मुगलों ने किया दफन, तो कब्र फोड़कर निकले भगवान:नाथ संप्रदाय का मंदिर जहां माता की गोद में हैं भैरवनाथ, औरंगजेब ने बनवाया था द्वार

आगरा10 दिन पहले
माता आनंदी की गोद में विराजमान हैं बाबा भैरवनाथ।

पूरे प्रदेश में इस समय मंदिर और मस्जिद को लेकर कई विवाद चल रहे हैं। बनारस की ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि और आगरा के ताजमहल को मुगलों द्वारा तोड़ा गया मंदिर बताया जा रहा है। इन सबके बीच में हम बात कर रहे हैं आगरा के श्री आंनदी भैरवनाथ मंदिर की। यहां की मान्यता है कि मुगल बादशाह औरजंगजेब ने यहां आंनदी माता और भैरव नाथ की प्रतिमा को दफन कर दिया था और भगवान कब्र को फोड़कर बाहर निकल आए थे। इसके बाद मंदिर का गेट मुगलों ने बनवाया था।

मान्यता है कि मंदिर में भैरोनाथ के दर्शन करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है। बड़ी संख्या में यहां लोग दर्शन के लिए आते हैं।
मान्यता है कि मंदिर में भैरोनाथ के दर्शन करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है। बड़ी संख्या में यहां लोग दर्शन के लिए आते हैं।

आगरा के केंद्रीय हिंदी संस्थान रोड से मऊ रोड के मार्ग पर 1000 वर्षों से अधिक पुराना श्री आंनदी भैरव नाथ मंदिर है। मंदिर के महंत नाथ संप्रदाय के योगी निर्वरताई महाराज के अनुसार, यहां भगवान परशुराम के पिता जमदग्नि ने शिवलिंग की स्थापना की थी। मंदिर का निर्माण और माता आंनदी और बाबा भैरव नाथ की प्रतिमा की स्थापना विक्रमादित्य ने की थी, जिनके नाम से विक्रम संवत चलता है।

उनके भाई उज्जैन के राजा भर्तहरी और उनके भांजे गोपीचंद थे। मान्यता है कि इस मंदिर में पूजन से लोगों को कर्ज से मुक्ति मिलती है और जीवन में आंनद की प्राप्ति होती है। यह इकलौता मंदिर है, जहां माता की गोद में बाबा भैरव बैठे हुए हैं। यहां हमारे गुरु बाबा शिव सुंदर दास जी की समाधि है। वो पहले ऐसे योगी थे जो अपने योग और सिद्धि के बल पर सशरीर गोलोक गए थे।

भगवान परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि ने मंदिर में शिवलिंग की स्थापना की थी।
भगवान परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि ने मंदिर में शिवलिंग की स्थापना की थी।

औरजंगजेब ने किया था दफन

योगी निर्वताई जी महाराज के अनुसार, औरजंगजेब ने मंदिर तुड़वाने शुरू किए थे, तो यहां भी हमला किया था। माता और बाबा भैरव की प्रतिमा को यहीं दफन कर दिया था। मगर, बाबा भैरव नाथ माता के साथ कब्र तोड़कर बाहर आ गए। इसकी बनावट से भी यह साफ दिखाई देता है कि प्रतिमा के नीचे कब्र बनी हुई है। मुगल चमत्कार देखकर ही पीछे हटते थे।

बाबा के बाहर आते ही मुगलों पर ततैया का हमला हुआ और उन्हें भागना पड़ा। इसके बाद औरंगजेब ने मंदिर के गेट और बाबा के कक्ष को बनवाया। सिकंदरा मकबरे को बनवाने से पहले लालकिले के पत्थरों से यह गेट बना था।

मुगलों ने हार के बाद अपनी गलती को स्वीकार करते हुए मंदिर का गेट लाल पत्थरों से फिर से बनवाया था।
मुगलों ने हार के बाद अपनी गलती को स्वीकार करते हुए मंदिर का गेट लाल पत्थरों से फिर से बनवाया था।

कभी 360 मंदिर थे, आज 52 बचे

योगी निर्वताई के अनुसार, आगरा में भगवान भैरवनाथ के 360 मंदिर हुआ करते थे। कई पर कब्जे हो गए। मुगलों ने कई मंदिरों को तोड़ दिया और आज 52 प्राचीन भैरव मंदिर ही शहर में बचे हैं। इनमें बाई पुर में गोरक्ष भैरव, अष्टमात्र भैरव, अंग्रेजों द्वारा नाम रखे गए लॉर्ड भैरव, कंकाल भैरव, काल भैरव आदि प्रमुख हैं।

भैरवनाथ मंदिर के कक्ष की बनावट मुगलिया है और प्रतिमा के नीचे मजार भी बनी देखी जा सकती है।
भैरवनाथ मंदिर के कक्ष की बनावट मुगलिया है और प्रतिमा के नीचे मजार भी बनी देखी जा सकती है।

योगी जी हैं मठ के अध्यक्ष

नाथ संप्रदाय के ट्रस्ट योगी महासभा के अध्यक्ष इस मंदिर मठ के अध्यक्ष होते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दादा गुरु दिग्विजयनाथ, उनके गुरु बाबा अवैद्यनाथ और अब खुद योगी आदित्यनाथ अध्यक्ष हैं। योगी निर्वताई महाराज के अनुसार, सांसद रहते हुए वो मंदिर में आ चुके हैं।