आगरा...पार्षद ने खोला मेयर के खिलाफ मोर्चा:कांग्रेस का आरोप - मेयर ने अयोग्य कंपनी को दिया 122 % ज्यादा धनराशि पर ठेका, आपसी राजनीति में क्षेत्र का हो रहा नुकसान

आगरा2 महीने पहले
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आगरा में कांग्रेस पार्षद और नेताओं द्वारा निजी हाल में प्रेसवार्ता कर मेयर नवीन जैन पर आरोप लगाए - Dainik Bhaskar
आगरा में कांग्रेस पार्षद और नेताओं द्वारा निजी हाल में प्रेसवार्ता कर मेयर नवीन जैन पर आरोप लगाए

आगरा के मेयर नवीन जैन के खिलाफ उनके ही नगर निगम के पार्षद ने मोर्चा खोल दिया है। पार्षद ने अयोग्य कंपनी को 9 करोड़ के ठेके देने, एक ही विधानसभा क्षेत्र में विकास कराने और विज्ञापन से कमाई आधी कर देने का आरोप लगाया है। पार्षद ने प्रेसवार्ता के माध्यम से अपनी बात रखी है। पार्षद का कहना है कि नगर निगम वर्तमान समय में कई फर्मों के बिल नहीं दे पा रहा है और इसके बीच कमलानगर के ही रहने वाले व्यक्ति की कंपनी जीआरसी इंफ्राटेक को 9 करोड़ रुपए में कमला नगर मेन मार्केट के विकास का ठेका दिया गया है।

यह ठेका 122 % अधिक धनराशि पर उठाया गया है। इस काम को डमी कंपनी गर्ग रिसर्फेसिंग कर रही है। कंपनी के पास इतने बड़े काम का अनुभव नहीं है और कमला नगर क्षेत्र शहर के सबसे विकसित क्षेत्र में गिना जाता है। फिर यहां विकास कार्य इतने जरूरी कैसे हो गए कि पैसे न होने पर भी काम करवाया जा रहा है। बता दें कि आगरा नगर निगम में शिरोमणि सिंह अकेले कांग्रेस के पार्षद हैं। पार्षद ने आरोप लगाया है कि इतना बड़ा बजट होने के बाद भी शहर में विकास कार्य नहीं दिखाई दे रहे हैं। जो निर्माण करवाये जा रहे हैं, उनकी गुणवत्ता खराब होने के चलते कुछ ही समय में पुरानी स्थिति हो रही है।

चुनाव की पृष्ठभूमि बना रहे मेयर

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मेयर नवीन जैन उत्तरी विधानसभा से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। इसी कारण उनके द्वारा कराए जा रहे ज्यादातर विकास कार्य कर रहे हैं। आपसी राजनीति में क्षेत्र का नुकसान हो रहा है।

विज्ञापन की आय रह गई आधी

प्रेस वार्ता में मौजूद कांग्रेस शहर अध्यक्ष देवेंद्र चिल्लू का कहना है कि नगर निगम की कमाई का सबसे बड़ा स्रोत विज्ञापन माना जाता है। मेयर नवीन जैन के कार्यकाल से पहले पांच करोड़ सालाना थी। अब तीन साल में साल 2020- 21 में 2,30,24,915.90 रुपये , साल 2019- 20 में 2,68,80,957 और 2021- 22 में 1 सितंबर तक 1,02,87, 399. 60 रुपये की कमाई आई है। इसका कारण बीच साल में टेंडर निरस्त कर दूसरी कंपनियों को देने और शहर भर में अवैध होर्डिंग लगना है।

नगर निगम बनी घर की कंपनी

पार्षद शिरोमणि के अनुसार नगर निगम के वित्त विभाग से आरटीआई पर जानकारी मांगने पर जवाब मिला है कि मेयर के कैम्प कार्यालय और कार व अन्य मदों का उसके पास कोई लेखा जोखा नहीं है, जबकि नगर निगम का वित्त का लेखा जोखा विधानसभा में ऑडिट होता है।

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