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आगरा में प्रत्याशियों को विपक्षियों से ज्यादा बंदरों का डर:हर प्रत्याशी के साथ हुई लूट, पलक झपकते ही छीन लेते हैं फूलों की माला

आगराएक वर्ष पहले
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जिला मुख्यालय पर प्रत्याशी की माला छीनकर भागता बंदर। - Dainik Bhaskar
जिला मुख्यालय पर प्रत्याशी की माला छीनकर भागता बंदर।

यूपी विधानसभा चुनाव के पहले चरण के नामांकन शुक्रवार को समाप्त हो गए। ताजनगरी आगरा में नामांकन करने आए हर प्रत्याशी को बंदरों ने खूब छकाया। गले में माला देखते ही बंदर दबे पांव आए और प्रत्याशी के गले की माला छीन ले गए। शायद ही कोई प्रत्याशी ऐसा बचा हो, जिसे बंदरों की इस माला लूट का शिकार न होना पड़ा हो। अधिकांश प्रत्याशी के समर्थक माला लूटने बाद हनुमान जी का आशीर्वाद बता कर प्रत्याशी को खुश करते दिखे।

प्रत्याशी कपिल गौतम से माला छीनता बंदर।
प्रत्याशी कपिल गौतम से माला छीनता बंदर।

जिला मुख्यालय पर नामांकन प्रक्रिया के दौरान सभी प्रत्याशी गले मे फूलों की माला डालकर आते हैं। लोग माला से ही पहचानते हैं कि प्रत्याशी कौन है। जिला मुख्यालय में बंदरों का जबरदस्त आतंक है। कोई भी व्यक्ति यहां खुले में कुछ खा नहीं सकता है। बैग में खाना रखा होने पर बंदर उसे भी छीन ले जाते हैं। बीते आठ दिनों से नामांकन के चलते मुख्यालय में चयनित लोगों को ही प्रवेश मिलता है।

इस कारण बंदरों को भोजन का कोई सामान नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते बंदरों की नजर माला पहनकर आए प्रत्याशियों पर रहती है। कोई प्रत्याशी थोड़ी बहुत माला बचा लेता है, तो कई प्रत्याशी खुद ही माला बंदरों को दे देता है। प्रत्याशियों के साथ आए समर्थकों को भी इसके लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। दैनिक भास्कर के संवाददाता ने नामांकन के आखिरी दिन बंदरों की इस माला लूट को कैमरे में कैद किया है।

माला देखते ही लूटने आ गए बंदर।
माला देखते ही लूटने आ गए बंदर।

पूरे शहर में है आतंक

आगरा में बंदरों के आतंक की कहानी कोई नई नहीं हैं। शहर का हर हिस्सा बंदरों के आतंक से परेशान है। आगरा में बंदर लूट, हत्या जैसे अपराध भी कर चुके हैं। खासकर घटिया, माइथान, बेलनगंज, बालू गंज, छीपीटोला, किनारी बाजार, नमक की मंडी, रावत पाड़ा, कलेक्ट्रेट, एसएन मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, रुनकता आदि जगहों पर बंदरों का आतंक है। छीपीटोला में बंदर चेन स्नेचिंग, डेढ़ लाख रुपए की लूट और हमला कर हत्या जैसी वारदातों को भी अंजाम दिया है।

समर्थकों को करनी पड़ती है मशक्क्त
समर्थकों को करनी पड़ती है मशक्क्त

लोग यूं करते हैं बचाव

आगरा के बेलनगंज, रावतपाड़ा, मनकामेश्वर मंदिर आदि क्षेत्रों में लोग घरों को जालियों से ढंक कर रखते हैं। एसएन मेडिकल कालेज, जिला अस्पताल और जिला मुख्यालय पर लोग बंदरों से बचाने के लिए गाड़ियों की सीट पर पत्थर रख कर जाते हैं। तमाम होटल, मैरिज होम और स्कूल बंदरों से बचाव के लिए महीने की तनख्वाह देकर मदारियों से लंगूर बुलाकर बिठाते हैं।

पूर्व में आगरा एसएसपी कार्यालय, रेलवे स्टेशनों और अन्य सरकारी जगहों पर भी लंगूरों की ड्यूटी लगाई गई थी। मगर, पीएफए और अन्य संस्थाओं के विरोध के चलते अब ऐसा नहीं हो पा रहा है। हालांकि, प्राइवेट संस्थान आज भी लंगूरों को तनख्वाह पर रखते हैं।