किंग मेकर की भूमिका में बाइसी:ठाकुर बाहुल्य आगरा के इन 22 गांवों के मतदाताओं का जिसे मिलता है आशीर्वाद, उसकी नैया लगती है पार

आगरा4 महीने पहलेलेखक: गौरव भारद्वाज
बाइसी किस तरफ जाएगी, इसका फैसला राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र नहीं बल्कि पंचायत में तय होता है।

विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। ऐसे में राजनीतिक दल जातिगत समीकरण के आधार पर प्रत्याशियों को उतार रहे हैं। आगरा की एत्मादपुर विधानसभा सीट पर क्षत्रिय मतदाताओं की अच्छी तादाद है। इसलिए इस सीट पर राजनीतिक दल क्षत्रिय प्रत्याशी पर दांव लगाते हैं। कहा जाता है कि इस सीट पर जिसे बाइसी का आशीर्वाद मिल जाए, उसकी नैया पार हो जाती है। बाइसी यहां किंग मेकर की भूमिका में रहती है।पढ़िए सियासत की किंग मेकर बाइसी की ग्राउंड रिपोर्ट...।

इसलिए कहते हैं बाइसी

एत्मादपुर विधानसभा क्षेत्र में 22 गांव ठाकुर बाहुल्य हैं। इन गांवों में 90 फीसद ठाकुर बिरादरी ही रहती है। इन गांवों के समूह को बाइसी कहा जाता है। बाइसी का केंद्र खंदौली क्षेत्र का सेमरा गांव है। बाइसी की आबादी करीब सवा दो लाख होगी। बाइसी में करीब सवा लाख मतदाता हैं। बाइसी के बड़े गांव में सेमरा, बमान, नहर्रा, बांस सोना, बेलौठ, आवंलखेड़ा, चौकड़ा, नया बांस हैं, हालांकि यहां पर छोटे-छोटे मजरे भी बस गए हैं। बाइसी को किंग मेकर इसलिए भी कहा जाता है कि यहां का मतदान 75 प्रतिशत रहता है। यानी बाइसी जिसके पक्ष में मतदान कर दे तो उसकी नैया पार हो जाती है। वर्ष 2012 में एत्मादपुर से बसपा की टिकट पर डॉ. धर्मपाल सिंह तो 2017 में भाजपा से रामप्रताप सिंह चौहान जीते हैं।

एत्मादपुर विधानसभा क्षेत्र में 22 गांव ठाकुर बाहुल्य हैं। इन गांवों में 90 फीसद ठाकुर बिरादरी ही रहती है।
एत्मादपुर विधानसभा क्षेत्र में 22 गांव ठाकुर बाहुल्य हैं। इन गांवों में 90 फीसद ठाकुर बिरादरी ही रहती है।

तुगलकी फरमान नहीं, चर्चा के बाद होता है निर्णय

बाइसी किस तरफ जाएगी, इसका फैसला राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र नहीं बल्कि पंचायत में तय होता है। पंचायत का हुक्म तुगलकी फरमान जैसा नहीं होता, बल्कि गांव के सभी लोग गांव और ग्रामीणों के हाल-हालात पर चिंतन-मनन कर निचोड़ निकालते हैं। विशुद्ध रूप स ठाकुरों की यह पंचायत जातीयता पर आधारित होती है, लेकिन जब अपनी ही जाति के दो प्रत्याशी मैदान में होते हैं तो पैमाना बदल जाता है। आचार-व्यवहार, क्षेत्र के प्रति समर्पण, ग्रामीणों के प्रति संवेदनशीलता जैसे कई पैमानों पर परखने के बाद निर्णय लिया जाता है।

यह है बाइसी के लोगों की राय

दैनिक भास्कर टीम विधानसभा चुनाव में बाइसी का मिजाज जानने के लिए पहुंची। गांव में प्रवेश करते ही ग्राम पंचायत कार्यालय में लोगों की भीड़ थी। ऐसे में हम भी वहीं रुक गए। अंदर ग्राम प्रधान संदीप कुमार गांव वालों के साथ बात कर रहे थे। यहां पर पिछले दिनों बसपा के पूर्व विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह के भाजपा में आने को लेकर चर्चा चल रही थी। श्याम सिंह का कहना था कि वर्तमान विधायक रामप्रताप सिंह ने पांच साल में खूब काम किए। मगर, उनके नाम पर कुछ लोगों ने बहुत फायदा उठाया। अब भाजपा डॉ. धर्मपाल को टिकट दे या विधायक रामप्रताप को हम तो पार्टी के साथ हैं।

जब उनसे पूछा गया कि अगर दो ठाकुर प्रत्याशी अलग-अलग पार्टी से लड़ेंगे तो क्या बाइसी का वोट बटेगा। इस पर विष्णु सिकरवार का कहना था कि बाइसी ने पिछले 10 साल में डॉ. धर्मपाल और वर्तमान विधायक रामप्रताप दोनों को देख लिया। अब दोनों एक ही पार्टी में हैं, ऐसे में जिसे टिकट मिलेगी, उसका फायदा मिलेगा। अगर, सपा भी किसी ठाकुर प्रत्याशी को उतार देती है तो प्रत्याशी को देखकर तय किया जाएगा। मगर, बाइसी का वोट बटेगा नहीं। पंचायत कार्यालय से थोड़ा आगे चौपाल पर भी लोगों की भीड़ लगी थी। यहां पर भी सियासी चर्चा चल रही थी। बहादुर सिंह चौहान का कहना था कि अगर भाजपा धर्मपाल सिंह को उतारती है तो उनको फायदा होगा। वर्तमान विधायक ने काम तो किया लेकिन उनके साथ रहने वाले लोगों ने उनकी छवि खराब की।