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आगरा में साइबर ठगी के खिलाफ अभियान:पुलिस ने एक माह में एक करोड़ सात हजार वापस कराए, मगर अधिकांश मामलों में आरोपी हाथ नहीं लगे

आगरा2 महीने पहले
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आगरा मंडल के पूर्व आईजी ए सतीश गणेश द्वारा 20 मार्च 2020 को प्रदेश का तीसरा और मंडल का पहला साइबर थाना आगरा के पुलिस लाइन परिसर में शुरू कराया गया था। - Dainik Bhaskar
आगरा मंडल के पूर्व आईजी ए सतीश गणेश द्वारा 20 मार्च 2020 को प्रदेश का तीसरा और मंडल का पहला साइबर थाना आगरा के पुलिस लाइन परिसर में शुरू कराया गया था।

आगरा मंडल में पुलिस की साइबर सेल ने एक माह के अंदर साइबर ठगी के शिकार हुए पीड़ितों को 1 करोड़ से अधिक रुपए वापस दिलवाए हैं। इस दौरान अधिकतर मामलों में पुलिस साइबर अपराधियों तक पहुंचने में नाकाम रही है।

आगरा मंडल के पूर्व आईजी ए सतीश गणेश द्वारा 20 मार्च 2020 को प्रदेश का तीसरा और मंडल का पहला साइबर थाना आगरा के पुलिस लाइन परिसर में शुरू कराया गया था। इसके साथ ही मंडल के हर जिले में साइबर इकाइयों की तैनाती भी की गई थी। तत्कालीन एडीजी अजय आनंद द्वारा थाने का उद्घाटन किया गया था। साइबर सेल में तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा लगातार कई बड़े मामले खोले गए और लोगों की मदद की गई।

आईजी नवीन अरोड़ा के अनुसार इस समय साइबर क्राइम बहुत बढ़ गया है। साइबर टीम को लगातार विशेष निर्देश दिए जा रहे हैं। इसी क्रम में बीते जून माह में आगरा जिले में 8 लोगों की शिकायत पर 4 लाख 14 हजार 721 रुपए ठगों से वापस करवाए हैं। पूरे मंडल की हर इकाई द्वारा प्रयास करते हुए 23 पीड़ितों की शिकायत पर एक माह में 1 करोड़ 7 हजार 757 रुपए ठगी का शिकार हुए लोगों को वापस हुआ है।

नहीं हो पा रही साइबर ठगों पर कार्रवाई

आपको बता दें कि बीते कुछ माह से फेसबुक, वाट्सऐप हैक कर साइबर ठगी, वीडियो कॉलिंग में अश्लील वीडियो ऑटोप्ले कर क्लिप दिखा कर ब्लैकमेल करने, बैंक कर्मी बन लोगों से ओटीपी की जानकारी कर खाता साफ कर देने और हेलो गैंग द्वारा नौकरी और मसाज आदि लुभावने लालच देकर भारी संख्या में ठगी की गई। इनमें ज्यादातर मामलों में रकम छोटी होने पर शिकायत दर्ज नहीं हुई और जो शिकायतें आई हैं। उनमें भी आधा पैसा ही वापस आ पाया है।

चंद पैसों में डाटा की खरीद फरोख्त है साइबर क्राइम का आधार

आईटी एक्सपर्ट यश के अनुसार तमाम जॉब साइट, मोबाइल कंपनियां और बैंक के कर्मचारी चुपचाप लोगों का डाटा साइबर ठगों को बेच देते हैं। साइबर ठग इन डाटा के आधार पर लोगों को बेवकूफ बनाकर उन्हें ठगते हैं। सप्ताह भर पूर्व आगरा में तीन युवक गिरफ्तार हुए हैं जो विदेशों में लोगों का डाटा खरीदकर विदेशियों को लोन के नाम पर ठगते थे। बीते दो वर्ष में दर्जन भर से अधिक कार्यवाही में पकड़े गए हेलो गैंग के सदस्यों के पास भी डाटा खरीदकर ठगी करने के मामले सामने आए हैं।

