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संवेदनहीनता की पराकाष्ठा:मां का शव लेने के लिए तीन दिन से अस्पताल के चक्कर लगा रहा बेटा, आरोप- स्टाफ ने दाह संस्कार के लिए 8 हजार रुपए मांगे

अलीगढ़एक महीने पहले
शंकर अभी तक 8 हजार रुपए जुटा नहीं पाया है। उसने प्रशासन से गुहार लगाई है कि उसकी मां का शव उसे दिलाया जाए। 

कोरोना महामारी से जूझ रहे उत्तर प्रदेश में कहीं संक्रमितों को बेड नहीं मिल रहा है तो कहीं ऑक्सीजन की किल्लत है। लेकिन अलीगढ़ जिले में स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में एक ऐसा मामला सामने आया है, जो संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। यहां रहने वाले शंकर 30 अप्रैल से हर दिन सुबह से लेकर रात 11 बजे तक अस्पताल के बाहर इस आस में खड़े रहते हैं कि आज उनकी मां का शव उन्हें सौंप दिया जाएगा। लेकिन हर दिन निराशा हाथ लगती है।

शंकर का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने शव देने के लिए 8 हजार रुपए की डिमांड की है। ये रुपए शव के अंतिम संस्कार के लिए मांगे गए हैं। शंकर बेहद गरीब है। वह रुपए दे नहीं पा रहा है। न ही उसकी कोई सुनवाई हो रही है।

24 अप्रैल को पॉजिटिव, 6 दिन बाद मौत
क्वार्सी थाना क्षेत्र के बेगम बाग निवासी 80 साल की बीना घोष मूलत: कोलकाता की रहने वाली थीं। यहां गांधी आंख अस्पताल से रिटायर्ड कर्मी थीं। उनकी कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर 24 अप्रैल को दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती करवाया था। छह दिन बाद 30 अप्रैल की शाम करीब 6 बजे अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी। मृतक महिला के बेटे शंकर का आरोप है कि उस दौरान अस्पताल के एक कर्मचारी से उसकी मां का शव देने के लिए बात भी हुई तो उसने 8 हजार रुपए की मांग की थी। अस्पताल कर्मचारी के द्वारा बताया गया कि उन आठ हजार रुपयों से अंतिम संस्कार किया जाएगा।

रात 11 बजे तक अस्पताल के बाहर खड़ा रहता है बेटा

शंकर अभी तक 8 हजार रुपए जुटा नहीं पाया है। वह अपनी मां का शव लेने के लिए सुबह सात बजे ही अस्पताल पहुंच जाता है और रात के 11 तक बज तक इस आस में खड़ा रहता है कि किसी को उस पर तरस आ जाए। अस्पताल के कर्मचारी उसको कोविड-19 अस्पताल का हवाला देकर दूर-दूर रहने की बात कहकर मां के शव के पास नहीं जाने देते। उसने प्रशासन से गुहार लगाई है कि उसकी मां का शव उसे दिलाया जाए।

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