अलीगढ़ में दीवारों पर उकेरी भूख की दास्तां:15 दिनों तक भूख से तड़पते हुए रोता रहा पूरा परिवार, कभी मां तो कभी बच्चे एक-दूसरे को चुप कराते रहे; कोई सरकारी योजना काम न आई

अलीगढ़4 महीने पहले

लॉकडाउन से भुखमरी की कगार पर पहुंचे कई परिवारों के किस्से आपने सुने पढ़े होंगे। लेकिन यूपी के अलीगढ़ के नागला मंदिर क्षेत्र का रहने वाला एक छह सदस्यीय परिवार 15 दिन से घर में भूख से तड़पता मिला। रोटी का महत्व अगर आपको समझना है तो तीन साल पहले पिता की मौत से टूटा ये परिवार महामारी की वजह से लॉकडाउन में घर में लॉक भी हो गया और धीरे-धीरे डाउन भी हो गया।

पति की मौत से बेसहारा हुई गुड्‌डी देवी पांच बच्चों की मां हैं। कोरोना काल से पहले अलीगढ़ की एक फैक्टरी में ताला बनाने का काम करती थीं, उसे क्या पता था कि ये लॉकडाउन उसके परिवार की जिंदगी की तालाबंदी ही कर देगी। नौकरी छूट गई, बेरोजगार हो गई, और दाने-दाने की मोहताज हो गई।

पूरा परिवार 15 दिन से घर में पानी के सहारे जिंदा था। रोटी का कोई इंतजाम नहीं। खुद्दारी ऐसी कि आसपास पड़ोस के लोगों से मदद के सहारे परिवार कुछ दिन चला, लेकिन आखिर कब तक रोज-रोज भीख मांगने से मां को शर्म भी आने लगी। इस पूरी दास्तां की कहानी का सबसे दर्दनाक और शर्मनाक पहलू ये है कि सरकार के किसी विभाग ने इनकी कोई सुध नहीं ली।

गुड्‌डी के बच्चों ने दुख भरे दिनों के दर्द को अपने घर की दीवारों पर उकेर कर दर्द का इजहार किया। इस परिवार के पड़ोस में रहने वाली उर्मिला देवी बताती हैं कि पहले घर से महिला के रोने की और बच्चों की मां को दिलासा दिलाने जैसी आवाजें सुनाई पड़ती थीं। बच्चे फिर भी भूख से लड़ रहे थे पर मां आखिर भूखे बच्चों के दर्द को कैसे सह पाती।

ये तस्वीरें आपको अलीगढ़ की सच्चाई बयां कर देंगी...

यह तस्वीर अलीगढ में उस परिवार की है जहां 6 सदस्यों का एक परिवार 15 दिनों से भूख से तड़पता रहा लेकिन अधिकारियों के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। भूख से बेहाल छोटे-छाटे बच्चों ने घर की दीवारों पर ऐसे चित्र उकेरकर अपना दर्द बयां किया।
यह तस्वीर अलीगढ में उस परिवार की है जहां 6 सदस्यों का एक परिवार 15 दिनों से भूख से तड़पता रहा लेकिन अधिकारियों के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। भूख से बेहाल छोटे-छाटे बच्चों ने घर की दीवारों पर ऐसे चित्र उकेरकर अपना दर्द बयां किया।
घर के भीतर का यह नजारा बता रहा है कि लॉकडाउन में घर के भीतर भोजन के आभाव में कैसे लोगों का जीवन मुहाल हो रहा था। छह सदस्यीय परिवार की मुखिया एक महिला थीं और वह अपने बच्चों को दिलासा देती रहीं कि जल्द ही उन्हें भोजन का निवाला मिलने वाला है।
घर के भीतर का यह नजारा बता रहा है कि लॉकडाउन में घर के भीतर भोजन के आभाव में कैसे लोगों का जीवन मुहाल हो रहा था। छह सदस्यीय परिवार की मुखिया एक महिला थीं और वह अपने बच्चों को दिलासा देती रहीं कि जल्द ही उन्हें भोजन का निवाला मिलने वाला है।
घर में बर्तन तो थे लेकिन खाने के लिए भोजन नहीं था। आसपास के लोगों की माने तो भूख से बिलखते बच्चों की आवाजें बाहर तक सुनाई दे रहीं थीं। लेकिन घर के सभी सदस्य 15 दिनों तक केवल पानी पीकर ही जिंदा रहे।
घर में बर्तन तो थे लेकिन खाने के लिए भोजन नहीं था। आसपास के लोगों की माने तो भूख से बिलखते बच्चों की आवाजें बाहर तक सुनाई दे रहीं थीं। लेकिन घर के सभी सदस्य 15 दिनों तक केवल पानी पीकर ही जिंदा रहे।
बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इस परिवार के पड़ोस में रहने वाली उर्मिला देवी बताती हैं कि घर से महिला के रोने के और बच्चों की मां को दिलासा देने जैसी आवाजें सुनाई पड़ती थीं। जानकारी मिलने के बाद मौके पहुंचे अधिकारियों ने आनन फानन में बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया।
इस परिवार के पड़ोस में रहने वाली उर्मिला देवी बताती हैं कि घर से महिला के रोने के और बच्चों की मां को दिलासा देने जैसी आवाजें सुनाई पड़ती थीं। जानकारी मिलने के बाद मौके पहुंचे अधिकारियों ने आनन फानन में बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया।
मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने सभी बच्चो को अस्पताल में भर्ती कराया।
मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने सभी बच्चो को अस्पताल में भर्ती कराया।
तीन साल पहले पिता की मौत से टूटा ये परिवार महामारी की वजह से लॉकडाउन में घर में लॉक भी हो गया था।
तीन साल पहले पिता की मौत से टूटा ये परिवार महामारी की वजह से लॉकडाउन में घर में लॉक भी हो गया था।
घर में खाना बनाने के बर्तन इधर उधर बिखरे पड़े थे। लेकिन घर में बच्चों के जीवन यापन के लिए एक दाना भी मौजूद नहीं था।
घर में खाना बनाने के बर्तन इधर उधर बिखरे पड़े थे। लेकिन घर में बच्चों के जीवन यापन के लिए एक दाना भी मौजूद नहीं था।
पति की मौत से बेसहारा हुई गुड्‌डी देवी पांच बच्चों की मां हैं। कोरोना काल से पहले अलीगढ़ की एक फैक्टरी में ताला बनाने का काम करती थीं। घर की हालत देखकर इसका अंदाजा तो लगाया जा सकता है कि एक अकेली महिला अपने बच्चों का पेट किस तरह पालती होंगी।
पति की मौत से बेसहारा हुई गुड्‌डी देवी पांच बच्चों की मां हैं। कोरोना काल से पहले अलीगढ़ की एक फैक्टरी में ताला बनाने का काम करती थीं। घर की हालत देखकर इसका अंदाजा तो लगाया जा सकता है कि एक अकेली महिला अपने बच्चों का पेट किस तरह पालती होंगी।
छह लोगों के भूख से तड़पने की जानकारी मिलने के बाद वहां मीडिया कर्मियों का भी तांता लग गया।
छह लोगों के भूख से तड़पने की जानकारी मिलने के बाद वहां मीडिया कर्मियों का भी तांता लग गया।
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