श्रीनाथ जी प्रभु को लगाया 351 सामग्री का भोग:शृंगार झांकी में प्रभु को धराया छप्पनभोग मनोरथ शृंगार, दोपहर 12 बजे खुले दर्शन

राजसमंद10 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो।

मार्गशीर्ष कृष्ण पंचमी बुधवार को श्रीनाथजी प्रभु की हवेली में अधकी (मनोरथी) का छप्पनभोग मनोरथ हुआ। मनोरथ को लेकर गोस्वामी विशाल बावा मुंबई से नाथद्वारा आए हैं। शृंगार झांकी में श्रीनाथजी प्रभु को छप्पनभोग मनोरथ का शृंगार धराया (कराया) गया। दोपहर 12 बजे छप्पनभोग मनोरथ के दर्शन खुले। मनोरथी परिवार के दर्शन करने के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन खुले। प्रभु को 351 सामग्री का भोग लगाया गया।

छप्पनभोग मनोरथ का भाव
श्रीनाथजी प्रभु की हवेली में नियम (घर) का छप्पनभोग वर्ष में केवल एक बार मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा को होता है। इसके अतिरिक्त विभिन्न खाली दिनों में वैष्णवों के अनुरोध पर तिलकायत की आज्ञानुसार मनोरथी द्वारा छप्पनभोग मनोरथ होता है। इस प्रकार के मनोरथ सभी वैष्णव मंदिरों और हवेलियों में होते हैं, जिन्हें सामान्यतया बड़ा मनोरथ कहा जाता है। छप्पनभोग की एक भावना है कि गौलोक में प्रभु श्रीकृष्ण व श्रीराधिकाजी एक दिव्य कमल पर विराजित हैं। उस कमल की तीन परतें होती हैं, जिनमें प्रथम परत में आठ, दूसरी में सौलह और तीसरी परत में बत्तीस पंखुड़ियां होती हैं। प्रत्येक पंखुड़ी पर प्रभु भक्त एक सखी और मध्य में भगवान विराजते हैं। इस प्रकार कुल पंखुड़ियों की संख्या छप्पन होती है और इन पंखुड़ियों पर विराजित प्रभु भक्त सखियां भक्तिपूर्वक प्रभु को एक-एक व्यंजन का भोग अर्पित करती हैं, जिससे छप्पनभोग बनता है।

श्रीजी में घर के छप्पनभोग और अधकी के छप्पनभोग का अंतर
श्रीनाथजी में नियम (घर) के छप्पनभोग की सामग्रियां उत्सव के 15 दिन पहले मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा से सिद्ध होना प्रारंभ हो जाती है, लेकिन अधकी के छप्पनभोग की सामग्रियां मनोरथ से आठ दिन पहले ही सिद्ध होना प्रारंभ होती है। नियम (घर) के छप्पनभोग ही वास्तविक छप्पनभोग होता है, क्योंकि अधकी का छप्पनभोग वास्तव में छप्पनभोग नहीं होकर एक मनोरथ ही है, जिसमें विविध प्रकार की सामग्रियां अधिक मात्रा में अरोगायी जाती है। नियम (घर) का छप्पनभोग गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में अरोगाया जाता है, इस कारण दर्शन सुबह करीब 11 बजे खुल जाते हैं, जबकि अधकी का छप्पनभोग मनोरथ राजभोग में अरोगाया जाता है, इस कारण दर्शन दोपहर करीब 12 बजे खुलते हैं। नियम (घर) का छप्पनभोग उत्सव में विविधता प्रधान है, इसमें कई अद्भुत सामग्रियां ऐसी होती है जो कि वर्ष में केवल इसी दिन अरोगायी जाती हैं। परंतु अधकी के छप्पनभोग मनोरथ संख्या प्रधान है, इसमें सामान्य मनोरथों में अरोगायी जाने वाली सामग्रियां अधिक मात्रा (351) में अरोगायी जाती हैं।

श्रीनाथजी हवेली की परिक्रमा कर दर्शन करने गए मनोरथी
श्रीनाथजी प्रभु की हवेली के मणिकोठा, डोल-तिबारी, रतनचौक आदि में छप्पनभोग के भोग सजाए। श्रीजी में मंगला झांकी के बाद सीधे राजभोग/छप्पनभोग (भोग सरे पश्चात) के दर्शन खुले। छप्पनभोग दर्शन में प्रभु सम्मुख 25 बड़ा सिकोरी (सोने का जालीदार पात्र) में रखे गए। सुबह 11.30 बजे मनोरथी वैष्णव अपने मेहमानों के साथ बैंड-बाजे के साथ श्रीजी मंदिर की परिक्रमा कर श्री नवनीतप्रियाजी के बगीचे में एकत्र हुए। इसके बाद श्रीनाथजी प्रभु के दर्शन किए।

श्रीनाथजी प्रभु को छप्पनभोग मनोरथ पर धराया शृंगार
गोस्वामी विशाल बावा ने सुबह शृंगार झांकी में श्रीजी प्रभु के श्रीचरणों में मोजाजी धराए। श्रीअंग पर पीली ज़री का सूथन, चाकदार वागा और चोली अंगीकार कराई। मेघश्याम ठाड़े वस्त्र धराए। श्रीजी को वनमाला (चरणारविन्द तक) का हल्का शृंगार धराया। फिरोज़ा के सर्व आभूषण धराए। श्रीमस्तक पर पीले टिपारा पर लाल खिनख़ाब के गौकर्ण, रूपहरी ज़री का घेरा और बायीं ओर शीशफूल धराया। श्रीकर्ण में फ़ीरोज़ा के मकराकृति कुंडल धराए। कमल माला धराई। सफेद और गुलाबी पुष्पों की दो मालाजी धराई। लहरिया के वेणुजी और दो वेत्रजी धराए। कंदराखंड में चित्रांकन वाली पिछवाई धराई गई। गादी, तकिया और चरण चौकी पर सफेद बिछावट की गई।

खबरें और भी हैं...