आगरा विश्वविद्यालय 30 साल में भी नहीं दे सका उपाधि:शोधार्थी की 1991 में पूरी हुई थी पीएचडी, हक की लड़ाई में हो गई मौत, अब कोर्ट ने विश्वविद्यालय पर लगाया दो लाख का जुर्माना

आगरा:2 महीने पहले

आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में पीएचडी करने के बाद उपाधि प्राप्त करने के लिए एक शोधार्थी ने अपनी जिंदगी के 30 साल भागदौड़ में लगा दिए। उपाधि मिलने से पहले ही उनका निधन हो गया। अब उनके निधन के बाद लोक अदालत ने विश्वविद्यालय पर उपाधि न देने के एवज में दो लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।

वर्ष 1991 में पीएचडी, इसके बाद उपाधि के लिए संघर्ष
आगरा के आवास विकास कॉलोनी निवासी आनंद शंकर शर्मा ने वर्ष 1990 में गोरखपुर विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति डॉ. प्रतिभा अस्थाना के निर्देशन में वृदावंन के वैष्णव संप्रदायों का इतिहास में शोध पूरा किया था। इसके बाद आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के शोध विभाग में जमा कराया था।

इस शोध का मूल्यांकन और मौखिक परीक्षा के बाद 21 दिसंबर 1991 को कार्य परिषद की बैठक में उपाधि के लिए अलंकृत कर दिया गया था। इसके बाद शोधार्थी आनंद शंकर शर्मा उपाधि के लिए विश्वविद्यालय के चक्कर काटने लगे। चक्कर लगाते-लगाते शोधार्थी आनंद शंकर शर्मा परेशान हो गए, मगर उपाधि हासिल न कर सके।

2017 में आनंद शर्मा ने एक बार फिर उपाधि के लिए प्रयास शुरू किया। इस बार उन्होंने अपने अधिवक्ता लक्ष्मी चंद बंसल के माध्यम से विवि के कुलपति और कुलसचिव को लीगल नोटिस भेजा। मगर, इसका भी कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद वर्ष 2018 में फिर एक और नोटिस दिया। विवि की ओर से इस बार भी जवाब नहीं दिया गया।

शोधार्थी आनंद शंकर शर्मा ने विवि से 80 लाख रुपए का हर्जाना मांगा था।
शोधार्थी आनंद शंकर शर्मा ने विवि से 80 लाख रुपए का हर्जाना मांगा था।

कोविड काल में हो गया शोधार्थी का निधन
शोधार्थी आनंद शंकर ने सूचना का अधिकार के तहत भी जानकारी मांगी, लेकिन इसका भी कोई जवाब नहीं मिला। 2012 में उपाधि के लिए विवि में फीस भी जमा की। उपाधि के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने के दौरान कोरोना संक्रमण काल में शोधार्थी आनंद शंकर शर्मा का 60 साल की उम्र में इस साल अप्रैल में निधन हो गया। उपाधि के लिए 29 साल इंतजार और लड़ाई के बाद भी वह उपाधि प्राप्त नहीं कर सके। उनके निधन के बाद उनकी पत्नी डॉ. संगीता शर्मा ने इस लड़ाई को आगे बढ़ाया।

न्यायालय ने लगाया दो लाख का जुर्माना
विश्वविद्यालय की ओर से कोई जवाब न आने पर 21 सितंबर को लोक अदालत द्वारा एक पक्षीय निर्णय सुनाया गया। इसमें विश्वविद्यालय को मृतक आनंद कुमार शर्मा की पत्नी को क्षतिपूर्ति के लिए दो लाख रुपए देने का निर्णय दिया गया है। अगर 60 दिन में भुगतान नहीं किया गया तो इसके बाद विवि को छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देनी होगी। इतना ही नहीं विवि देरी के लिए जांच कराकर दोषी अधिकार या कर्मचारी से दो लाख रुपए की क्षतिपूर्ति कर सकेगा।

नहीं लग पाई नौकरी
शोधार्थी आनंद शंकर शर्मा द्वारा न्यायालय में दाखिल शपथ पत्र में कहा गया था कि उपाधि न मिलने के कारण वह डिग्री कॉलेज में नौकरी प्राप्त नहीं कर सके। ऐसे में उनको आर्थिक रूप से क्षति हुई। वे अपने परिवार का भरण पोषण भी सही तरीके से नहीं कर पाए। इसके लिए उन्होंने विवि से 80 लाख रुपए का हर्जाना मांगा था।

विवि में हजारों छात्र लगाते हैं डिग्री के लिए चक्कर
यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है। आंबेडकर विवि में हर दिन सैकड़ों छात्र डिग्री के लिए चक्कर लगाते हैं। विवि में करीब डेढ़ लाख छात्रों की डिग्री अटकी हुई हैं। इसमें बड़ी संख्या में ऐसे छात्र भी हैं जिन्हें डिग्री के लिए आवेदन किए कई साल हो गए। कई बार तो छात्र डिग्री और मार्कशीट के लिए आत्मदाह तक का प्रयास कर चुके हैं।

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