अलीगढ़ में 2 बंदर खा गए 70 बच्चों के कान:बच्चों के कान नोंचकर खा लेते हैं दोनों आदमखोर बंदर, घर के भीतर भी घुस आते हैं; कई बच्चों का एक ही कान बचा

अलीगढ़12 दिन पहले
अलीगढ़ के नगला मानसिंह इलाके में आदमखोर बंदरों से लोग इतना डरे हैं कि वह बच्चों को अकेले घर से बाहर नहीं निकलने देते हैं।

अलीगढ़ के नगला मानसिंह इलाके में दो बंदर 70 बच्चों के कान खा गए हैं। बच्चों को देखते ही ये उनके कान पर झपट्‌टा मारते हैं। क्षेत्र के हर घर का कोई न कोई बच्चा इन बंदरों का शिकार बना है। दोनों हमलावर बंदर साथ ही आते हैं। जैसे ही कोई बच्चा दिखा ये उसका कान नोंच लेते हैं। डर के कारण लोग अब अपने बच्चों को बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं। नगर निगम क्षेत्र में आने वाले इस इलाके का यह हाल हो चुका है कि यहां के ज्यादातर छोटे बच्चे एक कान वाले हो चुके हैं।

दोनों बंदर 11-12 साल की उम्र तक के बच्चों पर ही हमला करते हैं। बड़े बच्चों के हाथ या पैर को वह निशाना बनाते हैं। लेकिन छोटे बच्चे जिनको वह आसानी से दबोच लेते हैं, उनके यह सीधे कान पर ही हमला करते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो बंदर बच्चों को पकड़ने के बाद उनके कंधे पर बैठ जाते हैं और कान खा जाते हैं।

छोटे बच्चों के पास पहरा देते हैं परिजन
इलाके के लोगों ने बताया कि दोनों बंदर इतने निडर हो चुके हैं कि घर के अंदर भी घुस जाते हैं और अकेला देखकर बच्चों पर हमला कर देते हैं। इसलिए छोटे और नवजात बच्चों को लोग अब अकेला नहीं छोड़ रहे हैं। हर समय घर का कोई न कोई सदस्य लाठी डंडा लेकर उनके पास पहरा देता रहता है। लोगों ने यह भी बताया कि दोनों बंदर गांव में पिछले छह महीने से आ रहे हैं। लेकिन बीते तीन महीनों में इन दोनों का आतंक जबरदस्त बढ़ा है। हर दिन यह गांव के दो से तीन बच्चों पर हमला कर देते हैं।

पुलिस ने बंदर को मारने से रोका
बंदर के आतंक से परेशान हो चुके लोगों ने नगर निगम, प्रशासन, वन विभाग से लेकर पुलिस के पास तक गुहार लगाई है। लोगों ने बताया कि जब कोई अधिकारी सुनवाई करने नहीं आया तो फिर उन्होंने पुलिस से मदद मांगी। लेकिन जब उनके बच्चों की जान पर बन आई तो फिर उन्होंने बंदरों को जान से मारने का मन बना लिया। जिसके बाद पुलिस ने उन्हें यह कहकर रोक दिया कि अगर किसी ने बंदरों को मारा तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

डेढ़ दर्जन अब भी घायल, कुछ हो चुके ठीक
बंदरों के हमले के बाद लगभग डेढ़ दर्जन बच्चे ऐसे हैं जो अभी भी घायल हैं। इनके घावों में पट्‌टी हुई है और यह बंदर का नाम सुनकर भी खौफ में आ जाते हैं। इसमें कार्तिक (6) पुत्र दिनेश, रौनक (5) पुत्र दिनेश, हर्षिता (4) पुत्री अनिल कुमार, कौशल (10) पुत्र गुरुदयाल, अमित (13) पुत्र धर्मपाल, गोपाल (8) पुत्र महेंद्र सिंह, आयुष (7) पुत्र राजेंद्र कुमार, अन्नू (8) पुत्री बिन्नामी, मनीष (10) पुत्र ईश्वरी प्रसाद, विपिन (6) पुत्र जितेंद्र कुमार, शाहिल (11) पुत्र राजीव, सूरज (10) पुत्र श्योदान सिंह, दिनेश (8) पुत्र अर्जुन सिंह, मानव (6) पुत्र कालीचरण, वंश (6) पुत्री राधेश्याम, अतुल (4) पुत्र राजू, ऋतिक (9) पुत्र लाखन शामिल हैं।

जबकि बंदरों के हमले के बाद ठीक हो चुके बच्चों में करन (10), प्रिंस (7), कृष्णा (8), शानवी (4), परी (8), ध्रुव (5), मयंक (11), तनुज (13), अवि (5), सुमित (15), गुड्‌डू (7), मानसी (10), कंचन (6), छोटू (8), मोहित (9), मोहिनी (6) समेत बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे हैं जो बंदरों का शिकार हुए हैं।

जिम्मेदारियों को टालते दिखे अधिकारी
अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्ता से इस बारे में बात करने पर उन्होंने बताया कि बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी वन विभाग की है। लेकिन अभी यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है तो वन विभाग की सहायता से बंदरों को पकड़ा जाएगा। वहीं, दूसरी ओर क्षेत्रिय वन अधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी नगर निगम की होती है। फिर भी उन्हें बीते दिनों बंदरों के आतंक का पता चला था तो उन्होंने अपनी टीमें भेजी थी। लेकिन कई दिन लगातार प्रयास करने के बाद भी बंदर उनकी पकड़ में नहीं आए।