आगरा में एसिड की बिक्री पर ग्राउंड रिपोर्ट:खुलेआम गली-गली बेचा जा रहा तेजाब, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का नहीं हो रहा पालन, आरटीआई में नहीं मिलता जवाब

आगराएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
आगरा के शीरोज हैंग आउट कैफे की एसिड अटैक सर्वाइवर्स ने लोगों से एसिड न बेचने की अपील की है। - Dainik Bhaskar
आगरा के शीरोज हैंग आउट कैफे की एसिड अटैक सर्वाइवर्स ने लोगों से एसिड न बेचने की अपील की है।

आगरा में तेजाब की खुलेआम बिक्री हो रही है। साल 2015 में एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसिड की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के आदेश का यहां आज तक पालन नहीं हो पाया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन बार जिलाधिकारियों को निर्देशित करने के बाद भी तेजाब की खुलेआम बिक्री पर कोई रोक नहीं लग पाई।

हर बार एसिड अटैक के बाद सवाल उठता है कि आखिर एसिड बाजार में बिकता ही क्यों हैं जो किसी का पूरा जीवन खराब कर देता है। गोरखपुर में युवक द्वारा पत्नी और बच्चों पर तेजाब डालने की घटना के बाद दैनिक भास्कर ने मामले की पड़ताल की। पढ़िए ये रिपोर्ट।

गली गली बिक रहा तेज़ाब
गली गली बिक रहा तेज़ाब

शहर में गली-गली बिक रहा तेजाब

सुप्रीम कोर्ट की ओर से आदेश दिए जाने के बाद भी आगरा में तेजाब की बिक्री लगातार जारी है। खंदारी क्षेत्र के अग्रवाल प्रोविजन स्टोर पर हमने जाकर तेजाब की बोतल मांगी तो बिना कहे मात्र 40 रुपए में एक बोतल तेजाब पकड़ा दिया गया। इसके बाद हमने नगला पदी स्थित कुशवाह जनरल स्टोर पर तेजाब की बोतल मांगी तो वहां भी तेजाब आसानी से मिल गया।

पश्चिमपुरी चौराहे के निकट एक दुकान पर जब तेजाब की बोतल मांगी तो उसने माल खत्म होने और 6 बजे तक आने की बात कही। यह मात्र चंद दुकानें हैं। आगरा के हर मोहल्ले में रोज की जरूरत का सामान बेचने वाली दुकानों पर तेजाब की बोतल आसानी से मिल जाती है। कैमिकल की दुकानों पर ब्रश बनाने, सुनारी का काम करने वाले लोग आसानी से बिना किसी लिखापढ़ी के तेजाब प्राप्त कर लेते हैं।

आगरा की एसिड अटैक सर्वाइवर्स
आगरा की एसिड अटैक सर्वाइवर्स

आरटीआई में नहीं मिला सही जवाब

तेजाब पीड़िताओं की तरफ से चलाए जाने वाले शिरोज कैफे की पहली शाखा ताजनगरी आगरा में खुली थी। कैफे खुलने के बाद देश-विदेश के लोगों ने तेजाब पीड़िताओं के पास आकर उनके दर्द को समझने की कोशिश की । आगरा के शिरोज कैफे में काम करने वाली तेजाब पीड़िताओं के दर्द को समझने के बाद छांव फाउंडेशन की टीम ने 2017- 18 में प्रदेश के विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों से आरटीआई के माध्यम से तेजाब बिक्री के आंकड़ों की जानकारी मांगी गई थी। आरटीआई के जवाबों में अधिकांश शहरों में तेजाब बिक्री का कोई रजिस्टर्ड विक्रेता न होने और इसका कोई आंकड़ा न होने की बात कही गई। कई जिलों में जिलाधिकारियों नेआरटीआई को दूसरे विभाग पर ट्रांसफर कर दिया गया। कहीं से भी कोई आंकड़ा नहीं मिला है।

जल्द अभियान चलने जा रही एसिड अटैक सर्वाइवर
जल्द अभियान चलने जा रही एसिड अटैक सर्वाइवर

आरटीआई के जवाब में कही गई थी ये बात

शिरोज हैंगआउट के डायरेक्टर आशीष के अनुसार आरटीआई की तरफ से कोई संतोषजनक जवाब हम लोगों को नहीं मिला है। फैजाबाद से उत्तर दिया गया कि घटना वाले दिन शहर में कोई पंजीकृत विक्रेता नहीं था। अमरोहा, संत कबीर नगर ने ऐसे सभी प्रश्नों के लिए कोई उचित उत्तर नहीं दिए। उनकी तरफ से ये कहा गया था कि ये चीजें उनसे संबंधित नहीं हैं और यहां कोई पंजीकृत विक्रेता नहीं हैं। बहराइच, बुलंदशहर, चित्रकूट से उत्तर दिया गया कि उन्हें यूपी के गृह विभाग से कोई दस्तावेज प्राप्त नहीं हुआ है, अवैध बिक्री के संबंध में कोई संज्ञान नहीं लिया गया है और अवैध बिक्री को नियंत्रित करने के लिए समय-समय पर विभिन्न दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

