प्रसाद बिखेरा:द्वारिकाधीश मंदिर में लगातार तीसरे साल अन्नकूट लूट पर विवाद

राजसमंदएक महीने पहले
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कांकरोली द्वारिकाधीश मंदिर में लगातार तीसरी बार अन्नकूट लूट के दौरान विवाद हो गया। ऐसे में अन्नकूट का प्रसाद चावल, चवले, कड़ी, मटकियां आदि सभी मंदिर में बिखेर दी गई। पूरे मंदिर में परिसर में प्रसाद फैल गया। असामाजिक तत्वाें ने अन्नकूट लूटकर आ रहे लोगों का प्रसाद छीनकर बिखेर दिया। दीपावली के दूसरे दिन शुक्रवार को द्वारिकाधीश मंदिर में अन्नकूट होता है। शाम तीन बजे ठाकुरजी गोवर्धन चौक से रतन चौक के निज तिबारी में अन्नकूट आरोगने के लिए बिराजे। जहां शाम साढ़े छह बजे आम दर्शनार्थियों के लिए दर्शन खुले। यह दर्शन रात नौ बजे तक चलते रहे। इसके बाद साढ़े नौ बजे ब्रजवासी समुदाय की ओर से गुंजा लूटने की परंपरा का निर्वाह किया गया।

आदिवासी समुदाय की ओर से अन्नकूट लुटने की शुरुआत की गई। अन्नकूट लूट के लिए आदिवासी समुदाय के कुछ लोग मंदिर के अंदर पहले से ही उपस्थित थे। उनके द्वारा शुरुआती अन्नकूट का प्रसाद लूटा गया। जैसे ही वह प्रसाद लेकर मंदिर की सिंह पोल की सीढ़ियों से उतरने लगे। वहां पर पहले ही से ही मौजूद असामाजिक तत्वों ने उनसे प्रसाद को छीनकर बिखेर दिया। ऐसे में माहौल खराब हो गया। अन्नकूट लूटकर आने वालों से चावल, दाल, छबड़ी, कड़ी आदि की मटकियां फोड़कर चावल को पांवों में बिखेर दिया।

द्वारिकाधीश मंदिर में लगातार तीसरे साल भी अन्नकूट लूट पर विवाद हुआ। वर्ष 2018 व 2019 में भी अन्नकूट लूट पर विवाद हुआ था। जहां आदिवासी समुदाय की ओर से सखड़ी प्रसाद के अलावा अनसखड़ी प्रसाद लूटने की मांग की थी। 2018 और 2019 में भी अन्नकूट प्रसाद को बिखेर दिया गया था। 2019 में मंदिर प्रशासन ने 300 साल पुरानी परम्परा को बंद करने का निर्णय लिया। लेकिन 2020 में कोरोना के कारण आम दर्शनार्थियों के लिए दर्शन सांकेतिक रूप से अन्नकूट महोत्सव मनाया और आदिवासियों में अन्नकूट प्रसाद का वितरण कर दिया। इस साल मंदिर प्रशासन ने आदिवासी समुदाय के पदाधिकारियों से बात करके अन्नकूट परंपरा का निर्वाह करने पर सहमति बनाई गई। लेकिन इस बार भी अन्नकूट लूट पर विवाद हो गया।

द्वारकाधीश मंदिर में भाइयों का आपसी विवाद चल रहा है। ऐसे में मंदिर पीठाधीश्वर व गोस्वामी परिवार के बड़े भाई बृजेश कुमार महाराज ने बताया कि आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधि मंडल से वार्ता करके इस पूरे विवाद को शांत करने का प्रयास किया। पूर्व में भी वार्ता में आदिवासी समुदाय की कुछ मांगों को मान लिया गया। उनके प्रतिनिधियों द्वारा हमें आश्वस्त भी किया गया कि आगे अब ऐसा कुछ भी नहीं होगा। परंतु 2019 में फिर से असामाजिक तत्वों द्वारा मंदिर में प्रसाद का अपमान किया। द्वारकाधीश मंदिर ट्रस्ट ने लूट की परंपरा पर विचार करने का निश्चय किया। इस साल गोस्वामी पराग कुमार, गोस्वामी शिशिर कुमार, नैमिष कुमार, कपिल कुमार मंदिर की व्यवस्था व तैयारियों और तयशुदा कार्यक्रम को दरकिनार करते हुए अपने स्तर पर पुन: लूट की परंपरा को शुरू करने की बात कही। इस पर द्वारकाधीश मंदिर अधिकारी भगवतीलाल पालीवाल ने यह कह कर मना कर दिया कि 2019 में अन्नकूट के प्रसाद के अपमान के कारण उक्त परंपरा के बारे में विचार करने का निश्चय किया। लेकिन पुरानी गलतियों से कोई सबक नहीं लिया गया।

यह है विवाद : अन्नकूट महोत्सव पर चावल का मीड़ा बनाकर करीब 60 प्रकार के विविध प्रकार के व्यंजन रखे जाते हैं। अन्नकूट दर्शन के बाद इसमें से कुछ प्रसाद हटा दिया जाता है और चावल, सब्जी सहित अन्य प्रसाद को लूट के लिए रखा जाता है। हटाए गए प्रसाद को सेवा वालों सहित वैष्णवों को अन्नकूट का प्रसाद वितरित किया जाता है। यह परंपरा कई वर्षो से चली आ रही है। किंतु आदिवासी समाज के लोगों का कहना है कि अन्नकूट के लिए जो प्रसाद प्रभु के सम्मुख रखा जाता है, वह सभी प्रसाद को लूटाया जाए। इस बात को लेकर मंदिर और आदिवासियों में विवाद चल रहा है।

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