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ऑक्सीजन बंद करने से हुई 22 मौतों का मामला:मृतकों के परिजन बोले- मालूम था जांच का यही हश्र होगा; आगरा DM से पूछे 15 सवालों के जवाब

आगराएक महीने पहले
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जांच टीम की रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार वहां अपर्याप्त ऑक्सीजन और मॉक ड्रिल का कोई प्रमाण नहीं है। - Dainik Bhaskar
जांच टीम की रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार वहां अपर्याप्त ऑक्सीजन और मॉक ड्रिल का कोई प्रमाण नहीं है।

26 अप्रैल की सुबह 22 मौतों की मॉक ड्रिल करने वाले आगरा के पारस अस्पताल को सरकार ने क्लीन चिट दे दी गई है। जांच टीम ने मृतकों के परिजनों का बयान नहीं लिया है। लेकिन दैनिक भास्कर ने 7 ऐसे पीड़ितों से बात की, जिन्होंने किसी न किसी अपने को खोया है। उनका कहना है कि वे डॉक्टर अरिंजय जैन को छोड़ने वाले नहीं हैं। अभी तक जांच के दौरान कोर्ट नहीं जा सकते थे, लेकिन अब जाएंगे। पीड़ित परिवारों ने डीएम प्रभु नारायण सिंह से 15 सवालों के जवाब भी पूछे हैं।

पीड़ित बोले- प्रशासन भले छोड़ दे, हम नहीं छोड़ेंगे

  • अशोक चावला के पिता और भाभी की मौत पारस अस्पताल में 26 अप्रैल को हुई थी। अशोक कहते हैं कि उन्हें पहले ही मालूम था कि जिलाधिकारी अस्पताल को अभयदान देंगे। मगर जांच के दौरान हम हाईकोर्ट नहीं जा सकते थे। आज हम जांच रिपोर्ट की सर्टिफाइड कॉपी लेंगे। फिर वकील के माध्यम से हाईकोर्ट में वाद दखिलकर अस्पताल के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराएंगे।
  • इटावा निवासी राजू ने बताया कि हम रोजाना इटावा से आकर शिकायत कर रहे थे। हम शिकायतकर्ता थे और हमने अभी तक जांच टीम को देखा भी नहीं। बयान को भी एडीएम सिटी के पीए द्वारा लिया गया और जांच रिपोर्ट में हमारे बयान का कोई स्थान नहीं है। हम छोड़ेंगे नहीं और कार्यवाही के लिए अन्य पीड़ितों के साथ न्यायालय जाएंगे। अस्पताल आक्सीजन नहीं दे रहा था। मॉक ड्रिल में मरीजों को चिन्हित करने के बाद उनकी आक्सीजन बंद कर दी गई थी। मौत के समय में अंतर इसलिए है कि आक्सीजन निकालने के बाद सब तड़प तड़प कर मरे थे। जिसकी जितनी ताकत थी उतनी देर वो लड़ा और फिर मर गया। इसीलिए समय अलग अलग है।
  • आशा शर्मा की मौत 26 अप्रैल की रात में हुई थी। उनके पति सुरेश ने बताया कि अस्पताल को इस तरह क्लीन चिट देना शर्मनाक है और वे इसके लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
  • राधिका अग्रवाल की भी जान 26 अप्रैल को गई थी। उनके पति सौरभ का कहना है कि मेरी पत्नी ने अपनी बहन से अस्पताल में ऑक्सीजन बार-बार बंद करने की बात बताई थी। जिसका सबूत चैट के तौर पर है। लेकिन उसे जांच में शामिल नहीं किया गया।
  • मृतक 70 वर्षीय डालचंद्र के पुत्र अधिवक्ता प्रकाश चंद्र ने कहा कि वो तो पहले ही प्रशासन पर भरोसा नहीं कर रहे थे। उन्हें न्यायालय पर भरोसा है और वो दोषी डाक्टर को सजा दिलवाकर ही मानेंगे।
  • सिपाही अशोक ने बताया कि उनकी पत्नी मुन्नी देवी की अस्पताल में ऑक्सीजन बंद करने से हुई थी। लेकिन अब अस्पताल को क्लीन चिट मिलना गलत है। जांच करने वालों ने जांच में काफी कमियां छोड़ी हैं। अगर सब पीड़ित कुछ करेंगे तो वो भी साथ देंगे।
  • मधुनगर निवासी मृतका रामवती के पति नत्थीलाल त्यागी ने कहा कि अब हमारी हिम्मत नहीं है, क्योंकि जब प्रशासन आरोपी के साथ है और हमारे पास कोई ठोस सबूत नहीं है तो हम किसी का क्या करेंगे? आक्सीजन सिलेंडर भी हम बिना बिल के ब्लैक में लाए थे। अगर कोई संस्था इस मामले में न्यायालय जाती है तो हम भी सहयोग जरूर करेंगे पर अकेले कोई कुछ नहीं कर पाएगा। यदि सब एक हुए तो भले ही कुछ हो जाएगा।

