श्रीनाथजी को 'पीताम्बर को चोलना' के शृंगार में सजाया:मोती और सोने के सभी गहने पहनाए, हवेली में किया बाल लीला के कीर्तन का गान

नाथद्वारा6 महीने पहले
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श्रीनाथजी (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
श्रीनाथजी (फाइल फोटो)

पौष शुक्ल अष्टमी (सोमवार) को श्रीनाथजी की हवेली में बाल स्वरूपों 'पीताम्बर को चोलना' के पद के आधार पर शृंगार में सजाया गया। श्रीजी को जन्माष्टमी के बाद भाद्रपद कृष्ण एकादशी से अमावस्या तक बाल-लीला के पांच शृंगार किए जाते हैं। उसी तरह श्रीगुसाईंजी के उत्सव के बाद चार शृंगार बाल-लीला के किए जाते हैं। श्रीजी की हवेली में बाल लीला के कीर्तन का गान किया गया। राजभोग झांकी में मुखिया बावा ने श्रीजी की आरती उतारी।

शृंगार झांकी में मुखिया बावा ने श्रीजी के श्रीचरणों में सुनहरी जरी के मोजाजी पहनाए। श्रीअंग पर लाल छापा का सूथन (पजामा), पीले रंग की सुनहरी किनारी वाली चोली और घेरदार वागा अंगीकार कराया गया। श्रीमस्तक पर सुनहरी ज़री की पाग (चीरा), सिरपैंच, लूम तुर्री, जमाव (नागफणी) का कतरा और बायीं ओर शीशफूल सुशोभित किया गया। श्रीकर्ण में लोलकबंदी-लड़ वाले और कर्णफूल पहनाए। मेघ श्याम ठाड़े वस्त्र सजाए गए।

श्रीजी को मध्य का (घुटने तक) हल्के शृंगार में सजाया गया। मोती और स्वर्ण के सभी गहने पहनाए गए। कड़ा, हस्त, सांखला, हांस, त्रवल, एक हालरा, बघनखा सभी पहनाए गए। कली की माला पहनाई। रंग-बिरंगे फूलों की थागवाली दो मालाजी पहनाई। श्रीहस्त में हीरा के वेणुजी और दो वेत्रजी (एक सोने का) रखे गए। कंदराखंड में मेघश्याम रंग की, सुनहरी सुरमा-सितारा के कशीदे से चित्रित मोर-मोरनियों के भरतकाम वाली पिछवाई सजाई गई। गादी, तकिया और चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की गई। स्वरूप के सम्मुख लाल तेह बिछाई गई।