ताजमहल पर आवारा कुत्तों का डेरा:आगरा में अधिकांश क्षेत्रवासी आवारा कुत्तों से परेशान, पर्यटन स्थलों पर डर रहे लोग, एंटी रैबीज वैक्सीन की कमी

आगरा4 महीने पहले
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ताजमहल परिसर में आवारा श्वानों का दिखना आम बात हो गयी है - Dainik Bhaskar
ताजमहल परिसर में आवारा श्वानों का दिखना आम बात हो गयी है

विश्व के सातवें अजूबे ताजमहल में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है। जिस ताजमहल में पेन पेंसिल तक ले जाने पर प्रतिबंध है, वहां आवारा कुत्ते आसानी से परिसर के अंदर घुस जाते हैं। पहले आवारा कुत्ते कई बार पर्यटकों को अपना शिकार भी बना चुके हैं। नगर निगम और पुरातत्व विभाग का इस ओर ध्यान नहीं है। मेयर नवीन जैन ने जानकारी न होने और कर्मचारियों की टीम भेजने की बात कही है।

पर्यटकों के आगे जाती है नकारात्मक छवि
पर्यटन स्थलों के आस-पास आवारा कुत्तों, बंदर और गौवंशो को देख पर्यटकों के अंदर आगरा की नकारात्मक छवि आती है और साथ ही साथ लोगों को दुर्घटना का भी डर लगता है। पहले कई बार ताजमहल पर कुत्ते और बंदरों के काटने से देसी और विदेशी पर्यटक घायल हो चुके हैं।

शहर में हर तरफ है परेशानी
बता दें, तहसील परिसर, एसएन मेडिकल कॉलेज, आवास विकास, वजीरपुरा, बेलनगंज में आवारा श्वानों की संख्या बहुत हो गई है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके अग्रवाल के अनुसार, रोजाना 50 के लगभग एंटी रेबीज के इंजेक्शन की वाइल इस्तेमाल हो रही हैं। एक इंजेक्शन में दो से तीन लोगों को शरीर के वजन के अनुसार डोज दी जाती है। रोजाना ओपीडी में 200 के लगभग लोगों को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं।

ताजमहल पर आवारा श्वान
ताजमहल पर आवारा श्वान

नगर निगम का है काम
आवारा श्वानों और गौवंशों को पकड़ने की जिम्मेदारी नगर निगम की है और इसके लिए अलग से टीमें बनी हुई हैं। प्रशिक्षित कर्मचारी श्वानों को बोरा डालकर पकड़ते हैं और शहर से दूर जंगलों में छोड़ते हैं और साथ ही साथ आवारा गौवंशो के लिए निगम द्वारा गौशालाएं बनाई गई हैं। मेयर नवीन जैन ने बताया कि टीम शहर में लगातार काम करती हैं। ताजमहल का मामला संज्ञान में नहीं आया है हम वहां टीम भेजेंगे। इसके साथ ही बंदरों को पकड़कर उन्हें जंगलों में छोड़ने के लिए वन विभाग से बातचीत भी की जा रही है।

वैक्सीन की काला बाजारी
एक तरफ स्वास्थ्य विभाग एन्टी रैबीज वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में होना बता रहा है तो दूसरी ओर लोग वैक्सीन न मिलने की शिकायत कर रहे हैं। जिला अस्पताल टीका लगवाने आये आकाश गोस्वामी ने बताया कि अस्पताल में इंजेक्शन नहीं मिला और हमें बाहर से लाने को कहा गया। जिला अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर गये तो वहां उनका नंबर नोट कर 400 रुपये ले लिए गए और जब तीन लोग हो गए तो इंजेक्शन दिया गया।

देहात क्षेत्रों में सीएचसी पर भी वैक्सीन की कमी है। पिनाहट क्षेत्र में डेंगू और संदिग्ध बुखार से पीड़ितों को देखने गये भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष श्याम भदौरिया ने सीएमओ अरुण कुमार से स्वास्थ्य केंद्रों पर एन्टी रैबीज इंजेक्शन काफी दिनों से न होने की शिकायत की है। श्याम भदौरिया के अनुसार इस बात की शिकायत वो जिलाधिकारी प्रभु नारायण से भी करेंगे।

आगरा किले की मुंडेर पर बैठा बंदर
आगरा किले की मुंडेर पर बैठा बंदर

सालाना 59 हजार की होती है मौत
WHO के आंकड़ों के अनुसार, हर साल दुनिया में रैबीज से 59 हजार के लगभग लोग रैबीज से मरते हैं। भारत में रैबीज से मरने वालों की संख्या लगभग 20 हजार सालाना है। यह बीमारी कुत्ता और बंदर के काटने से होती है। लोगों को इस मामले में वैक्सीन लगवाने में देर नहीं करनी चाहिए। हर वर्ष 28 सितंबर को जागरूकता के लिए विश्व रेबीज दिवस मनाया जाता है।

ताजमहल परिसर में घुमते हुए श्वान
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ताजमहल पर बंदरों का आतंक
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