूट लूट के दौरान श्रीनाथजी मंदिर के गोवर्धन पूजा चौक में रेत बिछाई गई। सुरजपोल की सीढ़ियों पर सूखी घास की बिछावट की गई। जिससे लूट के दौरान आने जाने में आदिवासियों का परेशानी नहीं हो और आदिवासी अन्नकूट लूटकर आसानी से बाहर आ सके।

चावल और मटकी में सब्जी एक साथ लूट कर लेकर आते हुए।
चावल और मटकी में सब्जी एक साथ लूट कर लेकर आते हुए।

400 पुलिस के जवानों ने संभाली सुरक्षा व्यवस्था
अन्नकूट लूट पर पुलिस की तरफ से 400 जवान और अधिकारी तैनात किए गए। जिले के समस्त थानों और पुलिस लाइन का जाब्ता तैनात रहा। मंदिर में श्रीनाथ गार्ड सहित होमगार्ड और निजी सुरक्षा कर्मियों ने सुरक्षा व्यवस्था को संभाला। अन्नकूट लूट के दौरान कलेक्टर अरविंद पोसवाल, एसपी सुधीर चौधरी, एएसपी शिवलाल बैरवा, नाथद्वारा उपखंड अधिकारी अभिषेक गोयल, मंदिर मंडल के मुख्य निष्पादन अधिकारी जितेंद्र ओझा, नाथद्वारा डिप्टी जितेंद्र आंचलिया, राजसमंद डिप्टी बेनीप्रसाद मीणा, नाथद्वारा थानाधिकारी पूरणसिंह राजपुरोहित, राजनगर थानाधिकारी डॉ. हनुवंतसिंह राजपुरोहित सहित कई अधिकारी मौजूद थे।

परंपरा अनुसार अन्नकूट लूट कर ले जाते आदिवासी समाज के लोग।
परंपरा अनुसार अन्नकूट लूट कर ले जाते आदिवासी समाज के लोग।
कपड़े की झोली में चावल लूटकर ले जाते हुए।
कपड़े की झोली में चावल लूटकर ले जाते हुए।