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  • In The Year 2010, Ravana Had Refused To Die Due To Controversy, After That Every Year The Police Put Him Under House Arrest, Playing The Role Of Ravana For Eight Generations.

आगरा का ये रावण फिर 'मरना' चाहता है:वर्ष 2010 में विवाद के चलते रावण ने मरने से कर दिया था इंकार, इसके बाद हर साल पुलिस कर देती है नजरबंद, आठ पीढ़ी से निभा रहे रावण का किरदार

आगरा:एक महीने पहले
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रामलीला में वर्ष 2010 में अंतिम बार रावण का किरदार निभाया था, लेकिन उस रामलीला में विवाद के कारण रावण वध की लीला नहीं हो पाई थी। - Dainik Bhaskar
रामलीला में वर्ष 2010 में अंतिम बार रावण का किरदार निभाया था, लेकिन उस रामलीला में विवाद के कारण रावण वध की लीला नहीं हो पाई थी।

दशहरा पर भगवान श्रीराम ने रावण का वध करके बुराई पर अच्छाई की जीत का पताका फहराया था। तब से हर साल दशहरा पर रामलीला में रावण वध की लीला का मंचन किया जाता है। मगर, आगरा की 400 साल पुरानी रामलीला के इतिहास में 11 साल पहले ऐसा भी हुआ था कि रावण ने मरने से इंकार कर दिया था। इसको लेकर काफी विवाद भी हुआ था। इसके बाद से रामलीला के रावण को हर साल घर में नजरबंद किया जाने लगा। इसकी टीस आज भी रावण के मन में है।

रावण का किरदार निभाने वाले वीरेंद्र उर्फ राजू रावण की आठ पीढ़ी रामलीला से जुड़ी हैं।
रावण का किरदार निभाने वाले वीरेंद्र उर्फ राजू रावण की आठ पीढ़ी रामलीला से जुड़ी हैं।

आठ पीढ़ी से निभा रहे रावण का किरदार
उत्तर भारत की प्रमुख आगरा की रामलीला में रावण का किरदार निभाने वाले वीरेंद्र उर्फ राजू रावण की आठ पीढ़ी रामलीला से जुड़ी हैं। राजू रावण ने रामलीला में वर्ष 2010 में अंतिम बार रावण का किरदार निभाया था, लेकिन उस रामलीला में विवाद के कारण रावण वध की लीला नहीं हो पाई थी। रामलीला कमेटी से विवाद के चलते राजू रावण ने मरने से इंकार कर दिया था। इसको लेकर काफी विवाद भी हुआ था। राजू रावण को थाने के चक्कर तक लगाने पडे़ थे। राजू ने बताया कि आठ पीढ़ी से उनका परिवार रावण दल का किरदार निभाता आ रहा है। मगर, 2010 में उनके साथ गलत हुआ था। रावण वध के बिना ही लीला पूरा करा दी गई थी।

राजू रावण ने बताया कि रामलीला में अपमान के बाद उन्हें रामलीला से अलग कर दिया गया।
राजू रावण ने बताया कि रामलीला में अपमान के बाद उन्हें रामलीला से अलग कर दिया गया।

2011 से उठा रहे परेशानी
राजू रावण ने बताया कि रामलीला में अपमान के बाद उन्हें रामलीला से अलग कर दिया गया। इसके बाद से हर साल दशहरा पर उनके घर पर पुलिस का पहरा बैठा दिया जाता है। पुलिस उन्हें नजरबंद कर देती है। वह दो बार अपनी जमानत करवा चुके हैं। उन्होंने बताया कि वो परंपरा को जिंदा रखने के लिए रामलीला से जुडे़ हुए थे। रामलीला में रावण दल का पूरा खर्चा वह उठाते थे। हथियारों का रखरखाव से लेकर रावण की तेरहवी तक वो खुद करते थे। 100 साल से ज्यादा समय से उनका परिवार इस परंपरा का निर्वहन करता चला आ रहा है।

राजू बताते हैं कि उनके अंदर का रावण अभी मरा नहीं है। अगर उन्हें दोबारा मौका मिलता है तो वो मंच पर फिर से रावण का किरदार निभाने चाहते हैं।
राजू बताते हैं कि उनके अंदर का रावण अभी मरा नहीं है। अगर उन्हें दोबारा मौका मिलता है तो वो मंच पर फिर से रावण का किरदार निभाने चाहते हैं।

अभी भी जिंदा है रावण
राजू बताते हैं कि उनके अंदर का रावण अभी मरा नहीं है। अगर उन्हें दोबारा मौका मिलता है तो वो मंच पर फिर से रावण का किरदार निभाने चाहते हैं। दशहरा आते ही अखाडे़ के लोगों के मन का रावण हिलोरे मारने लगता है। वो चाहते हैं कि वो इस कला को कभी खत्म न होने दें। इस कला के चलते ही लोग उन्हें पहचानते हैं। इतना ही नहीं उनकी गली का नाम भी रावण वाली गली पड़ गया है। बस वो चाहते हैं कि आयोजक कलाकारों को सम्मान दें।

ये हैं रावण की आठ पीढ़ियां
उस्ताद कालीचरण
लिक्खी खलीफा
उस्ताद सांवलिया
प्यारे लाल
चौधरी सालिग्राम
नत्थी लाल (राजू के पिता )
उस्ताद लीला राम (राजू के चाचा )
वीरेंद्र उर्फ राजू

आगरा में होती है रावण की पूजा
जहां एक ओर दशहरा पर पूरे देश में रावण के पुतले दहन किए जाते हैं। वहीं,आगरा में सारस्वत समाज के लोग रावण की पूजा करते हैं। मुख्य आयोजक मदन मोहन शर्मा का कहना है कि रावण प्रकांड विद्वान, राजनीतिक और महादेव के सबसे बडे़ भक्त थे। हर साल रावण के पुतले जलाकर उनका अपमान किया जाता है।

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