आगरा में मिला फेफड़ों में ब्लैक फंगस का पहला केस:महिला का SN मेडिकल कॉलेज में चल रहा इलाज, सांस लेने में तकलीफ; अप्रैल माह में हुई थी कोरोना संक्रमित

आगरा3 महीने पहले
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आगरा एसएन मेडिकल कॉलेज। - Dainik Bhaskar
आगरा एसएन मेडिकल कॉलेज।

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के बदलते वैरिएंट के बाद ब्लैक फंगस ने लोगों को डरा रखा था। धीरे-धीरे लोग उभरने की कोशिश कर ही रहे थे। ऐसे में यूपी के आगरा से फेफड़ों में ब्लैक फंगस का मरीज मिलते ही चिंता बढ़ गई है। कोरोना से ठीक हुई महिला एसएन मेडिकल कॉलेज के ब्लैक फंगस वार्ड में भर्ती है। जांच में फेफड़ों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। इस तरह का आगरा में यह पहला मामला है। महिला का इलाज किया जा रहा है।

ब्लैक फंगस वार्ड के प्रभारी डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया कि आवास विकास काॅलोनी निवासी 43 साल की महिला को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। मंगलवार को परिजन उन्हें एसएन मेडिकल कॉलेज में लेकर आए। महिला अप्रैल माह में कोरोना संक्रमित हुई थीं। ठीक होने के करीब एक माह बाद इन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए नोएडा के निजी अस्पताल में भर्ती किया गया। हालत में सुधार न मिलने पर परिजन उन्हें दिल्ली एम्स में ले गए। वहां पर भी महिला की तबीयत में बहुत सुधार नहीं हुआ। इसके बाद परिजन उन्हें आगरा एसएन मेडिकल कॉलेज लेकर आए। अब उनका यहां पर ब्लैक फंगस वार्ड में इलाज चल रहा है। महिला पहले से डायबिटीज की मरीज हैं।

अभी तक ब्लैक फंगस वार्ड में भर्ती हुए 84 मरीज
एसएन मेडिकल कॉलेज के ब्लैक फंगस वार्ड में ब्लैक फंगस के जो 84 मरीज भर्ती हुए हैं, उनको नाक, आंख, गाल, जबड़ा, तालू में ब्लैक फंगस था। इसमें से 10 मरीजों की आंख निकालनी पड़ी थी। बाकी मरीजों के ऑपरेशन किए गए थे। इसमें से 40 मरीज ठीक हो गए, जबकि 14 को नहीं बचाया जा सका। अभी वार्ड में 15 मरीजों का इलाज चल रहा है।

13 जिलों के मरीज रहे भर्ती
एसएन के ब्लैक फंगस वार्ड में आगरा के अलावा फिरोजाबाद, मथुरा, मैनपुरी, एटा, कासगंज, हाथरस, पीलभीत, जयपुर, जबलपुर, अलीगढ़, जेवर, धौलपुर और गाजियाबाद के मरीजों ने इलाज कराया है।

यह है कोरोना संक्रमण की स्थिति
आगरा में कोरोना संक्रमण की स्थिति नियंत्रण में है। मंगलवार को कोरोना का एक नया केस आया, जबकि 7017 ने कोरोना की जांच कराई थी। 24 घंटे में दो मरीज स्वस्थ होकर घर गए हैं। अब तक आगरा में 25717 कोरोना के केस आए हैं। इसमें से 25225 मरीज स्वस्थ हुए हैं। वर्तमान में एक्टिव केस की संख्या 35 है। कोरोना से जिल में मरने वालों का सरकारी आंकड़ा 455 है। 98.09 कोरोना का रिकवरी रेट हो गया है।

ये है रोकथाम के उपाय
डॉक्टर बताते हैं कि इस बीमारी को जितनी जल्दी पहचानेंगे, इसका इलाज उतना ही सफल होगा। साथ ही शुगर पर कंट्रोल होना चाहिए। स्टेरायड को लेकर भी सावधानी बरतनी चाहिए। अगर किसी को स्टेरायड देना भी है तो उनकी मध्यम या हल्की डोज देनी चाहिए। स्टेरायड के बिना वजह इस्तेमाल से बचना चाहिए।

क्या होता है म्यूकरमायकोसिस (ब्लैक फंगस)
डॉक्टरों के अनुसार, म्यूकरमायकोसिस (ब्लैक फंगस) घातक इंफेक्शन होता है, जो शरीर में ब्लड सप्लाई को प्रभावित करता है। जहां पर यह ब्लैक फंगस हो जाता है, वहां से आगे की ब्लड सप्लाई रुक जाती है। नर्व सिस्टम में ब्लड की सप्लाई को डैमेज कर देता है। सर्जरी के बाद ही उतने हिस्से से ब्लैक फंगस हटाकर मरीज को बचाया जा सकता है। इस समय कोरोना वाले मरीजों में नाक में मरीजों को ब्लैक फंगस हो रहा है।

ये हैं ब्लैक फंगस के लक्षण

  • नेजल ड्राइनेस
  • नाक बंद होना
  • नाक से अजीब से कलर या काले खून का डिस्चार्ज होना
  • आंख खोलने में दिक्कत होना
  • अचानक से दोनों आंख या एक आंख से कम दिखाई देना, आंख में सूजन होना।
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