बांदा जिले से जवाब दिया गया कि पुलिस थानों से तेजाब की अवैध बिक्री के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है, जैसे ही यह अधिकारियों के पास पहुंचेगा, सूचना उपलब्ध करा दी जाएगी। लेकिन बाद में कोई जानकारी नहीं दी गई। प्रथम अपील भी की गई, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई। गाजियाबाद, बलिया, मुरादाबाद आगरा का जवाब था कि ऐसी सूचनाएं उपलब्ध नहीं हैं।

7 साल से लगा है प्रतिबंध

6 फरवरी 2015 को लक्ष्मी बनाम यूओआई का ऐतिहासिक फैसला आया। सुप्रीम कोर्ट ने एसिड की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में निर्देश दिया कि केंद्र और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश ज़हर अधिनियम, 1919 के तहत अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाने की दिशा में काम करेंगे। उन राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में, जहां एसिड और अन्य संक्षारक पदार्थों की बिक्री को विनियमित करने के नियम लागू नहीं होते हैं, जब तक कि ऐसे नियम बनाए और लागू नहीं किए जाते हैं, तेजाब की बिक्री प्रतिबंधित रहेगी।

इनका दर्द भी जानिये।
इनका दर्द भी जानिये।

तीन बार किया गया निर्देशित

11 मई 2015 को यूपी के सभी जिलाधिकारियों के साथ-साथ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी एसिड की बिक्री पर प्रतिबंध के संबंध में निर्देश जारी किया गया था। इसके बाद 13 जून 2016 को उत्तर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों के साथ-साथ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को इस प्रतिबंध के बारें में अवगत कराया गया था। 7 अप्रैल 2017 को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसिड की बिक्री के नियमों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश जारी किया गया। यह भी कहा गया कि विभिन्न जिलों में संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई उचित अनुपालन नहीं किया जा रहा था। इसलिए सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया था हर महीने की 7 तारीख तक गृह विभाग की वेबसाइट, फैक्स और ईमेल पर उचित डाटा उपलब्ध करा दें।

यह हैं सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

1- काउंटर पर, एसिड की बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित है, जब तक कि दुकानदार एसिड की बिक्री को रिकॉर्ड करने वाला एक रजिस्टर नहीं रखता है। उस रजिस्टर में उन व्यक्तियों का विवरण होगा, जिसे एसिड बेचा गया है और कितना बेचा गया इस बात का भी उल्लेख होगा।

2- सभी विक्रेता एसिड तभी बेचेंगे जब खरीदार ने सरकार द्वारा जारी एक फोटो आईडी (जिसमें व्यक्ति का पता भी हो) और वो एसिड खरीदने का कारण भी बताए।

3- एसिड के सभी स्टॉक विक्रेता एसडीएम के द्वारा आदेश के 15 दिनों के भीतर घोषित किए जाने चाहिए।

3- 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को कोई तेजाब नहीं बेचा जाएगा।

4- तेजाब के अघोषित स्टॉक के मामले में, संबंधित एसडीएम स्टॉक को जब्त करने के लिए खुला अधिकार होगा और वो ऐसे विक्रेता पर 50 हजार रुपए तक का जुर्माना लगा सकता है।

5- संबंधित एसडीएम तेजाब बिक्री के किसी भी निर्देश का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति पर 50 हजार रुपए तक का जुर्माना लगा सकता है।

आगरा के कुछ प्रमुख हादसे

आगरा में कई बार एसिड अटैक हो चुका है। इसके बाद भी अधिकांश मामलों में पुलिस तेजाब से जलाने की धमकी के मामले में संज्ञान में नहीं लेती है। पिछले महीने थाना एत्माउद्दौला क्षेत्र में जीजा ने मजाक मजाक में गलती से साले के चेहरे पर पानी की जगह तेजाब की बोतल उलट दी और उसकी आंखें खराब हो गईं। 2020 में धाकरान क्षेत्र में एक पायल बनाने वाले कारीगर ने गलती से तेजाब पी लिया और अभी तक उसका इलाज चल रहा है। 2019 में पूर्व ग्वालियर से आ रहे सोने का काम करने वाले युवक ने पब्जी खेलते समय गलती से पानी की जगह तेजाब पी लिया था। पहले कोरोना काल मे थाना हरीपर्वत क्षेत्र की में रहने वाली एक महिला नर्स ने लिव इन मे रह रहे कासगंज के रहने वाले युवक के ऊपर तेजाब डालकर उसे जला दिया। हमले में युवक की मौत हो गई। युवक की कुछ ही दिन बाद शादी थी।

खबरें और भी हैं...