गोवर्धन पूजा पर निभाई गौ क्रीड़ा की परंपरा:ग्वालबालों ने बाजारों में कुंपी और घुंघरू बजाकर गौ माता को रिझाया, देखने उमड़ा जनसैलाब

राजसमंद/नाथद्वारा2 महीने पहले
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श्रीजी मंदिर में गोवर्धन पूजा। - Dainik Bhaskar
श्रीजी मंदिर में गोवर्धन पूजा।

विश्व प्रसिद्ध श्रीनाथजी प्रभु की हवेली में शुक्रवार को गोवर्धन पूजा के अवसर पर गौ क्रीड़ा हुई। हवेली के गोवर्धन चौक में गोवर्धन पूजा की परंपरा तिलकायत राकेश महाराज संग गोस्वामी विशाल बावा ने निभाई। ग्वालबालों ने मंदिर क्षेत्र के बाजारों में गौ क्रिड़ा कर गौ माताजी को रिझाया। इसे देखने हजारों की संख्या में श्रद्धालु नाथद्वारा पहुंचे। करीब 350 गौ माता को सजा-धजा कर मंदिर लाया गया। युगल स्वरूप श्रीविठ्ठलनाथजी और श्रीनवनितप्रियाजी सूरज पोल पधारे। जहां ब्रज परंपरा अनुसार पूजन हुआ। यह परंपरा नाथद्वारा में करीब 350 वर्षों से चली आ रही है।

गोविंद चौक में छोटा बच्चा गौ माता को रिझाने का प्रयास कुंपी बजाकर करते हुए।
गोविंद चौक में छोटा बच्चा गौ माता को रिझाने का प्रयास कुंपी बजाकर करते हुए।

गौ क्रीड़ा देखने उमड़ा जनसैलाब
श्रीजी मंदिर की वर्षों पुरानी परंपरा गौ क्रीड़ा को देखने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान बाजारों में लोगों की रेलमपेल रही। नाथद्वारा बस स्टैंड से लेकर मंदिर मार्ग तक गौ क्रीड़ा देखने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। मंदिर क्षेत्र के बाजारों में मकानों, दुकानों और धर्मशालाओं की छतों पर बैठकर लोगों ने गौ क्रीड़ा का आनंद उठाया।

ब्रज परंपरानुसार श्रीजी प्रभु की हवेली में गोवर्धन पूजा करते हुए। इस दौरान ग्वालबाल गौ माता संग श्रीजी की हवेली में पधारे।
ब्रज परंपरानुसार श्रीजी प्रभु की हवेली में गोवर्धन पूजा करते हुए। इस दौरान ग्वालबाल गौ माता संग श्रीजी की हवेली में पधारे।

ग्वालबालों ने कुंपी बजाकर गौ माता को रिझाया
ग्वालबालों और सेवकों ने गौ माताओं को कुंपी और घंघुरू बजाकार रिझाया। ग्वाले पारंपरिक वेशभूषा धोती और अंगरकी पहने हुए थे। ग्वालों द्वारा कुंपी बजाते ही गौ माता उनको मारने के लिए पीछे भागने लगती है। गौ क्रीड़ा को देख श्रद्धालु रोमांचित हो उठे।

गोवर्धन पूजा के दौरान युगल स्वरूप श्रीविठ्ठलनाथजी और श्रीनवनितप्रियाजी चौक में पधारे। गोस्वामी विशाल बावा की मौजूदगी गोवर्धन का पूजन करते हुए। गौ माताजी और ग्वाल बाल सहित सेवा वाले मौजूद।
गोवर्धन पूजा के दौरान युगल स्वरूप श्रीविठ्ठलनाथजी और श्रीनवनितप्रियाजी चौक में पधारे। गोस्वामी विशाल बावा की मौजूदगी गोवर्धन का पूजन करते हुए। गौ माताजी और ग्वाल बाल सहित सेवा वाले मौजूद।

इन बाजारों में हुई गौ क्रीड़ा
गौ क्रीड़ा मंदिर क्षेत्र के चौपाटी, नक्कारखाना, लाल दरवाजा, घड़ी नीचे, बड़ा बाजार, गुर्जरपुरा, गोविंद चौक आदि बाजारों में हुई। बाजारों के बरामदा और दुकानों पर गौ क्रीड़ा देखने वालों की भीड़ रही। गौ क्रीड़ा देखने के लिए लोग दोपहर से ही आकर बाजारों में दुकानों के बाहर और छतों पर बैठ गए।

श्रीजी प्रभु की हवेली में गोबर से बने गोवर्धन पर गोस्वामी विशाल बावा दूध चढ़ाकर परंपरा अनुसार पूजन करते हुए।
श्रीजी प्रभु की हवेली में गोबर से बने गोवर्धन पर गोस्वामी विशाल बावा दूध चढ़ाकर परंपरा अनुसार पूजन करते हुए।

400 से अधिक पुलिसकर्मी रहे तैनात
दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पर नाथद्वारा में मेला लगाया जाता है। लेकिन इस साल कोराना महामारी को देखते हुए प्रशासन ने मेला लगाने की अनुमति नहीं दी। गौ क्रीड़ा के दौरान पुलिस की ओर से सुरक्षा में 400 से अधिक जवान सहित जिले के समस्त थानाधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया। इस महोत्सव को देखने के लिए देश के गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश सहित आसपास के जिले उदयपुर, भीलवाड़ा और राजसमंद के लोग पहुंचे। नाथद्वारा के बाजारों की ओर जाने वाले वाहनों का प्रवेश सुबह से बंद कर दिया गया।

गोस्वामी विशाल बावा गोवर्धन पूजा कर मोतीमहल के लिए लौटते हुए।
गोस्वामी विशाल बावा गोवर्धन पूजा कर मोतीमहल के लिए लौटते हुए।
नंदवंशी गौ माताओं के सिर पर मोरपंख की पट्टियां बांध सजा धजाकर पूजन के लिए लेकर जाते ग्वाल बाल।
नंदवंशी गौ माताओं के सिर पर मोरपंख की पट्टियां बांध सजा धजाकर पूजन के लिए लेकर जाते ग्वाल बाल।
गौ माता को कुंपी बजाकर रिझाते हुए।
गौ माता को कुंपी बजाकर रिझाते हुए।
गौ माता को पारंपरिक वेशभूषा पहने ब्रजवासी बालक रिझाते हुए।
गौ माता को पारंपरिक वेशभूषा पहने ब्रजवासी बालक रिझाते हुए।
गौ माता को रिझाने का प्रयास कर रहा ग्वाल बाल।
गौ माता को रिझाने का प्रयास कर रहा ग्वाल बाल।
गौ माताओं को रिझाते ग्वाल बाल। गौ क्रीड़ा को देखने के लिए उमड़ी लोगों की भीड़। छतों पर बैठकर गौ क्रीड़ा देखते हुए।
गौ माताओं को रिझाते ग्वाल बाल। गौ क्रीड़ा को देखने के लिए उमड़ी लोगों की भीड़। छतों पर बैठकर गौ क्रीड़ा देखते हुए।