गांव की चौपाल पर शिक्षा की अलख:गांव के बच्चों के पास नहीं ऑनलाइन क्लास के साधन,कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए टीचर चौपाल पर जाकर करा रहे पढ़ाई

राजसमंद4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
गांव की चौपाल पर पढ़ाई कर रहे बच्चे। - Dainik Bhaskar
गांव की चौपाल पर पढ़ाई कर रहे बच्चे।

कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर अभी भी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल बंद है। टीचर ऑनलाइन क्लास के जरिए बच्चों को पढ़ा रहे है। वहीं गांव में जिन बच्चों के पास ऑनलाइन पढ़ाई के लिए साधन नहीं है। उनके लिए गांव की चौपाल सहायता बन रही है। चौपाल पर बच्चे एक-दूसरे की सहायता करते हुए पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षक भी पहुंचकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं।

बच्चे एक-दूसरे की करते मदद
रेलमगरा उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत जीतावास के जीवा खेड़ा गांव में चारभुजाजी मंदिर के पास स्थित चबूतरे पर बच्चे एक-दूसरे की पढ़ाई में मदद करते दिखाई देते हैं। राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल जीवा खेड़ा के प्रधानाध्यापक परसराम शर्मा ने बताया कि पिछले करीब डेढ साल से कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चों के स्कूल बंद है। पिछले कुछ महीनों से स्कूल स्तर से ही अध्यापकों की ओर से प्रयास कर बच्चों को पढ़ाने के लिए व्यवस्थाएं की जा रही हैं। गांव के कई बच्चों के पास मोबाइल,लेपटॉप नहीं होने से पढ़ाई करने में परेशानी आ रही हैं। ऐसे बच्चों की मदद के लिए टीचर आगे आए है।

कोरोना गाइड लाइन का करते पालन
स्कूल के टीचर गांव में जाकर कोरोना महामारी के नियमों का पालन करते हुए बच्चों को सार्वजनिक स्थान पर पढ़ाई करवा रहे हैं। इस दौरान बच्चे आपस में भी एक-दूसरे को पढ़ाते हैं। बच्चे नियम से प्रतिदिन तय समय पर गांव के चौराहे पर एकत्रित हो जाते है। कोराना गाइड लाइन की पालना करते हुए मास्क, खुद की पानी की बोतल लेकर आते है। नाथद्वारा निवासी टीचर जितेंद्र सनाढ्य ने बताया कि पहली से आठवीं तक बच्चों के लिए स्माइल कार्यक्रम और क्वीज प्रतियोगिता से बच्चों को शिक्षा से जोड़ रखा है। शिक्षक घर-घर जाकर भी बच्चों को होमवर्क दे रहें है।

खबरें और भी हैं...