श्रीनाथजी के बालस्वरूपों को आलौकिक शृंगार में सजाया:पतंगी घेरदार वाघा, चोली और गोल पाग के संग मोती के गहने पहनाए

नाथद्वारा8 महीने पहले
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श्रीनाथजी को कमर तक हल्के शृंगार किया गया। - Dainik Bhaskar
श्रीनाथजी को कमर तक हल्के शृंगार किया गया।

माघ कृष्ण दशमीं (गुरुवार) को श्रीनाथजी की हवेली में बालस्वरूपों को आलौकिक शृंगार में सजाया गया। जिन तिथियों के लिए प्रभु की सेवा प्रणालिका में कोई वस्त्र और शृंगार निर्धारित नहीं होते है, उन तिथियों में प्रभु को ऐच्छिक वस्त्र व शृंगार धराए जाते हैं। मुखिया बावा ने पतंगी वस्त्र, गोल पाग, मोती के गहने आदि पहनाए और प्रभु को राग, भोग व सेवा के लाड लडाए। कीर्तनकारों ने विविध पदों का गान कर श्रीनंदनंदन को रिझाया। भक्तों ने श्रीजी की मंगला और शृंगार झांकी के दर्शन कर श्रीगिरिराज धरण की जय के जयकारे लगाए। सुबह शृंगार झांकी में मुखिया बावा ने श्रीजी के श्रीचरणों में मोजाजी पहनाए। श्रीअंग पर पतंगी साटन पर सुनहरी ज़री की किनारी वाला सूथन (पजामा), घेरदार वागा और चोली अंगीकार कराई गई। पीले ठाडे वस्त्र सजाए गए। श्रीमस्तक पर गोल पाग, सिरपैंच, चंद्रिका और बायीं ओर शीशफूल सुशोभित किया गया। श्रीकर्ण में कर्णफूल की एक जोड़ी पहनाई गई। श्रीकंठ में सफेद फूलों की दो मालाजी पहनाई गई। प्रभु को छोटा (कमर तक) हल्का शृंगार किया गया। मोती के सभी गहने पहनाए गए। श्रीहस्त में कमलछड़ी, चांदी के वेणुजी और वेत्रजी रखे गए। कंदराखंड में पतंगी सुरमा सितारा के कशीदे के जरदोजी काम वाली और हांशिया वाली शीतकाल की पिछवाई सजाई गई। गादी, तकिया और चरणचौकी पर सफेद बिछावट की गई।