इसलिए नहीं हो पाती कार्यवाही

आईटी एक्सपर्ट यश के मुताबिक ज्यादातर ठग दूसरे प्रदेशों और यहां तक कि विदेश में बैठ कर ठगी करते हैं। इनके द्वारा जारी नम्बर और बैंक खाते भी अलग लोगों के होते हैं। जिन्हें जल्दी ही बदल दिया जाता है। दूरी के चलते अधिकतर कार्यवाही में शिथिलता आ जाती है।

जल्दी मिले शिकायत तो ही हो पाती है धनवापसी

आईजी नवीन अरोड़ा के अनुसार साइबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल अगर साइबर पुलिस को जानकारी दे दें तो पैसे वापस मिलने के चांस रहते हैं। जब तक ठग के खाते में डिजिटल रूप में पैसा होता है,तब तक साइबर टीम वो पैसा वापस करवा सकती है। हमारी टीम सर्विलांस और अन्य तरीकों से आरोपियों को पकड़ने के प्रयास करती है।टीम को और अधिक तेजी से वर्किंग के निर्देश दिए गए हैं।कई मामलों के खुलासे भी पुलिस द्वारा लगातार किये जा रहे हैं।

एसएसपी, एडीजी समेत तमाम रसूखदारों के सोशल अकाउंट हो चुके हैक

सिर्फ आगरा में ही पूर्व एसएसपी बबलू कुमार,वर्तमान एडीजी राजीव कृष्ण ,दो सीओ ,दर्जन से अधिक राजनेता और तमाम पत्रकारों व समाजसेवियों की सोशल अकाउंट की आईडी भी हैक हो चुकी है और कई बार फेक सोशल अकाउंट बनाकर लोगों से पैसे भी मांगे गए हैं।

यह है ठगी से बचाव के तरीके

आईटी एक्सपर्ट के अनुसार ठगी से बचाव के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

वॉट्सऐप पर सेटिंग में जाकर अगर आप टू स्टेप वैरिफिकेशन लगा लें तो हैकर आपका अकाउंट हैक नहीं कर पायेगा।

इसी तरह फेसबुक आईडी पर भी आप लगीं पर ओटीपी का ऑप्शन ले सकते हैं।

किसी भी कीमत पर नेटबैंकिंग और यूपीआई मनी ट्रांसफर की ऐप्स का पासवर्ड किसी को नहीं बताना चाहिए और अगर कोई बैंक कर्मी बन कर आपसे आपके बैंक खाते की जानकारी पूछे तो आपको साझा नहीं करना चाहिए।

यह हैं कुछ खास मामले, जिनके पैसे हुए वापस

1- फिरोजाबाद निवासी अनम द्वारा अस्पताल में नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी कर 50 हजार ऐंठने वालों से पूरी धन वापसी।

2-थाना सदर क्षेत्र में शिल्पी सिंह नामक महिला से उसकी दोस्त का सचिव बनकर तत्काल जरूरत के नाम पर 70 हजार ऐंठने के मामले में पूरी धन वापसी।

3- सदर क्ष्रेत्र निवासी प्रवीण साहनी से क्रेडिटकार्ड अपडेट करने के नाम पर 1लाख 35 हजार ठगी मामले में 52 हजार वापसी और शेष के लिए इवालेट कंपनियों से पत्राचार जारी

4-शाहगंज केदारनगर निवासी से गूगल पर एक्सिस बैंक के कस्टमर केयर का नकली नम्बर डालकर बातचीत पर ढाई लाख रुपये ऐंठने के प्रकरण में 1 लाख की धनवापसी।

5-मिलिट्री अस्पताल की लेखा नामक महिला से फोन पर क्रेडिट कार्ड की जानकारी लेकर 1 लाख 7 हजार की ठगी के प्रकरण में 50 हजार की वापसी।

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