श्रीनाथजी प्रभु को हिरा जड़ित गोल पाग धराई:श्रीजी को विशेष श्रीनवनीतप्रियाजी के घर बना द्वितीय मंगल भोग अरोगाया

राजसमंदएक महीने पहले
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श्रीनाथजी प्रभु - Dainik Bhaskar
श्रीनाथजी प्रभु

मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी (बुधवार) को श्रीनाथजी प्रभु की हवेली में श्रीमदनमोहनजी (कामवन) का पाटोत्सव मनाया गया। श्रीजी प्रभु को विशेष श्रीनवनीतप्रियाजी के घर बना द्वितीय मंगल भोग अरोगाया गया। श्रीजी में वैसे तो नित्य ही मंगल भोग अरोगाया जाता है, लेकिन गोपमास में चार मंगल भोग विशेष रूप से अरोगाए जाते हैं। मंगल भोग का मुख्य भाव यह है कि शीतकाल में रात बड़ी व दिन छोटे होते हैं। शयन झांकी बाद जब अंतराल अधिक होता है, तब यशोदा जी को यह आभास होता कि लाला को भूख लग आई होगी। अतः तड़के ही सखड़ी की सामग्रियां सिद्ध कर बालक श्रीकृष्ण को इस भाव से शीतकाल में मंगल भोग अरोगाए जाते हैं। एक ओर भाव यह भी है कि शीतकाल में बालकों को पौष्टिक खाद्य खिलाए जाए तो बालक स्वस्थ व पुष्ट रहते हैं।

सुबह शृंगार झांकी में श्रीजी प्रभु के श्रीचरणों में मुखिया बावा ने पतंगी मोजाजी धराए। श्रीअंग पर पतंगी वस्त्र का सूथन, घेरदार वागा और चोली अंगीकार कराई। मेघश्याम ठाड़े वस्त्र धराए। प्रभु को छोटा (कमर तक) हल्का शृंगार धराया। हीरा और सोने के सभी गहने धराए। श्रीमस्तक पर हीरा की जड़ाऊ गोलपाग, सिरपेंच, लूम, चमकनी गोल-चन्द्रिका और बायीं तरफ शीशफूल सहित विशेष रूप से अलख सुशोभित किया गया। श्रीकर्ण में झुमका के कर्णफूल धराए। लाल और सफेद पुष्पों की दो मालाजी धराई। श्रीहस्त में हीरा के वेणुजी और वेत्रजी (भाभीजी वाले) धराए। कंदराखंड में गहरे गुलाबी रंग की और हरे हांशिया वाली पिछवाई धराई। गादी, तकिया और चरणचौकी पर सफेद बिछावट की गई। स्वरुप के सम्मुख लाल रंग की तेह बिछाई गई। संध्या-आरती दर्शन बाद प्रभु के श्रीकंठ के शृंगार बड़े (हटा) कर हल्के आभूषण धराए जाएंगे। श्रीमस्तक पर हीरा की पाग की बड़े (हटा) कर गुलाबी गोल और रुपहली लूम तुर्रा धराया जाएगा।

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