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आगरा में झोलाछाप का गोरखधंधा, अस्पताल सील:सरकारी की जगह आशा ने भेजा प्राइवेट अस्पताल, ऑपरेशन के नाम पर काट दी किडनी और पेट की नसें; नवजात की मौत-महिला गंभीर

आगरा2 दिन पहले
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बाह तहसील स्थित मां वैष्णवी हॉस्पिटल को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सील कराया। - Dainik Bhaskar
बाह तहसील स्थित मां वैष्णवी हॉस्पिटल को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सील कराया।

ताजनगरी आगरा में बुधवार को एक झोलाछाप निजी अस्पताल का गोरखधंधा सामने आया है। यहां स्थित मां वैष्णवी हॉस्पिटल में ऑपरेशन के दौरान प्रसूता की किडनी और पेट की नसें काट दी गई। इस दौरान नवजात की मौत हो गई। गलती छुपाने के लिए अस्पताल के जिम्मेदारों ने प्रसूता को दूसरे निजी अस्पताल में भेज दिया।

इसके साथ ही एक लाख रुपए में इलाज का ठेका करवा दिया गया। यहां भी हालत बिगड़ती देख परिजन महिला को दूसरे अस्पताल ले गए। जहां घटना का खुलासा हुआ। पीड़ित ने सीएससी अध्यक्ष और थाना प्रभारी को शिकायत की है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल को सील कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

वैष्णवी अस्पताल में हुई बच्चे की मौत

मामला बाह थाना क्षेत्र के नरेपुरा गांव का है। यहां के निवासी रामलाल की पत्नी रजनी देवी गर्भवती थी। बताया जा रहा है कि बीती 6 अगस्त को प्रसव पीड़ा के बाद रामलाल पत्नी को लेकर गांव की आशा सीमा देवी के साथ सीएससी पहुंचे। यहां नर्स ने उन्हें समझाकर निजी अस्पताल भेजा। आशा सीमा उन्हें लेकर मां वैष्णवी हॉस्पिटल आई। आरोप है कि इस निजी अस्पताल में उनकी मर्जी के बिना जबरन प्रसूता का ऑपरेशन कर दिया गया और नवजात की मौत हो गई। इस दौरान 20 हजार पहले लिए और बाद में 30 हजार ऑपरेशन के और मांगे।

इसके बाद प्रसूता की हालत और बिगड़ गई। जबरन वैन में बैठाकर दूसरे आरएम अस्पताल (प्राइवेट) भेज दिया गया। वहां खुद ही एक लाख रुपए में इलाज का ठेका करवा दिया गया। महिला की हालत बिगड़ते देख 4 दिन पहले परिवार वाले उसे पुष्पांजलि अस्पताल (प्राइवेट) ले गए। जहां परिजनों को जानकारी हुई कि प्रसूता के ऑपरेशन के दौरान ही उसकी किडनी और पेट की नसें काट दी गई। उसका बचना मुश्किल है।

मां वैष्णवी अस्पताल में हुई नवजात की मौत।
मां वैष्णवी अस्पताल में हुई नवजात की मौत।

पीड़ित की शिकायत पर शुरू हुई कार्रवाई
पीड़ित रामलाल ने मामले की शिकायत बाह सीएससी के अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार और थाने में की। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मां वैष्णवी अस्पताल को सील कर दिया। डॉ. जितेंद्र के अनुसार, मौके पर दो महिलाओं समेत 5 लोग मिले हैं। संचालक और पीड़ित दोनों ही ऑपरेशन करने वाले सर्जन का नाम नहीं बता पा रहे हैं। संचालक और स्टाफ कोई भी डिग्री नहीं दिखा पाया है। आगे की कार्रवाई की जा रही है।

बोर्ड एमडी का लगा और निकला 12वीं पास कंपाउंडर
वहीं, छानबीन में सामने आया कि मां वैष्णवी अस्पताल में बोर्ड पर डॉ. अजीत बघेल बीएएमएस (बैचलर ऑफ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी) लिखा था। साथ ही संतोष कुमार एमडी लिखा था। मगर जब जांच टीम ने अस्पताल में मौजूद संतोष कुमार से डिग्री दिखाने को कहा तो वह अपने आप को इंटर पास बताने लगा। जबकि अजीत अस्पताल में ही नहीं मिले।

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