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कोरोनाकाल यह भी रिकॉर्ड:सबसे बड़े आरके अस्पताल में जो काम 16 साल में नहीं हुए वो काम कोरोनाकाल के 13 महीनों में हुए

राजसमंद18 दिन पहले
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आरके अस्पताल - Dainik Bhaskar
आरके अस्पताल
  • 16 साल पर भारी 13 माह के काम; डॉक्टर 21 से बढ़कर 38 हुए, 12 की जगह 17 बेड का आईसीयू, ऑक्सीजन उदयपुर से आती थी, अभी 1 प्लांट, जल्द 3 होंगे

कोरोनाकाल जिले के सबसे बड़े आरके अस्पताल के लिए वरदान बनकर आया है। 16 साल पुराने इस अस्पताल में 13 महीने के कोरोनाकाल में रिकॉर्ड काम हुए हैं। इन 13 महीनों में अस्पताल में डॉक्टर बढ़ने के साथ मरीजों के लिए इलाज के संसाधन-सुविधाएं भी तेजी से बढ़ी है। बीते 16 साल में हुए विकास पर कोरोनाकाल का विकास भारी साबित हो रहा है। हालांकि सफाई के मामले में यह अस्पताल प्रदेश में दो बार अव्वल रहा था, लेकिन उपचार के मामले में गंभीर रोगियों को उदयपुर रेफर करने के सिवाए कोई चारा नहीं था।

कोरोनाकाल के 13 महीनों में यहां पांच करोड़ के काम हुए हैं। इससे अस्पताल की काया बदल गई है। पहले अस्पताल में आठ बेड का आईसीयू हुआ करता था। वर्तमान में यहां 17 बेड का आईसीयू बन गया है। पहले ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए उदयपुर के भरोसे रहना पड़ता था। वर्तमान में अस्पताल में एक ऑक्सीजन प्लांट चल रहा है। दूसरे का काम जारी है तो तीसरे ऑक्सीजन प्लांट का काम शुरू करने की तैयारी शुरू होने वाली है।

इन 13 महीनों में अस्पताल में रोगियों के लिए संसाधन उपलब्ध कराने के लिहाज से तेजी से काम हुए हैं। ऐसे में अब गंभीर मरीजों को उदयपुर बहुत ही कम रेफर करने की नोबत आती है। आरके अस्पताल भवन की नींव 2 नवम्बर 1999 को सीएम अशोक गहलोत ने रखी थी। यह अस्पताल 6 साल में बनकर तैयार हुआ था। इसका उद्घाटन 31 जुलाई 2005 को तत्कालीन सीएम वसुंधरा राजे ने किया था। तब इसकी शुरुआत मात्र 6 डाक्टरों से की गई। बाद में अस्पताल में 100 बेड की स्वीकृति जारी की गई। बाद में इसे जिले के बड़े अस्पताल के तौर पर विकसित किया गया। इसके बाद धीरे-धीरे यहां 55 डाक्टरों के पद स्वीकृत किए गए। हालांकि एक भी बार 55 डाक्टरों के पद कभी नहीं भरे।

कोविड के पहले आरके अस्पताल ऑक्सीजन के लिए पूरी तरह से उदयपुर पर निर्भर था। पहले सिलेंडर उदयपुर से भरकर आते थे, लेकिन गत साल कोरोना में अस्पताल में 34 सिलेंडर का ऑक्सीजन प्लांट स्वीकृत हुआ था। सितम्बर में प्लांट बनकर तैयार हो गया। हालांकि कोरोना की वजह से अस्पताल में ऑक्सीजन की खपत काफी बढ़ गई। ऐसे में एनएचएम की ओर से ऑक्सीजन प्लांट की दूसरी यूनिट लगाने की सहमति हो गई।

एक करोड़ की लागत से 65 सिलेंडर का नया ऑक्सीजन प्लांट बनने का कार्य शुरू हो गया। स्वायत्त शासन विभाग की ओर से तीसरी यूनिट की भी घोषणा हुई है। इसके लिए अस्पताल में जमीन उपलब्ध करवा दी गई। जल्द ही तीसरी यूनिट का काम भी शुरू हो जाएगा। ऐसे में आने वाले समय में आरके अस्पताल ऑक्सीजन में आत्मनिर्भर बन जाएगा।

