नाथद्वारा / श्रीजी को धराया चंदनी मलमल का आड़बंद

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दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 07:50 AM IST

राजसमंद. ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा शनिवार को श्रीजी प्रभु को ऊष्णकाल का तृतीय अभ्यंग स्नान हुआ। ऊष्णकाल के ज्येष्ठ और आषाढ़ मास में श्रीजी में नियम के चार अभ्यंग स्नान और चार शीतल जल स्नान होते हैं। यह आठों स्नान ऊष्ण से श्रमित प्रभु के सुखार्थ होते हैं। अभ्यंग स्नान सुबह मंगला के बाद और शीतल जल स्नान संध्या-आरती के बाद होते हैं। अभ्यंग स्नान में प्रभु को चंदन, आंवला और सुगंधित तेल से स्नान कराया जाता है। जबकि शीतल स्नान में प्रभु को बरास और गुलाब जल मिश्रित सुगंधित शीतल जल से स्नान कराया जाता है।
शनिवार को श्रीजी प्रभु को चंदनी मलमल का आड़बंद और श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग, गोल चंद्रिका धराई गई। कीर्तनकारों ने राजभोग में राग सारंग में सूर आयो सिर पर छाया आई पायनतर, पंथी सब झुक रहे देख छांह गहरी... सहित अन्य पद का गान किया।
प्रभु को ऊष्णकालीन हल्का शृंगार धराया गया। श्रीजी को जालीदार तनिया, चंदनी मलमल का आड़बंद धराया गया। आभरण मोती के धराए गए। श्रीमस्तक पर चंदनी रंग की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, गोल चंद्रिका, बायीं तरफ शीशफूल धराए गए। श्रीकर्ण में कर्णफूल, गुलाबी, श्वेत पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो सुन्दर मालाजी धराई गई। श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, झीने लहरियां के वेणुजी, एक वेत्रजी धराए गए। कंदराखंड में चंदनी मलमल की पिछवाई धराई गई। गादी, तकिया और चरणचाैकी पर सफेद बिछावट की गई।

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