पारस अस्पताल पर केस के लिए अभी और इंतजार:आगरा पुलिस की धीमी कार्रवाई के चलते कोर्ट ने दी अगली तरीख, 9 अगस्त को होगी सुनवाई

आगरा10 महीने पहले
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आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सांसद ने कहा कि अगर एक हफ्ते में पारस अस्पताल पर कार्रवाई नहीं हुई तो कोर्ट तक जाएंगे। - Dainik Bhaskar
आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सांसद ने कहा कि अगर एक हफ्ते में पारस अस्पताल पर कार्रवाई नहीं हुई तो कोर्ट तक जाएंगे।

आगरा के पारस अस्पताल पर मौत की मॉक ड्रिल मामले पर कोर्ट में दाखिल वाद की सुनवाई में पुलिस की लेट लतीफी के चलते सुनवाई के लिए अगली तारीख दे दी गई। पीड़ित पक्ष ने आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह को ज्ञापन देकर मदद मांगी है।

पुलिस ने नहीं पेश की रिपोर्ट, कोर्ट ने दी अगली तारीख

आगरा के चर्चित मौत की मॉक ड्रिल करने वाले पारस अस्पताल पर पीड़ित अशोक चावला ने युवा अधिवक्ता संघ के साथ मिलकर न्यायालय में मुकदमा दर्ज करने के लिए वाद दाखिल किया था। शुक्रवार को कोर्ट में उसकी सुनवाई होनी थी। पीड़ित अशोक चावला ने बताया कि हमारे वाद पर न्यायालय ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी पर पुलिस ने रिपोर्ट पेश नहीं की। इस कारण सुनवाई अगले माह की 9 तारीख तक टाल दी गई है। उन्होंने बताया कि प्रशासन की जांच बहुत धीमी है। अभी तक पारस अस्पताल का लाइसेंस निलंबन तक नहीं हुआ है।

सांसद संजय सिंह को दिया ज्ञापन

शुक्रवार को कथित मॉक ड्रिल में परिवार के दो लोगों को खो चुके अशोक चावला और भाई अमित चावला ने समाज के लोगों के साथ आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को ज्ञापन देकर मदद मांगी है।

संजय सिंह बोले- सप्ताह भर में जाएंगे कोर्ट

संजय सिंह ने आगरा में पारस अस्पताल अस्पताल के मामले पर कहा कि यह हत्या है। हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। यह केवल आगरा में नहीं हुआ पूरे यूपी में यही हुआ है। सरकारी अस्पतालों की क्या स्थिति थी यह सब जानते हैं। लखनऊ में तो ऑक्सीजन की कमी की शिकायत पर डॉक्टरों पर मुकदमे लिखवा दिए गए। जिस तरह जांच हुई है उससे लगता है इसमें लेन देन हुआ होगा। सप्ताह भर में पारस अस्पताल पर कार्रवाई नहीं हुई तो हम कोर्ट जाएंगे।

यह था पूरा मामला

7 जून को पारस हॉस्पिटल के मालिक अरिंजय जैन के कुछ वीडियो सामने आए थे। वीडियो में अरिंजय किसी से बात करते हुए बता रहे थे कि 26 अप्रैल को 96 मरीज भर्ती थे और उनमें से छंटनी करने के लिए उन्होंने पहले 7 गंभीर कोविड मरीजों की ऑक्सीजन बन्द कर उन्हें खत्म करने की मॉक ड्रिल की और फिर उन्होंने ऑक्सीजन कमी के दौर में ऑक्सीजन सप्लाई को 5 मिनट तक बंद कर दिया। जिससे उनेक हिसाब से 22 मरीज छंट गए। डॉक्टर द्वारा 22 मरीजों को मार देने का कुबूलनामा सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने तत्काल क्लीन चिट दे दी थी पर मामले की गूंज देश भर में होने के बाद शासन द्वारा जांच के आदेश हुए थे। 18 जून को प्रशासन ने जांच रिपोर्ट जारी कर अस्पताल को क्लीन चिट देते हुए सिर्फ महामारी एक्ट का दोषी माना था।

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