कोविड के मरीज बढ़े तो आईसीयू बढ़ाए बेड
आरके अस्पताल में पहले मात्र आठ बेड के आईसीयू से शुरुआत की गई। कोविड के समय 12 बेड का आईसीयू हो गया। लेकिन कोविड के मरीजों की संख्या बढऩे से आईसीयू बेड की मांग ज्यादा बढ़ गई। ऐसे में अस्पताल प्रशासन ने 12 आईसीयू बेड से बढ़ाकर इन्हें 17 बेड कर दिए। यहां मोबाइल आईसीयू भी उपलब्ध है। हालांकि ये तकनीकी खराबी से अभी तक शुरू नहीं हो पाए हैं, लेकिन जल्द ही इनके चालू होने की उम्मीद जताई जा रही है।

पहले कभी इतने डॉक्टर इस अस्पताल को अब तक ये सम्मान मिले : लगातार दो बार दिल्ली में सम्मान मिला है। जबकि राज्य स्तर पर तीन बार सम्मान मिला है। 2015-16 में कायाकल्प योजना के तहत जयपुर में 50 लाख रुपए का पुरस्कार मिल चुका है। 2016-17 में कायाकल्प के तहत दूसरी बार सम्मानित किया गया। इसके तहत अस्पताल को तीन लाख का पुरस्कार मिला। 2017 में दिल्ली में नेशनल सर्टिफिकेट राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन कार्यक्रम के तहत केंद्रीय मंत्री स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्ढा ने प्रशस्ति पत्र, 15 लाख रुपए का पुरस्कार दिया। जबकि 15 लाख का नकद पुरस्कार 2020 तक मिलता रहा। अस्पताल के पीएमओ डा. ललित पुरोहित ने बताया कि 2015 से 2017 तक अस्पताल विभिन्न क्रियाकलापों में श्रेष्ठ रहा है। 2015 में कायाकल्प योजना में 50 लाख रुपए मिलने के बाद अस्पताल में कई बदलाव भी हुए हैं। तब 125 केवी का बड़ा डीजी सेट खरीदा गया, जो अस्पताल में बिजली बन्द होने के तुरंत बाद ऑटोमेटिक शुरू हो जाता है। इससे अस्पताल में भर्ती मरीजों को काफी राहत मिली है। इसके साथ ही मरीजों के लिए कई उपकरण आदि भी खरीदे गए थे।में नहीं थे
13 माह पूर्व कोविड से पहले आरके अस्पताल में डाक्टरों के स्वीकृत 55 पद में से 21 डाक्टर ही कार्यरत थे। अस्पताल में आउटडोर काफी बढ़ गया था। डाक्टरों की संख्या कम होने से गंभीर मरीजों को सीधा उदयपुर रेफर किया जाता था, लेकिन कोविड के दौरान आरके अस्पताल में डाक्टरों की भी पद पूर्ति हुई। 13 महीने में अस्पताल में 17 डाक्टर मिले। वर्तमान में अस्पताल में डाक्टरों की संख्या 38 हो गई है। इससे पहले कभी इतने डॉक्टर इस अस्पताल में नहीं रहे।

अस्पताल को अब तक ये सम्मान मिले : लगातार दो बार दिल्ली में सम्मान मिला है। जबकि राज्य स्तर पर तीन बार सम्मान मिला है। 2015-16 में कायाकल्प योजना के तहत जयपुर में 50 लाख रुपए का पुरस्कार मिल चुका है। 2016-17 में कायाकल्प के तहत दूसरी बार सम्मानित किया गया। इसके तहत अस्पताल को तीन लाख का पुरस्कार मिला। 2017 में दिल्ली में नेशनल सर्टिफिकेट राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन कार्यक्रम के तहत केंद्रीय मंत्री स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्ढा ने प्रशस्ति पत्र, 15 लाख रुपए का पुरस्कार दिया। जबकि 15 लाख का नकद पुरस्कार 2020 तक मिलता रहा। अस्पताल के पीएमओ डा. ललित पुरोहित ने बताया कि 2015 से 2017 तक अस्पताल विभिन्न क्रियाकलापों में श्रेष्ठ रहा है। 2015 में कायाकल्प योजना में 50 लाख रुपए मिलने के बाद अस्पताल में कई बदलाव भी हुए हैं। तब 125 केवी का बड़ा डीजी सेट खरीदा गया, जो अस्पताल में बिजली बन्द होने के तुरंत बाद ऑटोमेटिक शुरू हो जाता है। इससे अस्पताल में भर्ती मरीजों को काफी राहत मिली है। इसके साथ ही मरीजों के लिए कई उपकरण आदि भी खरीदे गए थे।

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