आरटीओ की टीम ने जांची स्कूल बसों की फिटनेस:आगरा में धूप में बच्चों भरी बसों को रोका; अभिभावक बोले- बच्चों को घर छोड़ने के बाद हो चेकिंग

आगरा3 महीने पहले
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आरटीओ टीम द्वारा चेकिंग के दौरान बच्चे गर्मी से परेशान  हो गए। - Dainik Bhaskar
आरटीओ टीम द्वारा चेकिंग के दौरान बच्चे गर्मी से परेशान हो गए।

आगरा में आरटीओ की टीम ने स्कूल बसों के कागज और फिटनेस चेक किया। दोपहर के समय की गई चेकिंग से गर्मी के कारण बच्चे परेशान हो गए। आगरा में प्राइवेट स्कूलों की संस्था 'अप्सा' ने इसका विरोध जताया है।

भगवान टाकीज और कई अन्य स्थानों पर बसों की चेकिंग की गई।
भगवान टाकीज और कई अन्य स्थानों पर बसों की चेकिंग की गई।

आगरा के दयालबाग क्षेत्र में प्रील्यूड स्कूल है। यहां प्रील्यूड में 9 बसें हैं। ये बसें बच्चों को स्कूल लाने और घर छोड़ने का काम करती हैं। शनिवार दोपहर 1 बजे स्कूल की छुट्टी के बाद बसें बच्चों को लेकर निकलीं, तो रास्ते में आरटीओ प्रवर्तन दल ने बसों को रोक लिया और चेकिंग शुरू कर दी। ड्राइवर, कंडक्टर और कुछ अभिभावकों ने बच्चों को घर छोड़ने के बाद बसों की चेकिंग करने की अपील की, पर आरटीओ टीम नहीं मानी। काफी देर तक भीषण गर्मी में बच्चे सड़क पर रुके रहे। आरटीओ से इस संबंध में बात का प्रयास किया गया, पर उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।

बसों के सभी कागजात पूरे थे, इसलिए उन्हें छोड़ दिया गया।
बसों के सभी कागजात पूरे थे, इसलिए उन्हें छोड़ दिया गया।

अप्सा ने किया विरोध

अप्सा के अध्यक्ष और प्रील्यूड स्कूल के एमडी सुशील गुप्ता ने बताया कि आज आरटीओ की टीम ने भगवान टाकीज और कई अन्य स्थानों पर बसों की चेकिंग की गई। बसों के सभी कागजात पूरे थे, इसलिए उन्हें छोड़ दिया गया। हम समझते हैं कि मोदीनगर में हुई घटना के बाद बसों की चेकिंग जरूरी है। मगर, हमारी परिवहन विभाग से यह विनती है कि जब बच्चे इस गर्मी में बस में बैठे हुए हों, तो बसों के स्कूल वापस आने पर उनकी चेकिंग की जाए। इसके अलावा हर स्कूल के अंदर ही बस की चेकिंग की जाए। क्योंकि स्कूल से घर जाते समय बसों की चेकिंग के दौरान जो समय लगता है, उस दौरान बस स्टॉप पर खड़े अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

अप्सा से जुड़े हर स्कूल की बसें हैं फिट

सुशील गुप्ता ने बताया की हमने सभी अप्सा के स्कूलों को निर्देशित किया है कि बिना फिटनेस के कोई बस न चलाई जाए। निर्देश दिए गए हैं कि अगर बस की खिड़कियों पर दो पाइप लगे हैं, तो उनकी जगह चार पाइप लगा दिए जाएं। इससे कोई भी बच्चा बस की खिड़की से गर्दन बाहर न निकाल सके और मोदीनगर जैसी घटना न हो। स्कूलों को यह भी निर्देश दिए हैं कि जो बच्चे अभी बस सुविधा नहीं ले रहे हैं, उनके साथ कोई जबरदस्ती न की जाए। बस को स्कूल में पार्किंग इंश्योरेंस के साथ खड़ा किया जाए। बस से संबंधित सभी कागजात परिवहन विभाग में जमा कर दिए जाएं।

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