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अनुष्ठान:ग्रह शांति और संकट निवारण के लिए अध्यात्म मंत्र अनुष्ठान जरूरी

राजसमंद5 दिन पहले
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प्रज्ञा विहार कांकरोली में विराजित मुनि प्रसन्न कुमार ने बताया की ग्रह शांति एवं संकट निवारण के लिए अध्यात्म मंत्र अनुष्ठान जरूरी हैं। ज्योतिष शास्त्र में 84 ग्रह माने जाते हैं, इसको 84 ग्रह का सटीक ज्ञान हो जाता है वह केवलज्ञानी यानी कि ब्रह्म ज्ञानी की तरह भविष्यवाणी कर सकता हैं। वर्तमान में इतना संभव नहीं रहा।

हर व्यक्ति के शुभ, अशुभ ग्रह का योग रहता है ऐसे समय में आध्यात्मिक मंत्र शक्ति का आलंबन सहारा जरूरी हैं। जैसे गर्भवती महिला को प्रसव (बच्चा होने वाला है) नवजात शिशु के पूर्व जन्म के अशुभ कर्म का योग उदय होने से इधर जन्म के समय अशुभ ग्रह लगने से उस ग्रह की किरणों से पोलियों या कोई भी विकलांगता हो सकती हैं।

उस समय तत्काल आध्यात्मिक मंत्र आदि के उपाय से बचाव संभव हो सकता हैं। गर्भवती के 9 माह के समय में थोड़ी सी भी और असावधानी रखी तो जीवन भर की कठिनाई दोनों के हो सकती हैं। ऐसे समय में आध्यात्मिक मंत्र अनुष्ठानों का सहारा लेने से अशुभ ग्रह शांत रहते हैं। हर व्यक्ति के शुभ अशुभ कर्म तो होते ही हैं उनका संबंध ग्रहों के साथ होता हैं।

ऐसे समय में आध्यात्मिक मंत्र का सहारा ही बचाव हैं। मंत्र शब्द जड़ हैं। जैसे राम, रहीम, महावीर, ओम किंतु चेतन प्राणी पर प्रभाव डालता हैं। जब किसी को गधा बेवकूफ या मूर्ख कहते हैं तो सामने वाले को गुस्से का करंट आ जाता हैं। वैसे बुरे शब्दों का बुरा प्रभाव हो सकता है तो अच्छे शब्दों का अच्छा प्रभाव क्यों नहीं हो सकता। इसलिए आध्यात्मिक मंत्र नवकार महामंत्र आदि में श्रद्धा, आस्था, विश्वास रखने से गाली गलोज बुरे शब्दों का बुरा प्रभाव तो महापुरुषों के अच्छे मंत्र शब्दों का अच्छा प्रभाव जीवन पर अवश्य पड़ता हैं।

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