आगरा... पारस अस्पताल में इलाज के नाम पर वसूली:पीड़ित पत्नी का आरोप- कोरोना पॉजिटिव बताकर 2 दिन में वसूले 2 लाख रुपए और उतरवाए जेवर, फिर भी पति को मार डाला

आगरा2 महीने पहले
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आगरा के पारस अस्पताल में हुई राजस्थान के सुनील यादव की मौत। मृतक की पत्नी ने लगाए संचालक पर वसूली व हत्या के आरोप। - (इनसेट में सुनील) - Dainik Bhaskar
आगरा के पारस अस्पताल में हुई राजस्थान के सुनील यादव की मौत। मृतक की पत्नी ने लगाए संचालक पर वसूली व हत्या के आरोप। - (इनसेट में सुनील)

आगरा में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच मौत की मॉकड्रिल मामले में मशहूर हुआ श्री पारस अस्पताल एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। राजस्थान की महिला ने अस्पताल संचालक डॉ. अरिंजय जैन पर इलाज के नाम पर 2 लाख रुपए की लूट और पति की हत्या का आरोप लगाया है। पीड़िता का आरोप है कि पहले तो डॉक्टर ने जेवर उतरवा लिए फिर पति को मार डाला। थाने में शिकायत की तो कोई सुनवाई नहीं हुई। 24 सितंबर को महिला ने CJM कोर्ट में इंसाफ के लिए गुहार लगाई है, जिसकी सुनवाई 1 अक्टूबर को होनी है।

11 मई को कोविड बताकर एडमिट किया, नहीं दी रिपोर्ट; वसूले 2 लाख
मामला आगरा-दिल्ली हाईवे स्थित श्री पारस अस्पताल का है। यहां बीती 11 मई को राजस्थान के जयपुर निवासी सुनील यादव(40) को बुखार और शुगर की शिकायत पर आए थे। मरीज सुनील की पत्नी नम्रता का आरोप है कि अस्पताल संचालक डॉ. अरिंजय जैन ने पति को कोरोना पॉजिटिव बताते हुए भर्ती कर लिया, मगर कोई रिपोर्ट नहीं दी। इलाज के नाम पर तत्काल 1 लाख 98 हजार जमा करवा लिए। अगले दिन डॉ. जैन ने उनसे पति की जान बचाने में 5 लाख रुपए का खर्च आने की बात कही। इसके बाद 13 मई को पति की कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव आई। डॉ. ने मात्र दो दिन में ही अस्पताल के मेडिकल स्टोर में 2 लाख रुपए की दवाई खरीदने का पर्चा दिया।

पहले उतरवाए जेवर, फिर पति को मार डाला
महिला का यह भी आरोप है कि बिल देने के बाद उसके पास पैसे न होने पर डॉ. अरिंजय की नजर मेरे पहने जेवरों पर गई। गले में पहनी सोने की जंजीर व हाथ का ब्रेसनेट उतरवा लिया। फिर भी इलाज न करते हुए 14 मई को पति को मार डाला। अस्पताल के कर्मचारियों ने चुपचाप पति का शव ले जाने की धमकी दी। डॉक्टर ने धमकाते हुए कहा था कि वह कुछ कर नहीं पाएगी-' मेरी ऊपर तक पहुंच है, कहीं भी शिकायत की तो बुरा अंजाम झेलना होगा'।

मृतक की पत्नी शिकायत लेकर थाना न्यू आगरा गई। आरोप है कि पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया।

11 मई को पारस अस्पताल में सुनील यादव(40) कोविड पॉजिटिव बताकर किए गए थे भर्ती। 14 मई को हुई मौत।
11 मई को पारस अस्पताल में सुनील यादव(40) कोविड पॉजिटिव बताकर किए गए थे भर्ती। 14 मई को हुई मौत।

