श्रीनाथजी में श्रीदामोदरलालजी महाराज का उत्सव मनाया:प्रभु को चंपाई घेरदार वागा और चोली सहित हीरा व सोने के गहने पहनाए

राजसमंद13 दिन पहले
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श्रीनाथजी (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
श्रीनाथजी (फाइल फोटो)

पौष शुक्ल षष्ठी (शनिवार) को श्रीनाथजी की हवेली में नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्रीदामोदरलालजी महाराज का उत्सव मनाया गया। उत्सव पर हवेली के सभी मुख्य द्वारों की देहरी (देहलीज) को पूजन कर हल्दी से लीपा गया। श्रीजी को अनूठे शृंगार में सजाकर राग, भोग और सेवा के लाड लडाए। मुखिया बावा ने राजभोग झांकी में श्रीजी की आरती उतारी। कीर्तनकरों ने शृंगार अनुसार पदों का गान कर नंदनंदन को रिझाया।

शृंगार झांकी में मुखिया बावा ने श्रीजी के श्रीचरणों में मोजाजी पहनाए। श्रीअंग पर पीला (चंपाई) रंग की साटन का, सूथन (पजामा), घेरदार वागा और चोली अंगीकार कराई गई। श्रीमस्तक पर हीरे के जड़ाव की टोपी, तीन तुर्री, बाबरी, अलख (घुंघराले केश की लटें) मध्य में हीरे के जड़ाव की मोरशिखा, दोनों ओर दोहरा कतरा और बायीं ओर शीशफूल सुशोभित किया गया। श्रीकर्ण में जड़ाव मयूराकृति कुंडल पहनाए। पतंगी ठाड़े वस्त्र सजाए गए। प्रभु को मध्य का (घुटनों तक) भारी शृंगार में सजाया गया। हीरा के सभी गहने पहनाए। हास, त्रवल रखे गए। एक माला कली की और एक कमल माला पहनाई।

गुलाबी और पीले फूलों की दो मालाजी पहनाई। श्रीहस्त में हीरा के वेणुजी और हीरा-जड़ित दो वेत्रजी सजाए गए। कंदराखंड में केसरी साटन की चित्रांकन की पिछवाई सजाई, जिसमें पालने में झूलते श्रीगोवर्धननाथजी को एक ओर नन्दराय-यशोदाजी खिलौनों से खिला रहे हैं और दायीं ओर श्रीगोवर्धनलालजी महाराज व श्रीदामोदरलालजी प्रभु को पलना झुला रहे हैं। पालने पर मोती का तोरण शोभित है। गादी, तकिया और चरणचैकी पर सफेद बिछावट की गई।

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