शृंगार झांकी में श्रीजी को पहनाई जैकेट:बाल स्वरूपों का शीतकाल का किया शृंगार, मुखिया ने राग, भोग और सेवा के लाड लड़ाए

​​​​​​​ राजसमंद7 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
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मार्गशीर्ष कृष्ण द्वादशी बुधवार को श्रीजी प्रभु की हवेली में बाल स्वरूपों का शीतकाल का शृंगार किया गया। सर्दी के मौसम से बचाव के लिए प्रभु को विशेष रूप से फतवी (आधुनिक जैकेट जैसी पौशाक) पहनाई गई। विशेष रूप से कमर में हीरे का चपड़ास (गुंडी-नाका) धराया गया। मुखिया बावा ने राग, भोग और सेवा के लाड़ लड़ाए। कीर्तनकारों ने शृंगार के अनुसार पदों का गान कर श्रीनाथजी प्रभु को रिझाया।

शृंगार झांकी में मुखिया बावा ने श्रीजी प्रभु के श्रीचरणों में सुनहरी और बैंगनी मोजाजी धराए। श्रीअंग पर बैंगनी बिना किनारी का सूथन, घेरदार वागा, चोली और सुनहरी ज़री की फतवी (श्रंबामज) धराई। श्वेत लट्ठा के ठाड़े वस्त्र पहनाए गए। प्रभु को छोटा (कमर तक) हल्का शृंगार किया गया। हीरा के आभूषण पहनाए गए। श्रीमस्तक पर सुनहरी रंग के चीरा (ज़री की पाग), सिरपेच, लूम की सुनहरी किलंगी और बायीं ओर शीशफूल सुशोभित किया। श्रीकर्ण में कर्णफूल धराए। फ़तवी धराए जाने से कटिपेच बाजु और पोची नहीं धराई गई। प्रभु को श्रीकंठ में हीरा की कंठी धराई गई। सफेद और गुलाबी पुष्पों की दो मालाजी पहनाई गई। श्रीहस्त में हीरा की मुठ के एक वेणुजी और वेत्रजी धराए। कंदराखंड में बैंगनी रंग की सुनहरी ज़री की किनारी के हांशिया वाली पिछवाई धराई गई। गादी, तकिया और चरणचौकी पर सफेद बिछावट की गई।

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