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  • The Procession Came Out With The Chants Of Nagnechi Mata, The Kuldevi Of The Rathore Dynasty, The Devotees Performed A Crossroads Dance On One Leg, The Seven day Navratri Rituals Ended With The Immersion Of Jwara.

ज्वारा विसर्जन में उमड़ी भक्तों की भीड़:मां नागणेची माता के जयकारों के साथ निकली शोभायात्रा, भक्तों ने एक पैर पर किया चौराही नृत्य, ज्वारा विसर्जन के साथ थम गए 7 दिवसीय नवरात्रि अनुष्ठान

राजसमंदएक वर्ष पहले
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ज्वारा विसर्जन के लिए जाते हुए ग्रामीण। - Dainik Bhaskar
ज्वारा विसर्जन के लिए जाते हुए ग्रामीण।

बागोटा में नागणेची माता मंदिर में चल रहे 7 दिवसीय नवरात्रि अनुष्ठान बुधवार सुबह ज्वारा विसर्जन के साथ थम गए। मुख्य मंदिर से शोभायात्रा रवाना हुई, जो गांव के मुख्य मार्ग से होते हुए नीली बावड़ी पहुंची, जहां ज्वारा विसर्जन किया गया। बता दें कि नवरात्रि स्थापना पर मिट्टी के पात्र में मिट्टी भरकर ज्वार डाली जाती है, जो अंकुरित होती है। नवरात्रि के अंतिम दिन इस पात्र को लेकर शोभायात्रा के साथ भक्त तलाब पर जाते है और ज्वारा विसर्जन करते है। इसके साथ नवरात्रि का समापन हो जाता है।

ग्राम पंचायत पुठोल के बागोटा गांव में राठौड़ वंश की कुलदेवी मां नागणेची माता मंदिर में चल रहे 7 दिवसीय नवरात्रि अनुष्ठान बुधवार सुबह ज्वारा विसर्जन के साथ थम गए। इससे पहले मंगलवार को रात्रि जागरण हुआ। इसमें मां नागणेची को विशेष श्रृंगार कराया गया। जिसमें बागोटा गांव सहित प्रवासी बड़ी संख्या में पहुंचे। रात्रि जागरण में मंदिर परंपरा अनुसार एक पैर पर चौराही नृत्य किया गया। सवा दस बजे नीली बावड़ी को न्योता देने की रस्म निभाई गई। अर्द्धरात्रि में नागणेची माता की महाआरती की गई। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।

राठौड़ वंश की कुलदेवी मां नागणेची।
राठौड़ वंश की कुलदेवी मां नागणेची।

बुधवार सुबह ठीक सवा नौ बजे नागणेची माता की पूजा अर्चना की गई। मंदिर से ढोल नगाड़ों के साथ मंदिर से शोभायात्रा रवाना हुई। शोभायात्रा मुख्य मंदिर से रवाना हुई, जो भूरियानीम, भागल, गड़ा में होते हुए गांव के बीच नीली बावड़ी पहुंची। जहां पर ज्वारा विसर्जन किया गया। इसके बाद शोभायात्रा नवाघर, बामना भाटा, होलीथान होते हुए वापस मंदिर पहुंची। शोभायात्रा में लोग गगनभेदी जयकारे लगाते चल रहे थे। शोभायात्रा के वापस मंदिर पहुंचने के बाद मंदिर के मुख्य भोपाजी को पेरावणी करवाई गई।

कंटेट और फोटो-: गणपत सिंह राठौड़

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