यूपी में हर रोज लापता हो रही हैं तीन बेटियां:एक साल में 1763 बच्चे हुए गुम, बच्चों की गुमशुदगी के मामले में मेरठ नम्बर 1 पर

आगरा8 दिन पहले
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यूपी पुलिस द्वारा आरटीआई के जवाब के अनुसार प्रदेश में रोजाना पांच बच्चे लापता हो रहे हैं। - Dainik Bhaskar
यूपी पुलिस द्वारा आरटीआई के जवाब के अनुसार प्रदेश में रोजाना पांच बच्चे लापता हो रहे हैं।

2020 में एक साल में यूपी के 50 जिलों में 12 से 18 साल के कुल 1763 बच्चे लापता हुए हैं। जिनमें से 1166 लड़कियां हैं। इनमें 1080 लड़कियों की उम्र 12-18 साल के बीच है। कुल लापता लड़कियों में से 966 लड़कियों को बरामद कर लिया गया है। जबकि 200 लड़कियां और 102 लड़के आज भी लापता हैं। हर रोज प्रदेश से तीन बेटियां लापता हो रही हैं।

इसका खुलासा एक आरटीआई में हुआ है। आगरा के समाजसेवी और आरटीआई एक्टिविस्ट नरेश पारस ने यूपी पुलिस के राज्य क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के सूचना अधिकारी से आरटीआई के तहत जानकारी मांगी थी। जिसमें ये पता चला है।

आरटीआई एक्टिविस्ट नरेश पारस।
आरटीआई एक्टिविस्ट नरेश पारस।

तीन सौ परिवारों को बच्चों की तलाश

आरटीआई एवं चाइल्ड राइट एक्टिविस्ट नरेश पारस ने 2020 में लापता बच्चों की जानकारी यूपी पुलिस के सभी मंडलों के एडीजी और लखनऊ पुलिस हेडक्वाटर से मांगी थी। जिसमें से उन्हें 50 जिलों से जबाव मिला है। जवाब में बताया गया है कि कुल 1763 बच्चे लापता हुए। जिनमें से 597 लड़के तथा 1166 लड़कियां हैं। 1461 बच्चें को बरामद किया गया। 302 बच्चे अभी लापता हैं।

जिनमें से 102 लड़के तथा दो सौ लड़कियां हैं। 50 जिलों की रिपोर्ट को स्टडी करने पर पता चला है यूपी में हर रोज लगभग पांच बच्चे लापता हो रहे हैं और उनमें से तीन लड़कियां हैं। यह आंकड़े और अधिक हो सकते हैं क्योंकि कुछ जिलों की पुलिस ने आरटीआई का जवाब देने से सीधे मना कर दिया है।

आखिर कहां हैं लापता बच्चे

नरेश पारस ने लापता बच्चों के बारें में चिंता जताते हुए कहा कि आखिर बच्चे कहां जा रहे हैं। हर रोज पांच बच्चों का लापता होना चिंता की बात है। लापता बच्चा चार महीने तक बरामद न होने पर विवेचना मानव तस्करी निरोधक शाखा में ट्रांसफर करने का नियम है। उसके बावजूद भी लापता बच्चों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है।

लापता होने वाली लड़कियों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है जो चिंता करने वाली बात है। 12-18 साल की लड़कियां ज्यादा गायब हो रहीं हैं, इनमें से ज्यादातर लड़कियां या तो प्रेमजाल में फंस रही हैं या फिर उनको मानव तस्करी के जरिए देह व्यापार में धकेला जा रहा है।

हर जिले में हो जनसुनवाई

नरेश पारस के मुताबिक जिले में पुलिस मुख्यालय पर लापता बच्चों की जन सुनवाई कराई जाए। जिसमें थाने के विवेचक और परिजनों को बुलाकर केस की समीक्षा की जाए। चार महीने तक बच्चा न मिलने पर मानव तस्करी निरोधक थाने से विवेचना कराई जाए।

लापता बच्चों के मामले में मेरठ है नम्बर वन

आरटीआई के जवाब में 50 जिलों के आंकड़ों पर नजर डालने पर पांच जिले सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं। इनमें मेरठ में 113, गाजियाबाद में 92, सीतापुर में 90, मैनपुरी में 86 और कानपुर नगर में 80 बच्चे लापता हैं।

यहां देखें टॉप 10 शहरों की सूची

आरटीआई रिपोर्ट के मुताबिक 2020 में सोनभद्र में 28, प्रयागराज में 80, बागपत में 16, हाथरस में 5, श्रावस्ती में 18, रायबरेली में 17,सुल्तानपुर में 47, हापुड़ में 23, कासगंज में 4 और मेरठ में 113 बच्चे लापता है।

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