24 सिंतबर को लगाई कोर्ट में इंसाफ की गुहार, अब 1 अक्टूबर को सुनवाई
वहीं, पीड़ित महिला नम्रता ने बताया कि पति के अंतिम संस्कार के बाद से ही वो अवसाद में थी। उसके दो बच्चे हैं, जिनके सिर से पिता का साया उठ चुका है। कोरोना व लॉकडाउन के चलते इंसाफ की आस में इंतजार करती रही। 24 सितंबर को CJM कोर्ट में गुहार लगाई, जिसकी सुनवाई 1 अक्टूबर को होगी। उधर, पूरे मामले में डॉ. अरिंजय जैन का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, पर संपर्क नहीं हो सका।

मॉकड्रिल, क्लीन चिट और मुकदमे वापसी का स्पेशलिस्ट
बता दें, श्री पारस अस्पताल के संचालक मूल रूप से मैनपुरी निवासी डॉ. अरिंजय जैन 'मॉकड्रिल, क्लीनचिट और मुकदमे वापसी' के स्पेशलिस्ट हैं। कोरोना वायरस की पहली लहर में सरकारी गाइडलाइन का उल्लंघन करते हुए कोविड पॉजिटिव बुजुर्ग महिला को आम मरीजों के साथ भर्ती कर लिया था, जिससे पूरे आगरा मंडल में कोरोना फैला। न जाने कितनों की मौत के जिम्मेदार बने डॉ. अरिंजय जैन पर मीडिया ट्रायल के बाद सिर्फ महामारी एक्ट में मुकदमा दर्ज हुआ। अस्पताल सील करने की कार्रवाई कर बात प्रशासन ने ठंडे बस्ते में डाल दी। इसके बाद गुपचुप तरीके से पारस अस्पताल की सील भी खुल गई।

मृतक की पत्नी नम्रता ने 24 सिंतबर को लगाई कोर्ट में इंसाफ की गुहार, अब 1 अक्टूबर को सुनवाई।
मृतक की पत्नी नम्रता ने 24 सिंतबर को लगाई कोर्ट में इंसाफ की गुहार, अब 1 अक्टूबर को सुनवाई।

दूसरी लहर में 22 मौतों पर भी मिली थी क्लीन चिट
वहीं, कोरोना की दूसरी लहर के दौरान दागी पारस अस्पताल को कोविड सेंटर बना दिया गया। 7 जून को पारस अस्पताल के संचालक डॉ. अरिंजय जैन का एक वीडियो सामने आया था। इसमें अरिंजय कबूल कर रहे हैं कि उन्होंने ऑक्सीजन बंद करके 5 मिनट में 22 लोगों की जिंदगी छीन ली थी। आगरा के जिलाधिकारी प्रभु नारायण सिंह ने उसी दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया था कि 26 अप्रैल की रात अस्पताल में महज 3 मौतें हुई थीं। उन्होंने ऑक्सीजन की कमी से कोई भी जान न जाने की बात कही। हालांकि, उसके बाद से अब तक 26-27 अप्रैल की रात पारस अस्पताल में जान गंवाने वाले 11 मृतकों के परिजन सामने आ चुके थे। इसके बावजूद जांच कमेटी ने इन 11 मृतकों के परिजन से बात करना जरूरी नहीं समझा।

मामले के सुर्खियां में आने के बाद जांच टीम गठित कर अस्पताल सील किया गया। लाइसेंस भी निलंबित करने का आदेश जारी हुआ। सीएम योगी के आदेश पर बनी कमेटी ने जांच रिपोर्ट देने में देर लगाई और बिना बयान के अस्पताल को मॉकड्रिल मामले में क्लीन चिट मिल गई। उधर, पुलिस को दी गई शिकायतें भी ठंडे बस्ते में चली गईं और पीड़ितों ने कोर्ट में वाद दाखिल किया, पर न जाने क्यों अचानक सारे वादी मुकदमा वापस लेकर अंडरग्राउंड हो गए।

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