समाजसेवी ने कहा- हम हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे

समाजसेवी नरेश पारस का कहना है कि बिना जांच के ही इतनी ऑक्सीजन की किल्लत के समय जिलाधिकारी ने बिना जांच अस्पताल को क्लीन चिट दे दी गई। जबकि सिर्फ मेरे पास उस दिन ऑक्सीजन के लिए 800 फोन आए थे। तमाम जगह आक्सीजन की कमी के मामले दिखाई दिए थे। इस मामले में मैं चुप नहीं बैठूंगा। मैं आर्थिक खर्च वहन करने में अक्षम हूं पर कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने आश्वासन दिया है और पीड़ित परिजन भी साथ आ रहे हैं। अब हम हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

पीड़ित परिवारों ने डीएम से पूछे ये सवाल

  • वीडियो वायरल होने के एक घंटे के भीतर ही ऑक्सीजन की कमी ना होने का बयान कैसे दे दिया वो भी बिना किसी जांच के?
  • जिलाधिकारी के मुताबिक 26 को 4 और 27 को 3 मौतें हुई थीं। लेकिन बाद में जांच रिपोर्ट में भी 16 मौतों का जिक्र है। लेकिन रिपोर्ट में पीड़ितों के बयानों को कोई जगह क्यों नहीं?
  • वीडियो में 96 मरीजों के भर्ती होने का जिक्र है तो 96 मरीजों का डेटा सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
  • अगर 26 और 27 अप्रैल के दरम्यान अस्पताल की CCTV की फुटेजप्रशासन के पास है तो फिर जांच रिपोर्ट में उसका जिक्र नहीं है और उसे क्यों सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है?
  • पीड़ितों के बयानों, उनकी वॉट्सऐप चैट और सीएम हेल्पलाइन पर मांगी गई मदद और मीडिया में दिए गए बयानों को क्यों अनदेखा किया गया?
  • डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल जब पारस अस्पताल था तो उसमें दूसरी बीमारियों से ग्रसित मरीजों को क्यों भर्ती किया गया और दूसरी अन्य बीमारियों से ही मौत की बात कही जा रही है। जबकि परिजन बार-बार कह रहे थे कि उनके परिजन को कोविड या पोस्ट कोविड ट्रीटमेंट के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
  • अरिंजय जैन के वीडियो में किये गए कबूलनामा कि 5 मिनट ऑक्सीजन रोकी तो ये पूछा जा सकता है कि किस अधिकार से ऑक्सीजन की सप्लाई रोकी गई। क्या cmo से परमिशन ली गयी या DM से अनुमति लेकर ऐसा किया गया
  • जब जांच रिपोर्ट में वीडियो के कुछ भाग को आधार बनाया गया है तो खुद मीडिया मुकदमा करवा देगी 304 का, पारस में इतनी मौतों की बात को जांच टीम क्यों नहीं मान रही?
  • डॉ. अरिंजय जैन के अनुसार जब वीडियो को तोड़-मरोड़ कर उन्हें भेजा गया और ब्लैकमेल करने की कोशिश की गई तो पुलिस के पास शिकायत क्यों नहीं की गयी?
  • अगर आगरा में ऑक्सीजन की कमी नहीं थी तो तमाम अस्पतालों ने ऑक्सीजन खत्म हो गयी है, इसके नोटिस बोर्ड क्यों लगाए थे और खुद अधिकारियों को सिलेंडरों को कब्जे में लेकर जरूरत के हिसाब से सप्लाई क्यों करनी पड़ी थी? क्यों जिलाधिकारी रात में लोअर टी शर्ट में ऑक्सीजन कैप्सूल रिसीव करने पहुंचते थे?
  • क्या अपनी गर्दन बचाने के चक्कर में 22 लोगों की मौत पर एकतरफा रिपोर्ट बना दी गई?
  • मामले की लीपापोती करने के लिए ही क्या चुपचाप बिना मीडिया को जानकारी दिए ACS स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद आगरा आए थे।
  • जब ADA ने आवासीय भवन में संचालित हो रहे पारस अस्पताल को नोटिस जारी किया है तो अस्पताल संचालक क्यों अभी तक नोटिस का जवाब दे पाया है।
  • पिछले साल जिस अस्पताल को लेकर 11 जिलों के DM को चिट्ठी लिखने वाले जिलाधिकारी का अपनी गर्दन फंसते ही बचाव की मुद्रा में क्यों हैं?
  • सरकारी तय पैसों से ज्यादा वसूलने और अनाप शनाप बिल बनाने पर क्यों कार्यवाही नही की गई।
  • आखिर किस तरह कुछ वर्षों में डाक्टर अरिंजय जैन अरबों की चल अचल संपत्ति का मालिक बन गया?
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