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एपिक नंबर 'गुमशुदा':पुलिस वालों को एपिक नंबर ने बनाया घनचक्कर, 2 दिन में नहीं दिया तो नहीं मिलेगा वेतन, हजारों पुलिसकर्मियों की उड़ी नींद

आगरा7 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो

ताजनगरी आगरा में एक एपिक नंबर ने हजारों पुलिसकर्मियों की रातों की नींद उड़ा रखी है। पुलिसकर्मियों ने दो दिन के भीतर अगर नंबर नहीं दिया तो उनका वेतन रोका जाएगा। एसएसपी आगरा ने आदेश जारी कर दिए हैं। हालांकि इस नंबर से पुलिसकर्मियों को पोस्टल वोट डालने की अनुमति ही मिल सकती है। इस कारण कई पुलिसकर्मी इसे राजनीति से प्रेरित आदेश मान रहे हैं।

चुनाव के दौरान पुलिस कर्मी चुनाव ड्यूटी के चलते अपना वोट नहीं डाल पाते थे। कुछ जिम्मेदार पुलिसकर्मी ही पोस्टल वोट के जरिये अपना मतदान करते थे। इस बार पुलिस विभाग में जिला स्तर पर आदेश जारी किए गए हैं कि पुलिसकर्मियों को अपने एपिक नंबर की जानकारी देनी है। एपिक नंबर न देने पर एसएसपी के द्वारा एक महीने के वेतन रोकने के आदेश जारी हो गए हैं। आचार संहिता के चलते अब नया वोटरकार्ड बनना और एपिक नंबर मिलना भी नामुमकिन नजर आ रहा है। अधिकांश पुलिसकर्मी दूसरे जिलों में ड्यूटी के चलते अधिकांश पुलिसकर्मी अपना वोटरकार्ड नहीं बनवा पाए हैं।

क्या होता है एपिक नंबर

बता दें कि वोटर कार्ड पर एक विशेष एपिक नंबर दर्ज होता है। पोस्टल वोट डालने के लिए चुनाव आयोग को यह नंबर उपलब्ध कराना जरूरी है। अधिकांश पुलिसकर्मियों ने आधार की वरीयता के चलते वोटर कार्ड पर ध्यान नहीं दिया और उनके सरकारी आईकार्ड के चलते उन्हें कभी कहीं भी वोटरकार्ड की जरूरत भी नहीं हुई।

आगरा एसएसपी ने दो दिन का दिया अल्टीमेटम

आगरा के एसएसपी सुधीर कुमार ने समस्त कर्मचारियों से एपिक नंबर उपलब्ध कराने के आदेश जारी किए थे। नंबर उपलब्ध न होने पर एसएसपी ने लिखित में आदेश जारी करते हुए दो दिन में नंबर न उपलब्ध करवाने वाले पुलिसकर्मियों का इस महीने का वेतन रोकने के आदेश दे दिए हैं। इस आदेश के बाद आगरा में तैनात हजारों पुलिसकर्मियों की नींद उड़ गई है।

पुलिसकर्मी मान रहे राजनीति

वर्तमान में आचार संहिता लागू होने के बाद पुलिसकर्मियों को छुट्टी भी नही मिल रही है और न ही वो कहीं भी जाकर वोटर कार्ड बनवा सकते हैं। एसएसपी के इस आदेश के बाद पुलिसकर्मियों को काफी तनाव से गुजरना पड़ रहा है। नाम न छापने की शर्त पर एक दरोगा ने बताया की सरकार जानबूझकर वोटों की लालच में अपने जोर से यह तालिबानी डेढ़ जारी कर रही है। पुलिस को अब वोट न देने पर भी कार्रवाई का शिकार होना पड़ रहा है। किसी अन्य पर यह नियम लागू क्यों नही होता है।