VIDEO में देखें 9000 फीट से जवानों की छलांग:आजादी के अमृत महोत्सव में 75 पैराट्रूपर्स ने आगरा के आसमान में लहराया तिरंगा, सर्जिकल स्ट्राइक का नजारा भी दिखा

आगरा:5 महीने पहले
आगरा एयरबेस में देश का इकलौता पैराशूट ट्रेनिंग सेंटर (पीटीएस) है।

आजादी के 75 साल पूरे होने पर आगरा में अमृत महोत्सव का आयोजन किया गया। एयरफोर्स स्टेशन पर सुबह 7 बजे एयरफोर्स की शत्रुजीत ब्रिगेड के 75 जवानों ने एक साथ आसमान से पैराग्लाइडिंग की। 9 हजार फीट की ऊंचाई से तीन जहाजों से 25-25 जवानों की टुकड़ी ने छलांग लगाई। इस दौरान हर टुकड़ी के लीडर ने आर्मी, एयरफोर्स और तिरंगा लहराया। जवानों ने सर्जिकल स्ट्राइक का नजारा भी पेश किया। मशहूर क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी ने यहीं पर पैराट्रूपर बनने की ट्रेनिंग ली थी।

एयर फोर्स के जवानों ने दुश्मन पर हमला करने और टारगेट अचीव करने का प्रदर्शन किया।
एयर फोर्स के जवानों ने दुश्मन पर हमला करने और टारगेट अचीव करने का प्रदर्शन किया।

एयरफोर्स ग्राउंड पर युद्ध जैसा नजारा दिखा
आगरा में एयरफोर्स ग्राउंड पर शुक्रवार सुबह अचानक बम के धमाके और गोलियों की आवाजें आनी शुरू हो गईं। कुछ ही देर में चारों तरफ से ट्रकों और जीपों के साथ तोपें और हथियारबंद जवान आते दिखाई दिए। सेना के युद्ध कौशल का नजारा देख हर कोई रोमांचित हो गया। सैनिकों ने पत्थर की टाइल्स पर आग लगाकर तोड़ते की स्किल भी दिखाई।

जवानों ने सर्जिकल स्ट्राइक का प्रदर्शन किया
हवा में उड़ते हेलीकाप्टर से रस्सियों के सहारे लटक कर जवानों ने सर्जिकल स्ट्राइक का प्रदर्शन किया। एयरबॉर्न फोर्स दुनिया के 5 देशों के पास ही है और इनमें भारत की शत्रुजीत फोर्स का नाम भी है। सर्जिकल स्ट्राइक जैसे तमाम ऑपरेशन इन्ही कमांडो द्वारा किये जाते हैं। जवानों ने एयरफोर्स ग्राउंड पर इन्ही स्किल्स का प्रदर्शन किया।

आगरा में एयरफोर्स स्टेशन पर वॉर स्किल्स का प्रदर्शन करते आर्मी के जवान।
आगरा में एयरफोर्स स्टेशन पर वॉर स्किल्स का प्रदर्शन करते आर्मी के जवान।

एशिया का सबसे बड़ा एयरबेस है आगरा
भारतीय वायुसेना का आगरा एयरबेस एशिया में सबसे बड़ा है। पाकिस्‍तानी फाइटर प्‍लेन बी-57 ने 1971 की लड़ाई में बम गिराए थे। एयरबेस से पाक विमानों पर इतना जोरदार जवाबी हमला हुई कि वे भागने को मजबूर हो गए। इनमें से एक फाइटर प्‍लेन को मारकर गिरा दिया गया था। इस एयरबेस पर 250 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट तैनात हैं। सीमा तक जवानों और रसद पहुंचाने का काम इन्हीं एयरक्राफ्ट से होता है। फाइटर जेट्स को हवा में फ्यूल देने का काम भी इनसे ही होता है। एयरबेस पर लगभग 6000 कर्मचारी तैनात हैं। वहीं, करीब 66 हजार करोड़ रुपए (दस बिलियन डॉलर) के उपकरण लगे हुए हैं।

वायुसेना का आगरा एयरबेस एशिया में सबसे बड़ा है। यहां ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट तैनात हैं।
वायुसेना का आगरा एयरबेस एशिया में सबसे बड़ा है। यहां ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट तैनात हैं।

