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गणेश उत्सव : घर घर पूजे जाएंगे गोबर के गणपति:अलीगढ़ में बिक रही बप्पा की इको फ्रेंडली प्रतिमा, गोबर से तैयार की गई मूर्तियां, तुलसी-गेंदा जैसे फूलों के मिलाए गए बीज, विजर्सन पर उगेंगे पौधे

अलीगढ़19 दिन पहले
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गोबर से तैयार की गई भगवान गणेश की इको फ्रेंडली मूर्तियां - Dainik Bhaskar
गोबर से तैयार की गई भगवान गणेश की इको फ्रेंडली मूर्तियां

अलीगढ़ में गणेश उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा और बप्पा अपने भक्तों के घर विराजेंगे। लेकिन पर्यावरण को बचाने के लिए इस साल गोबर से इको फ्रेंडली मूर्तियां तैयार की गई हैं, जिससे कि गणेश विसर्जन के दौरान जब बप्पा की विदाई हो तो यह मूर्तियां आसानी से धुल जाएं और पर्यावरण को नुकसान भी न पहुंचे। जिले में गोबर से बनी बप्पा की प्रतिमाओं का बाजार भी सज चुका है और लोग इसे पूरे उत्साह के साथ खरीदकर अपने घर लेकर जा रहे हैं।

हिंदू धर्म में गोबर को माना गया है पवित्र

ज्योतिषाचार्य व श्रीगुरु ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पंडित हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि गोबर को हिंदू धर्म में पवित्र माना गया है और हर पवित्र धार्मिक काम में इसका इस्तेमाल होता है। इसके अलावा इससे पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। दुकानदारों ने बताया कि इस साल के गणेश उत्सव के लिए विशेष तौर पर यह मूर्तियां मंगवाई गई हैं। लोगों में इन मूर्तियों के लिए विशेष उत्साह है और लोग पीओपी से बनी मूर्तियों के बजाय इन्हें पसंद कर रहे हैं। जिसके कारण बाजार में इनकी मांग सबसे ज्यादा बढ़ी हुई है।

घर में ही कर सकेंगे विसर्जित, उगेंगे पौधे

गोबर से तैयार की गई मूर्तियों में तुलसी, गेंदा, समेत विभिन्न फूलों के बीज भी मिलाए गए हैं। इसके साथ श्रद्धालुओं को बप्पा का आतिथ्य करने के बाद उन्हें नहर या नदी में जाकर विसर्जित करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वह इन मूर्तियों को अपने घर पर ही एक गमले में विसर्जित कर सकेंगे। जिसके बाद इसमें मिलाए गए बीजों से उसमें विभिन्न तरह के पौधे उग जाएंगे, जिससे लोगों को भी फायदा होगा और यह पर्यावरण के भी हित में होगा।

150 से 1000 रुपए तक की हैं मूर्तियां

मूर्तियों के थोक कारोबारी हर्षद अग्रवाल ने बताया कि गोबर से तैयार की गई गणपति की प्रतिमाओं के साथ ही सात प्रकार के अनाज से भी मूर्तियां तैयार की गई हैं। इसमें गेंहूं, जौ, बाजरा, ज्वार, उड़द दाल, मूंग दाल, अरहर की दाल का इस्तेमाल किया गया है। इन मूर्तियों की कीमत बाजार में 150 रुपए से लेकर 100 रुपए तक है जो मूर्तियों के साइज के अनुसार है। यह मूर्तिया अभी छोटे आकार में ही तैयार की गई हैं और इन्हें गुजरात से तैयार कराकर मंगवाया गया है। जिसके बाद अलीगढ़ के बाजार में इसे बेंचा जा रहा है।

पीओपी की मूर्तियां पर्यावरण के लिए नुकसान देह

आमतौर पर मूर्तियों को तैयार करने के लिए प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) का इस्तेमाल किया जाता है। यह मूर्तिया सस्ती भी पड़ती हैं, लेकिन यह पर्यावरण के लिए सबसे ज्यादा नुकसान देह भी होती हैं। 13 दिन का उत्सव मनाने के बाद जब इन मूर्तियों को नदी या नहर में विसर्जित किया जाता है तो यह घुलती नहीं है। इसके बाद इसमें मिले कैमिकल के कारण पानी भी जहरीला होता है, जिससे जलीय जीवों के साथ ही इस पानी को इस्तेमाल करने वालों को भी नुकसान होता है। ऐसे में गोबर व अनाज से तैयार की गई मूर्तियां भगवान के प्रति आस्था रखने वालों के लिए सबसे बेहतर विकल्प साबित हो रही हैं।

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