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टीम इंडिया में शामिल राहुल चाहर की कहानी:पिता बोले- बचपन में बड़े भाई को प्रैक्टिस करते हुए देखता था राहुल, तय किया इसे स्पिनर बनाएंगे

आगरा8 महीने पहलेलेखक: गौरव भारद्वाज
अपने बडे़ भाई दीपक को गेंदबाजी करते देख करीब आठ साल की उम्र में राहुल ने क्रिकेट खेलना शुरू किया था।

टी-20 विश्वकप का आगाज हो चुका है। लंबे समय बाद 24 अक्टूबर को भारत-पाकिस्तान के बीच भिड़ंत होनी है। इसके लिए क्रिकेट प्रेमी तैयार है। आगरा के क्रिकेट प्रेमियों के लिए विश्वकप और भी खास रहेगा, क्योंकि टीम इंडिया में आगरा के क्रिकेटर राहुल चाहर को भी स्थान दिया गया है। राहुल चाहर अपनी फिरकी पर विपक्षी टीम के खिलाड़ियों को मजा चखाते नजर आएंगे। मगर, कम लोगों को ही पता होगा कि राहुल भी अपने चचेरे भाई दीपक चाहर की तरह तेज गेंदबाज बनाना चाहते थे, लेकिन उनके कोच और ताऊजी ने उनकी खूबी को पहचाना। राहुल के पिता देशराज चाहर ने दैनिक भास्कर से बातचीत में राहुल के क्रिकेट के सफर के बारे में बताया।

अपने चचेरे भाई दीपक चाहर के साथ राहुल चाहर।
अपने चचेरे भाई दीपक चाहर के साथ राहुल चाहर।

दीपक को खेलते देख उठाई गेंद
राहुल चाहर टी-20 विश्वकप के लिए चुनी गई भारतीय टीम में शामिल हैं। उनके विश्वकप के लिए टीम में चुने जाने पर परिवार वाले खुश हैं। राहुल के पिता देशराज चाहर ने बताया कि राहुल के क्रिकेट की शुरुआत अपने बडे़ भाई दीपक को देखकर में हुई थी। उनके बडे़ भाई और दीपक के पिता लोकेंद्र चाहर दीपक को घर के सामने बालिंग प्रैक्टिस कराते थे। तब राहुल उन्हें बैठकर देखता था। करीब आठ साल की उम्र में राहुल ने दीपक को देखकर गेंद उठाई थी। इसके बाद उनके भाई लोकेंद्र चाहर ने उनसे कहा कि इसको भी क्रिकेट खिलाते हैं।

अपने परिवार के साथ राहुल चाहर।
अपने परिवार के साथ राहुल चाहर।

स्पीड थी कम तो स्पिन के बारे में सोचा
राहुले के पिता ने बताया कि राहुल ने दीपक के साथ खेलना शुरू कर दिया। मगर, राहुल की स्पीड दीपक से कम थी। ऐसे में स्पिन की तरफ सोचा। शुरू से राहुल की गेंद काफी टर्न लेती थीं। एक साल के बाद इसमें काफी इंप्रूवमेंट देखने को मिला। इसके बाद राहुल लगातार अच्छा करने लगा। लोकल मैचों में अच्छी परफार्मेंस आने लगी। इसके अलावा एक सोच यह भी थी कि दोनों को तेज गेंदबाज बनाने से घर में ही कंपटीशन होगा। आज एक तेज गेंदबाज तो दूसरा स्पिनर है। तभी तो दोनों टीम इंडिया में जगह बना पाए हैं। उन्होंने बताया कि जब राहुल छोटा था तब आगरा कॉलेज मैदान पर हुए मैच में राहुल ने 17 रन देकर तीन विकेट लिए थे। मैच में सीनियर खिलाड़ियों को आउट किया था। इसके बाद राहुल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

राहुल की स्पीड कम होने के कारण उनके कोच ने उन्हें स्पिनर के रूप में तराशना शुरू किया।
राहुल की स्पीड कम होने के कारण उनके कोच ने उन्हें स्पिनर के रूप में तराशना शुरू किया।

बेटे के लिए भरतपुर में लिया घर
उन्होंने बताया कि दीपक के राजस्थान की रणजी टीम में सलेक्शन के बाद राहुल ने भी प्रयास तेज कर दिए। ऐसे में उन्होंने बेटे के लिए भरतपुर में घर खरीदा। वो लोग भी वहां पर शिफ्ट हो गए। अपने प्रदर्शन के बल पर राहुल ने भी राजस्थान की रणजी टीम में जगह बना ली। राहुल ने सैयद मुश्ताक ट्राफी में मध्यप्रदेश के खिलाफ पांच विकेट लिए। इसके अलावा एक सीजन में रणजी में सात बार पांच विकेट लेकर वो सबकी नजरों में आए। इसके बाद आइपीएल में भी राहुल का शानदार प्रदर्शन जारी रहा।

घरवालों को उम्मीद, प्लेइंग इलेवन में मिलेगी जगह
राहुल के पिता का कहना है कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले मैच में राहुल को प्लेइंग इलेवन में मौका मिलेगा। अगर टीम में जगह मिलती है तो वह बेहतर प्रदर्शन करेगा। पूरा परिवार काफी उत्साहित है। राहुल से उनकी रोज बात होती है। उन्होंने कहा कि है वो बस अपना 100 फीसद देने के बारे में सोचे।

ये है राहुल के गेंदबाजी के आंकडे़
वनडे मैच - 1, विकेट-3
टी-20 इंटरनेशनल मैच - 5 विकेट- 7
आइपीएल मैच- 42 विकेट- 43
प्रथम श्रेणी मैच- 17 विकेट - 69