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19.25 करोड़ में बिके चाहर बंधुओं की कहानी:8 साल की उम्र में बड़े भाई दीपक को खेलते देखकर राहुल ने उठाई थी बॉल, पिता बने कोच

आगरा5 महीने पहलेलेखक: गौरव भारद्वाज
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आगरा के क्रिकेटर चाहर बंधु IPL की मेगा नीलामी में करोड़पति हुए हैं। दीपक चाहर को चेन्नई ने 14 करोड़ रुपए में खरीदा है, जबकि उनके चचेरे भाई लेग स्पिनर राहुल चाहर को पंजाब किंग्स ने सवा 5 करोड़ रुपए में अपनी टीम में शामिल किया है। इससे पहले 2018 में मुंबई ने राहुल को 1.90 करोड़ में खरीदा था।

चाहर बंधुओं के क्रिकेटर बनने की कहानी बहुत ही रोचक है। एयरफोर्स से रिटायर्ड पिता लोकेंद्र चाहर दोनों के कोच हैं। इनका रिश्ता भी बेहद उलझा हुआ और खास है। दीपक और राहुल चचेरे भाई होने के साथ-साथ मौसेरे भाई भी हैं। पिता ने बताया, 'मैं खिड़की से देखता था कि मेरा बेटा गली क्रिकेट में सबसे अच्छा खेलता था। राहुल ने महज 8 साल की उम्र में अपने बड़े भाई दीपक को खेलता देखकर पहली बार बॉल उठाई थी'।

दीपक और राहुल चाहर अपने कोच लोकेंद्र चाहर के साथ।
दीपक और राहुल चाहर अपने कोच लोकेंद्र चाहर के साथ।

कोच ने क्रिकेट के लिए स्कूल करा दिया ड्रॉप

आगरा के नारौल गांव के रहने वाले लोकेंद्र सिंह चाहर क्रिकेटर दीपक चाहर के पिता हैं। वो एयरफोर्स से रिटायर्ड हैं। उन्होंने बताया कि जब वे 2004 में श्रीगंगानगर में तैनात थे तो वो बेटे दीपक को गली में क्रिकेट खेलते देखते थे। उन्होंने देखा कि दीपक दूसरे लड़कों से अच्छा खेलता है। गेंदबाजी अच्छी है। बस वहीं से उन्होंने बेटे को क्रिकेटर बनाने की ठान ली। इसके बाद वो दीपक को एक क्रिकेट एकेडमी में ले गए। 20 दिन दीपक ने वहां पर ट्रेनिंग ली।

मगर, उन्हें लगा कि एकेडमी में जो मेहनत वो कर रहा है। उससे वो इंडिया टीम नहीं पहुंच पाएगा। ऐसे में उन्होंने खुद ही दीपक को ट्रेंड करने की ठानी। बताया कि वो खुद क्रिकेट खेलना चाहते थे, लेकिन घर से सपोर्ट नहीं मिला था। ऐसे में बेटे को क्रिकेटर बनाने का सोचा।

दीपक के पिता और कोच लोकेंद्र चाहर
दीपक के पिता और कोच लोकेंद्र चाहर

दीपक के साथ राहुल भी आया तो बढ़ गई चुनौती
लोकेंद्र सिंह चाहर ने बताया कि पहले वो दीपक को ट्रेंड कर रहे थे। इसके बाद उनके छोटे भाई देशराज का बेटा राहुल भी आ गया। ऐसे में अब दोनों को टीम इंडिया तक पहुंचाने की जिम्मेदारी थी। उन्होंने इस जिम्मेदारी को उठाया। दोनों को ट्रेनिंग देनी शुरू की। घर के सामने ही नेट लगाए। वहां पर सुबह दोनों अपनी प्रैक्टिस करते थे। ऐसा कोई दिन होगा जिस दिन प्रैक्टिस से छुट्‌टी मिलती होगी। इसके अलावा उन्होंने दोनों का स्कूल ड्रॉप कराया। एग्जाम के समय दोनों को पढ़ाई पर फोकस कराते थे।

दोनों के सफल होने पर मिला 11 गुना फल
लोकेंद्र चाहर ने बताया कि दोनों की ट्रेनिंग के दौरान उनकी प्राथमिकता सिर्फ ग्राउंड से घर और घर से ग्राउंड थी। पहले दीपक था तो एक लक्ष्य था, लेकिन राहुल के आने के बाद एक और एक 11 हो गए। दोनों के सलेक्शन के बाद उनकी तपस्या का 11 गुना फल मिला है।

राहुल चाहर अपने माता-पिता के साथ
राहुल चाहर अपने माता-पिता के साथ

दीपक बोले-जिम्मेदारी और बढ़ गई है
दीपक के पिता व कोच लोकेंद्र चाहर का कहना है कि दीपक को ऑलराउंडर होने का फायदा मिला है। इसके अलावा दीपक जैसा स्विंग बॉलर कहीं नहीं है। चेन्नई ने बालिंग और बैटिंग स्किल को देखते हुए ही दीपक पर दांव खेला है। वहीं, दीपक चाहर चेन्नई सुपरकिंग्स के कप्तान महेंद्र सिंह के पसंदीदा भी हैं। उनको उम्मीद थी कि 10 से 12 करोड़ रुपए में दीपक की बोली लगेगी। लेकिन, उम्मीद से ज्यादा दाम मिले हैं। दीपक के पिता ने बताया कि ऑक्शन के बाद दीपक से बात हुई है। वो भी खुश हैं। दीपक भी चाहते थे कि वो चेन्नई की ओर से खेलें। दीपक का कहना है कि टीम ने जो प्यार दिया है, उससे उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है।

राहुल के घर वाले भी खुश

दीपक चाहर के छोटे भाई लेग स्पिनर राहुल चाहर को पंजाब ने 5.25 करोड़ में खरीदा है। इससे पहले 2018 में मुंबई ने राहुल को 1.90 करोड़ में खरीदा है। इसके बाद से वो मुंबई के लिए खेल रहे थे। राहुल के कोच व ताऊजी लोकेंद्र चाहर का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि दीपक को सात करोड़ रुपए मिलेंगे, लेकिन उम्मीद से थोड़ा पीछे रह गए। वहीं, राहुल के पिता देशराज बेटे की तरक्की से खुश हैं। उनका कहना है कि राहुल के पास अपने प्रतिभा को दिखाने का सही समय है। उम्मीद है आने वाले सालों में वो बडे़ भाई की तरह और ऊपर जाएगा।

राहुल और दीपक का ये अनूठा रिश्ता
राहुल और दीपक का का रिश्ता काफी उलझा हुआ है। दीपक और राहुल चचेरे भाई होने के साथ-साथ मौसेरे भाई भी हैं। दीपक चाहर के अंकल और उनकी मौसी ने आपस में शादी की है। इसके चलते उनकी मौसी ही उनकी आंटी भी बन गई। इसी वजह से अब राहुल उनके मौसी के बेटे भी हुए और अंकल के बेटे भी हुए। दोनों भाइयों की उम्र में 7 साल का फासला है। दीपक बड़े हैं।