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खेड़ादेवी माता:खमनोर : मृण शिल्प के लिए प्रसिद्ध गांव माेलेला में जहाजनुमा आकृति में दिखता है खेड़ादेवी माता का मंदिर

खमनोर.11 दिन पहले
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खमनोर. मृण शिल्प के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध माेलेला गांव यह मंदिर खेड़ादेवी माता का है। करीब 200 फीट ऊंचाई पर ड्राेन से ली तस्वीर में मंदिर जहाजनुमा आकृति लिए दिखता है। मंदिर 25 बीघा क्षेत्र में फैला है। अरावली की पहाड़ी के बीच से गुजरने वाली बनास नदी किनारे मोलेला गांव में पहाड़ी पर यह मंदिर करीब 650 वर्ष से भी ज्यादा पुराना है।

मंदिर तक पक्का रास्ता, 120 सीढ़ियां है : मंदिर में चामुंडा माता की प्रतिमा है। मंदिर तक करीब 25 साल पहले कच्चा रास्ता था। 1990 के बाद करीब 120 सीढ़ियां बनवाई गई। करीब 15 वर्ष पूर्व मुख्य रोड से मंदिर के गेट तक पक्की सड़क बनवाइर्। क्षेत्र के भक्तों की यहां गहरी आस्था है। मुम्बई, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र में रहने वाले क्षेत्र के प्रवासी नवरात्र में माता के दर्शन करने आते हैं। पास से ही कल-कल करती बनास नदी निकल रही है। हरियाली के बीच पहाड़ी पर विराजित मां खेड़ा देवी का मंदिर आकर्षक लगता है। करीब 5 किमी दूर से नवरात्र में मंदिर की सजावट दिख रही है।

साैभाग्य मुनि के आग्रह पर 2006 से पशु बलि पर लगा दी राेक : पुजारी जीवन लाल कुम्हार ने बताया कि मोलेला गांव में 2004 में चातुर्मास कर रहे श्रमण संघीय महामंत्री सौभाग्य मुनि को नवरात्र पर माता के मंदिर में पशु की बलि देने की जानकारी मिली थी। तब उन्होंने गांव के लोगों को एकत्रित कर पशु बलि नहीं देने का आग्रह किया। वे स्वयं मंदिर पहुंचे थे। उनके आग्रह पर बलि नहीं देने की सर्वसम्मति बनी थी। वर्ष 2006 से नवरात्र सहित वर्ष भर होने वाले कार्यक्रमों में बलि पर रोक लग गई। पहले भैंसे, बकरे की बलि दी जाती थी। इस बार कोरोना काल से भजन, कार्यक्रम नहीं हाे रहे हैं।

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