जेंडर जस्टिस पर जजों का संवेदीकरण:हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बोले, पीड़ितों को लैंगिक न्याय के संबंध में संवेदनशील करने की जरूरत

आगरा17 दिन पहले
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जेपी सभागार में आयोजित गोष्ठी में मौजूद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेश बिंदल, न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति सुनीत कुमार। - Dainik Bhaskar
जेपी सभागार में आयोजित गोष्ठी में मौजूद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेश बिंदल, न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति सुनीत कुमार।

इलाहाबाद हाईकोर्ट चीफ जस्टिस राजेश बिंदल ने यहां विश्वविद्यालय जेपी सभागार में रविवार को संगोष्ठी में शिरकत की। उन्होंने जजों से कहा कि लैंगिक अपराधों से पीड़ित दिव्यांग व्यक्तियों को लैंगिक न्याय के संबंध में संवेदनशील करने की जरूरत है। संगोष्ठी का आयोजन हाईकोर्ट के निर्देश पर न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान उत्तर प्रदेश, लखनऊ द्वारा किया गया। विषय था "Sensitization of District Court Judges on Gender Justice and Differently Abled"। चीफ जस्टिस ने जजों से कहा कि पुराने केसों की सुनवाई कर शीघ्र निस्तारित करें। न्यायमूर्ति देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने लैंगिक अपराधों के मामलों के दृष्टिकोण पर विचार व्यक्त किए। इस मौके पर न्यायमूर्तिगण विवेक चौधरी, अजय भनोट, जसप्रीत सिंह, योगेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, मोहम्मद फैज आलम खान, सरोज यादव, नरेन्द्र कुमार जौहरी उपस्थित रहे।

आगरा और अलीगढ़ मंडल के न्यायिक अधिकारी संगोष्ठी में हुए शामिल।
आगरा और अलीगढ़ मंडल के न्यायिक अधिकारी संगोष्ठी में हुए शामिल।

आगरा-अलीगढ़ मंडल के 7 जनपदों से न्यायिक अधिकारी हुए सम्मिलित
विशेषज्ञों के रूप में डॉ. सोना दीक्षित, डॉ. पीयूष जैन, डॉ. विशाल सिन्हा और डॉ. ज्ञानेन्द्र कुमार ने लैंगिग अपराधों से संबंधित पीड़िता की मनःस्थिति पर विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी में आगरा, अलीगढ़, मथुरा, एटा, हाथरस, मैनपुरी और फिरोजाबाद के सभी न्यायिक अधिकारीगण सम्मिलित हुए।

प्रति कुलपति प्रो. अजय तनेजा, प्रोफेसर व विधि संकाय के अनुसंधान के छात्र एवं छात्राओं ने भी प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में पुलिस, प्रशासन एवं अभियोजन विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण भी उपस्थित रहे। संगोष्ठी का आयोजन जिला एवं सत्र न्यायाधीश विवेक संगल तथा नोडल अधिकारी एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मोहम्मद राशिद की देखरेख में सम्पन्न हुआ।