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पैसे के अभाव में दम तोड़ती जिंदगी:जिंदगी भर उठाया लोगों का मैला , बुढ़ापे में इलाज के अभाव में बुजुर्ग रमाबेटी काट रहीं दिन

आगरा17 दिन पहले
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आगरा के इरादतनगर निवासी रमाबेटी 5 माह से इलाज के अभाव में बिस्तर पर हैं। - Dainik Bhaskar
आगरा के इरादतनगर निवासी रमाबेटी 5 माह से इलाज के अभाव में बिस्तर पर हैं।

आगरा के कस्बा इरादतनगर में धन के अभाव में 64 वर्षीय बुजुर्ग महिला सफाईकर्मी 5 महीने से बिस्तर पर अपनी आख़िरी घड़ियां गिन रहीं हैं। मजबूर बेटी बेटे घर पर ही उसका ख्याल रख रहे हैं। मजबूर परिवार लोगों से मदद की गुहार लगा रहा है। स्थानीय निवासियों के आग्रह पर बीते 20 वर्षों से अधिक समय से बिना किसी तनख्वाह के वर्षों से इरादतनगर कस्बे की गंदगी और गलियों ओर मोहल्लों की सफाई की जिम्मेदारी संभालते हुए बीमारी ने घेर लिया। एक साल जमा पूंजी से इलाज करवाया लेकिन इलाज सफल नही हुआ और पैसे के अभाव में बीते 5 महीने से रमाबेटी अपने ही घर मे किसी मददगार की राह देखते हुए इलाज के लिए उम्मीद लगाए हैं।

जानकारी के मुताबिक रमाबेटी पत्नी रमेश चंद्र इरादतनगर के बाल्मीकि बस्ती में रहती है। स्थानीय लोगों के कहने पर बीते 2 दशक से केवल भोजन और चंद रुपये में गली मोहल्लों में सफाई का काम करती थी। लोगों के घरों के शौचालय का मैला उठाने से लेकर सड़कों की सफाई का काम करने में उसका पूरा दिन गुजर जाता था। 8 महीने पूर्व सफाई के दौरान रीढ़ की हड्डी में दर्द हुआ तो सरकारी अस्पताल से इलाज करवाया। धीरे - धीरे दर्द बढ़ता गया और चलने फिरने में असमर्थ हो गयीं। इलाज के लिए परिवार ग्वालियर के निजी अस्पताल में ले गया जहां डाक्टरों ने रीढ़ की हड्डी में मवाद आने की जानकारी दी। तीन महीने इलाज में जमा पूंजी ख़त्म हो गयी। मजबूरन लौट कर घर आना पड़ा और पिछले 5 महीनों से चारपाई पर इलाज के अभाव में धीरे - धीरे दम तोड़ रहीं है ।

उम्मीद हार चूका है परिवार

बेटी अंजनी ने बताया की मां को रीढ़ की हड्डी में मवाद ओर पानी भरने की वजह से काफी दिक्कत थी। काफी इलाज करवाया कई महंगी रिपोर्ट्स हुई ओर अंत मे लाखों रुपये खर्च कर ऑपेरशन की बात कही गयी। पैसे और इलाज के अभाव में लौट कर घर आना पड़ा। परिवार के मौजूदा लोग उम्मीद हार कर ही घर पर ही सेवा करने में जुटे हुए है

मदद की आस में है परिवार

रमाबेटी के परिवार की स्थित बहुत नाजुक है दो बेटे और दो बेटियां है,एक बेटे और बेटी की शादी हो गयी है। पूरा परिवार कमजोर आर्थिक स्थिति में सालों से गुजारा कर रहा है। बच्चों का भरण पोषण और बेटियों की शादी कस्बे भर की सफाई से आई हुई आमदनी से हुए हुई थोड़ी बहुत जमा पूंजी से घर का खर्चा इलाज हुआ। बीते 5 महीने से रामबेटी अपने इलाज के अभाव धीरे - धीरे दम तोड़ रही है। न वो बिस्तर से उठ सकती हैं और न चल सकती है। जो भी सामने आता है ,उससे हाथ जोड़ कर मदद की गुहार लगाती हैं।