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कोरोना ने व्यवस्थाएं बदली, पर सांवलिया सेठ का रुतबा वही:अब 13 गज दूरी, दर्शन समय 16 की जगह 8.30 घंटे, फिर भी भक्त पहले जितने ही

सांवलियाजी17 दिन पहलेलेखक: भैरूलाल सोनी
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सांवलियाजी मंदिर में कोरोनाकाल के बाद दर्शन। - Dainik Bhaskar
सांवलियाजी मंदिर में कोरोनाकाल के बाद दर्शन।
  • दर्शन का समय शाम 4 बजे तक, रविवार को लॉकडाउन के कारण शनिवार व सोमवार को औसत से अधिक श्रद्धालु आ रहे

कोरोना की दो लहरों ने आम जिंदगी के साथ सांवलियाजी जैसे नामी मंदिरों में भी बहुत कुछ बदल दिया। प्रवेश से लेकर दर्शन और ठहराव तक के नियम कायदे बदल गए। दूसरी लहर के बाद दर्शन का समय 16 घंटे से घटकर करीब 8.30 घंटे रह गया, फिर भी सांवलिया सेठ के प्रति आस्था ऐसी कि दर्शनार्थियों की संख्या में कोई कमी नहीं आई। बल्कि कभी कभी तो सामान्य से अधिक श्रद्धालु आ रहे हैं।

पहली बार गत साल मार्च से अक्टूबर तक व दूसरी लहर में इस साल मार्च से 28 जून तक दर्शन बंद रहे। इस बार सवा साल में जब दर्शन अनलॉक हुए तब भी श्रद्धालुओं के मंदिर में दर्शन व आवागमन की व्यवस्था में कई परिवर्तन हो गए। दर्शन का समय भी सुबह 9 से शाम 4 बजे तक कर दिया। इसमें भी दोपहर 12 से ढाई बजे तक शयनकाल यथावत है। जबकि आमतौर पर दोपहरकालीन शयन को छोड़कर दर्शन सुबह 5 से रात 11 बजे शयन आरती पूरी होने तक रहते थे।

मंदिर इतिहास में यह पहली बार है कि दर्शन का समय शाम 4 बजे तक ही सिमट गया। रविवार को काे छाेड़ बाकी 6 दिन में दर्शनार्थियों की संख्या में कमी नहीं आई। पहले सामान्य दिनों में औसत प्रतिदिन 5 से 7 हजार श्रद्धालु आते थे। अभी भी लगभग इतने ही आ रहे। बल्कि कुछ दिन से तो संख्या बढ़ी हुई है। शनिवार एवं सोमवार को 8 से 10 हजार तक दर्शनार्थियों के आने का अनुमान रहा।

जानिए, कोरोनाकाल से पहले और अब सांवलियाजी मंदिर में कितना कुछ बदला

दोनों समय आरती और दोपहर शयनकाल में पूरे समय रुकने की आजादी थी, अब नहीं

कोरोना से पहले दोनों समय सवा-सवा घंटे की आरती के पूरे समय तथा दोपहर के शयनकाल में भी पूरे समय ठहरने पर कोई पाबंदी नहीं थी। श्रद्धालु मुख्य मंदिर में भी घंटों तक बैठकर भजन कर सकते थे। बाहर बगीचे में भी घूम सकते थे। अब परिसर में 5 मिनट भी मुश्किल से रुक सकते है। कॉरीडोर में कतारबद्ध चलते हुए आगे बढ़ना होता है। मुख्य मंदिर में 2 मिनट दर्शन करते ही बाहर निकलना पड़ता है।

रास्ते में भक्तों पर निगरानी के लिए लगाए 12 से अधिक कर्मचारी, कई जगह सेनेटाइज

कोरोना से पहले भी मुख्य मंदिर में श्रद्धालु दर्शन करीब 15 फीट दूरी से करते थे। अब यह दूरी 30 से 40 फीट तक हो गई। कतार व मार्ग में भी सोशल डिस्टेंस और मास्क का ध्यान रखना होता है। मंदिर प्रशासन ने रास्ते में 12 से 15 अतिरिक्त कर्मचारी तैनात किए हैं, जो श्रद्धालुओं को आगे बढ़ाते रहते हैं। परिसर के लंबे मार्ग के दौरान कई जगह सेनेटाइजर व स्क्रीनिंग आदि के इंतजाम है। कैमरों से भी नजर रखी जा रही।

प्रसाद, माला, नारियल चढ़ावा प्रतिबंधित, सिर्फ भंडार में भेंट की अनुमति ही मिलेगी

मंदिर में श्रद्धालु प्रसाद, नारियल, फूल माला आदि पूजन सामग्री लेकर जा सकते थे। कोरोना के बाद पूजन सामग्री ले जाना निषेध है। हां, नकद या जेवर आदि चढ़ावा यानी गुप्त दान के लिए भंडार में डाल सकते हैं। आॅफिस के भेंट कक्ष में भी व्यवस्था है। पहले दर्शन के लिए भीड़ रहती थी, लेकिन अब मंदिर परिसर में साेशल डिस्टेंस की सख्ती से भीड़ बिल्कुल नहीं दिखती है।

अब बिना कीर्तन और शयन प्रार्थना के ही शयन को चले जाते हैं सांवलिया सेठ

रात्रिकालीन आरती के बाद करीब घंटे भर श्रद्धालुओं द्वारा भजन कीर्तन भी कोरोनाकाल में बंद है। कीर्तन के बाद रात 11 बजे कस्बे की युवा मंडली द्वारा भगवान से शयन करने के लिए भजन रूप में जो प्रार्थना की जाती थी वो भी अब बंद हो गई है। कुछ समय तक मंदिर में प्रवेश के लिए पहचान पत्र दिखाना भी आवश्यक किया था। इसे देखकर टोकन यानी प्रवेश पर्ची दी जाती थी, हालांकि इस बार यह व्यवस्था नहीं रखी।

कल खुलेगा भंडार, चतुर्दशी व अमावस्या को दर्शन बंद रहेंगे

कृष्णधाम सांवलियाजी में गुरुवार को चतुर्दशी पर भगवान सांवलिया सेठ का भंडार खोला जाएगा। मंदिर मंडल अध्यक्ष कन्हैयादास वैष्णव ने बताया कि गुरुवार को राजभोग आरती के बाद भंडार खोला जाएगा। कड़ी सुरक्षा में गणना की जाएगी। कोरोना गाइडलाइन के चलते गुरुवार एवं शुक्रवार को चतुर्दशी एवं अमावस्या होने से मंदिर में श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद रहेगा। शुक्रवार को अमावस्या पर भगवान को विशेष भोग लगाया जाएगा। दोनों दिन भगवान का पुजारी विशेष शृंगार करेंगे। शनिवार को श्रद्धालुओं का प्रवेश होगा। रविवार को श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद रहेगा। सोमवार के बाद श्रद्धालु नियमित रूप से शाम 4 बजे तक दर्शन कर सकेंगे।