आगरा में पिछले साल से 35 गुना ज्यादा मौतें:इस साल मई में 3596 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए, मई 2020 में सिर्फ 102 बने थे; स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कोरोना से अब तक 449 मौतें ही हुईं

आगरा4 महीने पहलेलेखक: अविनाश जायसवाल
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कोरोना की दूसरी लहर ने ताज नगरी में भयानक कहर ढाया है। इसका अंदाजा इस साल मई महीने में नगर निगम से जारी मृत्यु प्रमाण पत्रों से लगाया जा सकता है। पिछले साल यानी मई 2020 में आगरा नगर निगम ने सिर्फ 102 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए थे। लेकिन इस साल मई में नगर निगम ने 3596 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। जो 35 गुना ज्यादा है। हालांकि, आगरा के स्वास्थ्य विभाग ने मार्च 2020 से अब तक जिले में 449 कोरोना संक्रमितों की मौत का आंकड़ा ही जारी किया है। जबकि इस मई महीने में 155 लोगों की कोरोना से मौत हुई है।

आगरा नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, अप्रैल और मई 2020 के दौरान औसतन 70-80 आवेदन मृत्यु पंजीकरण कार्यालय में प्राप्त हुए थे। यानी, प्रतिदिन सिर्फ 3 से 4। पिछले साल अप्रैल और मई महीने में कुल 188 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए थे। जबकि दूसरी लहर के बाद इस साल अप्रैल और मई महीने में 4,591 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए।

आगरा के 5 प्रमुख श्मशान घाटों पर 6 हजार से अधिक दाह संस्कार हुए
अप्रैल और मई में आगरा के 5 प्रमुख श्मशान घाटों पर 6,000 से अधिक दाह संस्कार हुए। इनमें से 2700 से अधिक दाह संस्कार अकेले ताजगंज श्मशान घाट पर हुए। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि जिले में इस साल अप्रैल और मई महीने में कोरोना से सिर्फ 242 लोगों की जान गई।

आगरा सीएमओ क्या कहते हैं?
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरसी पांडेय बताते हैं पिछले साल मार्च से अब तक आगरा जिले में कुल 449 कोरोना मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें से 87 ने अप्रैल में और 155 ने मई में दम तोड़ दिया। जिले में सभी मौतों का कारण कोरोना नहीं हो सकता है।

श्मशान घाट के आंकड़े क्या बताते हैं?
ताजगंज श्मशान घाट के कार्यवाहक संजीव गुप्ता ने बताया कि अप्रैल में यहां अंतिम संस्कार के लिए शवों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई थी। पहले आमतौर पर यहां हर दिन 15 शवों का अंतिम संस्कार किया जाता था।

वहीं, कोविड- 19 की दूसरी लहर के दौरान, अप्रैल में कुल 1,700 और मई में 1,028 अंतिम संस्कार हुए। संजीव ने बताया कि पिछले दो महीनों में, इलेक्ट्रिक भट्टी में 1,146 दाह संस्कार हुए, जबकि 1,627 पारंपरिक तरीके से अंतिम संस्कार किए गए। ज्यादातर मामलों में कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया गया। सभी श्मशानों को मिलाकर लगभग 2500 अंतिम संस्कार हुए थे।

बंद हो गई थीं भट्टियां
संजीव गुप्ता ने बताया कि 28 अप्रैल को लगातार दाह संस्कार होने के कारण भट्टियां अत्यधिक गर्म हो जाने से ताजगंज स्थित विद्युत शवदाह गृह में चारों भट्टियां बंद तक हो गई थीं।

क्या बोले नगर आयुक्त?
नगर आयुक्त टीकाराम फुले का कहना है कि हमें यह जानकारी नहीं है कि मृत्यु प्रमाण पत्र के आवेदनों में किसकी मृत्यु कैसे हुई है। आवेदनों की संख्या अधिक होने का एक कारण यह भी माना जा सकता है कि लॉकडाउन और महामारी के कारण बहुत से लोगों ने पूर्व में आवेदन नहीं किए।

मेयर नवीन जैन बोले- इस साल डेथ सर्टिफिकेट के लिए ज्यादा आवेदन
आगरा के मेयर नवीन जैन कहते हैं कि यह सत्य है कि पिछले साल की तुलना में इस साल डेथ सर्टिफिकेट के ज्यादा आवेदन आए हैं, मगर सभी जानते हैं कि जिस समय पूरा विश्व महामारी से गुजर रहा था तब हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह स्थिति को संभाला है, वो काबिले तारीफ है। अगर वो इतना काम न करते तो पूरा देश और प्रदेश तबाह हो जाता।

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