श्रीनाथजी प्रभु को दूल्हे का शृंगार धराया:श्रीमस्तक पर केसरी दुमाला संग फिरोज़ा का सेहरा और शीशफूल धराया, गन्ने के रस की लापसी आरोगाई

राजसमंद2 महीने पहले
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श्रीनाथ जी प्रभु (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
श्रीनाथ जी प्रभु (फाइल फोटो)

मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्थी (मंगलवार) को श्रीनाथजी प्रभु की हवेली में बाल स्वरूपों को दूल्हे का शृंगार धराया गया। मुखिया बावा ने शीतकाल के सेहरा का प्रथम शृंगार धराकर राग, भोग और सेवा के लाड लडाए। शीतकाल में श्रीजी को चार बार सेहरा धराया जाता है। सेहरा का शृंगार धराए जाने का दिन निश्चित नहीं है, लेकिन शीतकाल में जब भी सेहरा धराया जाता है, तो प्रभु को मीठी द्वादशी आरोगाई जाती है। प्रभु को साठा (गन्ना) के रस की लापसी (द्वादशी) आरोगाई गई।

सुबह शृंगार झांकी में मुखिया बावा ने श्रीजी प्रभु के श्रीचरणों में केसरी जरी के मोजाजी धराए। श्रीअंग पर केसरी साटन का सूथन, चोली और चाकदार वागा अंगीकाकार कराया। प्रभु को गले में केसरी मलमल का रुपहली ज़री की किनारी वाल अंतरवास का राजशाही पटका धराया। मेघश्याम ठाड़े वस्त्र धराए। प्रभु को वनमाला का (चरणारविन्द तक) भारी शृंगार धराया। फिरोज़ा के सर्व आभूषण (गहने) धराए।

श्रीमस्तक पर केसरी दुमाला, फिरोज़ा का सेहरा और बायीं ओर शीशफूल सुशोभित किया। श्रीकर्ण में हीरा के मकराकृति कुंडल धराए। सेहरा पर मीना की चोटी दायीं ओर धराई। श्रीकंठ में कस्तूरी, कली और कमल माला धराई गई। लाल और पीले फूलों की थागवाली दो मालाजी धराई। श्रीहस्त में कमलछड़ी, लहरियां के वेणुजी और वेत्रजी धराए।

कंदराखंड में लाल रंग के आधारवस्त्र पर विवाह के मंडप की ज़री के ज़रदोज़ी के काम वाली पिछवाई धराई। जिसके हाशिया में फूलपत्ती का क़सीदे का काम और एक तरफ़ श्रीस्वामिनीजी और दूसरी तरफ़ श्रीयमुनाजी विवाह के सेहरा के शृंगार में विराजमान हैं। गादी, तकिया पर लाल और चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट गई।

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