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आगरा विश्वविद्यालय को होगा घाटा:राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय बनने से कटेंगे 400 कॉलेज,  छात्र संख्या कम होने से आय होगी कम, आने वाले समय में वेतन-पेंशन की हो सकती है परेशानी

आगरा:3 महीने पहले
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अलीगढ़ में मंगलवार को प्रधानमंत्री राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय का शिलान्यास करेंगे। इस विश्वविद्यालय में आगरा की डा. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध करीब 400 कॉलेज स्थानांतरित होंगे। इसके साथ ही डा. बीआर आंबेडकर विवि से संबद्ध कॉलेजों की संख्या में कमी आएगी। इससे आगरा विश्वविद्यालय से जुडे़ छात्रों को फायदा होगा। वहीं, विश्वविद्यालय की आय पर प्रभाव पडे़गा। आने वाले समय में विश्वविद्यालय के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है।

400 कॉलेज कम होने से कम होगी आय
अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय का 14 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिलान्यास करेंगे। इस विश्वविद्यालय से अलीगढ़ मंडल के चार जिले अलीगढ़, हाथरस, एटा और कासगंज के करीब 400 कॉलेजों को संबद्ध किया जाएगा। अभी तक यह कॉलेज आगरा की डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। इन 400 कॉलेजों में करीब 1.50 लाख छात्र पढ़ते हैं। ऐसे में आगरा विवि में कॉलेज कम होने का फायदे से ज्यादा औ नुकसान होता दिख रहा है। आगरा विश्वविद्यालय के पूर्व अधिकारी ने बताया कि नई यूनिवर्सिटी बनने से आगरा विश्वविद्यालय में छात्र संख्या कम होगी। इससे काम का बोझ कम होगा। ऐसे में परीक्षा और परीक्षा परिणाम समय से हो सकेंगे। मगर, छात्र संख्या कम होने से आगरा विश्वविद्यालय की आय पर बहुत प्रभाव पडे़गा। विश्वविद्यालयों के खर्च में कोई कटौती नहीं होगी, लेकिन आय कम हो जाएगी।

भविष्य में हो सकती है परेशानी
आगरा विश्वविद्यालय के पूर्व अधिकारी ने बताया कि विश्वविद्यालय की आय का स्रोत परीक्षा शुल्क ही होता है। वर्तमान में विश्वविद्यालय से करीब 1050 कॉलेज से परीक्षा शुल्क के रूप में करीब 65 से 75 करोड़ प्रतिवर्ष आय होती है। इसमें सबसे बड़ा खर्चा विश्वविद्यालय के कर्मचारी और शिक्षकों का वेतन व पेंशन है, जो करीब 40 करोड़ रुपए साल है। इसके अलावा विवि के अन्य खर्च भी होते हैं। इसमें परीक्षा कराना भी एक बड़ा खर्च है। ऐसे में डेढ़ लाख छात्रों के कम होने से उनकी फीस करीब 20 से 25 करोड़ रुपए कम हो जाएगी। ऐसे में विवि की आय करीब 50 करोड़ रुपए तक सीमित हो जाएगी। वहीं, फिरोजाबाद में प्राइवेट यूनिवर्सिटी खुलने से यहां के छात्र संख्या लगातार कम हो रही है। ऐसे में आने वाले सालों में आगरा विश्वविद्यालय को वेतन और पेंशन निकालना मुश्किल न पड़ जाए।

अब चार जिलों तक सीमित रह जाएगा आगरा विश्वविद्यालय
देश के सबसे प्राचीनतम शिक्षण संस्थान में शामिल आगरा विश्वविद्यालय से अभी दो मंडल के आठ जिलों के कॉलेज संबद्ध है। 1927 में जब विश्वविद्यालय बना था तब इसका विस्तार गुजरात, कोलकाता, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, राज्यस्थान तक था। मगर, धीरे-धीरे नए विश्वविद्यालय बनने तो इसका विस्तार उत्तर प्रदेश तक रह गया। उत्तर प्रदेश में भी गोरखपुर, बरेली, झांसी, मेरठ और कानपुर विश्वविद्यालय को भी आगरा विश्वविद्यालय से ही कॉलेज मिले थे। अब अलीगढ़ के राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में चार जिलों के कॉलेज जाने के बाद आगरा विश्वविद्यालय भी आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी तक सीमित हो जाएगा।

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