द्वितीय विश्‍वयुद्ध में अमेरिका के लिए तैयार किया गया था एयरबेस
आगरा एयरबेस को सबसे पहले द्वितीय विश्‍वयुद्ध में अमेरिका के लिए तैयार किया गया था। 1942 में जापान से लड़ने के लिए अमेरिकी जंगी विमान इस एयरपोर्ट का इस्‍तेमाल सप्‍लाई और मेंटेनेंस के लिए करते थे। तब इसका नाम आगरा एयर ड्रॉप था। विश्‍वयुद्ध खत्‍म होने के बाद रॉयल इंडियन एयर फोर्स ने इसका इस्‍तेमाल बंद कर दिया था। आजादी के बाद पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने देश में 4 अंतराष्‍ट्रीय स्‍तर के एयरबेस की स्‍थापना कराई। इसमें आगरा एयरबेस चौथे विंग के रूप में था।

सेना की तरफ से हथियारों की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी, जिनमें कई तरह की गन शामिल थीं।
सेना की तरफ से हथियारों की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी, जिनमें कई तरह की गन शामिल थीं।

पाकिस्तान ने किया था हमला
1948 हो या 1965 या फिर 1971 का युद्ध, हर बार आगरा स्टेशन के पैराकमांडो, एयरफोर्स स्क्वाड्रन ने युद्ध में अपने वीरता का परिचय दिया है। 1971 के भारत - पाक युद्ध के दौरान देश के आठ हवाई अड्डों पर पाकिस्तानी वायुसेना ने अचानक हमला कर दिया था। उनमें से एक आगरा एयरबेस भी था। तीन दिसंबर 1971 की रात को यहां पर पाक फाइटर प्‍लेन बी-57 ने 16 बम गिराए गए थे। ये बम 500 पाउंड वजन के थे। इनमें से तीन बम एयरफोर्स परिसर में रनवे पर फटे।

इसके बाद एयरबेस से ही एंटी एयरक्राफ्ट गन से पाक विमानों पर इतने हमले किए गए कि हमलावर पाकिस्तानी सात स्क्वाड्रन का बी-57 विमान गिर गया। बाकि विमान भागने को मजबूर हो गए। कैनबरा विमानों ने पाक विमानों का पीछा किया। तीनों बम से एयरबेस के रनवे को मामूली क्षति हुई थी। इसे रात में ही तत्‍कालीन एयर कमोडोर जफर जहीर ने ठीक करवा दिया। इसकी वजह से एक दिन के लिए भी यहां से उड़ान ठप नहीं हुई।

आगरा एयरबेस को सबसे पहले द्वितीय विश्‍वयुद्ध में अमेरिका के लिए तैयार किया गया था।
आगरा एयरबेस को सबसे पहले द्वितीय विश्‍वयुद्ध में अमेरिका के लिए तैयार किया गया था।

एक्सप्रेस वे पर उतारे जा सकते हैं लड़ाकू विमान
आगरा एयरबेस पर आईएल 76, एएन 32, सी17, सी124 जहाजों का बेड़ा है। यहां पर विमान पर अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (अवाक्‍स) भी तैनात है। यह आसमान में चार सौ किलोमीटर तक की आसमानी गतिविधि पर नजर रखता है। पाकिस्‍तान हो या चीन, भारत में रहकर ही इनकी निगरानी की जा रही है। एयरपोर्ट पर भविष्‍य में होने वाले खतरों के मद्देनजर अब एक्‍सप्रेस वे को लड़ाकू विमानों के उतरने लायक बनाया गया है और इसका सफल परीक्षण भी हो चुका है।

सेना ने आम लोगों को युद्ध के दौरान काम आने वाले साजो-सामान से भी रूबरू कराया।
सेना ने आम लोगों को युद्ध के दौरान काम आने वाले साजो-सामान से भी रूबरू कराया।

आगरा में एकमात्र पैरा ट्रेनिंग सेंटर
आगरा एयरबेस में देश का इकलौता पैराशूट ट्रेनिंग सेंटर (PTS) है। यहां एक साल में करीब 13 हजार जवान ट्रेनिंग लेते हैं। सालभर में लगभग 41 हजार बार जवान यहां छलांग लगाते हैं। भारत, बांग्‍लादेश, श्रीलंका आदि देशों के जवान यहां पर पैराशूट की सहायता से विमान से आसमान में कूदने की ट्रेनिंग लेते हैं। भारतीय जवान आसमान में 40 हजार फुट की ऊंचाई से कूद सकते हैं। ये जवान युद्ध के स्‍थान से 40 किलोमीटर दूर विमान से छलांग लगाएंगे। उन्‍हें रडार नहीं पकड़ सकता है।

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